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एक मंच पर ‘अच्छे लड़के’, अखिलेश में मोदी विरोधियों को मिला नया छत्रप

काग्रेस और रालोद ने ब़ढ़ाया दोस्ती का हाथ, ममता-लालू ने भी दिया साथ

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Sanjeev Mishra

Jan 18, 2017

Akhilesh Yadav

Akhilesh Yadav

डॉ.संजीव

लखनऊ. वे दोनों लड़ रहे थे। कोई औरंगजेब तो कोई धृतराष्ट्र की उपमाएं पा रहा था। पिता-पुत्र के इस राजनीतिक संघर्ष के बीच एक युवा राष्ट्रीय क्षितिज पर दस्तक देने की तैयारी कर रहा था। जी हां, पिछले छह माह से अधिक समय तक चली यदुवंश की महाभारत के विजेता बनकर उभरे अखिलेश अब राष्ट्रीय क्षितिज पर छाने की तैयारी में हैं। लोग उनमें मोदी से मुकाबले के लिए एक मजबूत छत्रप की छवि देख रहे हैं और अखिलेश भी उसी तर्ज पर कदम-दर-कदम आगे बढ़ रहे हैं। अभी तक मोदी विरोधी लड़ाई का मोर्चा संभाले राहुल गांधी और अखिलेश जब एक मंच पर होंगे, तो लोगों को वह पल भी याद आएंगे, जब दोनों ने एक दूसरे को अच्छा लड़का करार दिया था। कहा तो यहां तक जा रहा है कि अब पता चलेगा, कौन ज्यादा अच्छा लड़का है।
मुलायम सिंह यादव ने पांच साल पहले जब अखिलेश को सत्ता सौंपी थी, तो उन्हें भी अंदाजा नहीं होगा कि पांच साल में स्थितियां इस कदर परिवर्तित हो जाएंगी। वैसे अखिलेश को तेवर दिखाने में चार साल से ज्यादा समय लग गया। पहली दफा अखिलेश बीते वर्ष जून में तब मुखर रूप से विरोधी स्वर में सामने आए, जब उन्होंने बलराम यादव को बर्खास्त कर दिया। दरअसल, मुख्तार अंसारी के कौमी एकता दल के सपा में विलय को अखिलेश स्वीकार करने को तैयार नहीं थे और बलराम ने इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। अखिलेश के इन तेवरों को बाद कौमी एकता दल का विलय रद कर दिया गया था, पर मामला नहीं थमा। दो माह बाद शिवपाल यादव ने खुल कर अफसरों पर आरोप लगाने के साथ इस्तीफा देने तक की धमकी दे दी थी। अखिलेश उस समय तो चुप रहे किन्तु महीने भर बाद ही सितंबर में उन्होंने गायत्री प्रजापति को मंत्रिमंडल से बाहर कर व दीपक सिंघल को मुख्य सचिव पद से हटाकर तेवर और कड़े कर दिये थे। ऐसा करते हुए अखिलेश मानो स्थितियों का लिटमस टेस्ट ले रहे थे। वे सही थे, दीपक सिंघल को हटाते ही बवाल बढ़ा, अखिलेश प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाए गए तो उन्होंने शिवपाल से तीन विभाग छीन लिये। उसके बाद पिछले चार महीने अखिलेश व रामगोपाल बनाम शिवपाल व मुलायम की लड़ाई चलती रही। अखिलेश आत्मविश्वास से भरे थे और चुनाव आयोग में सही साबित भी हुए। इस पूरी लड़ाई में ममता बनर्जी से लेकर शरद यादव व अजित सिंह तक ने अखिलेश का साथ दिया। ममता बनर्जी ने तो बाकायदा लड़ाई के बीच में उन्हें शुभकामनाएं भी दी थीं। अब जब अखिलेश समाजवादी पार्टी के सबसे बड़े नेता के रूप में उभर चुके हैं, उनके रूप में मोदी विरोधियों को एक मजबूत छत्रप मिलता नजर आ रहा है। वे राष्ट्रीय स्तर पर विचार विमर्श में जुटे हैं और भविष्य के महागठबंधन के मजबूत चेहरे के रूप में खुद को स्थापित कर रहे हैं।

सर्वाधिक उत्साहित कांग्रेस
इसे अखिलेश की मजबूती ही कहेंगे कि कांग्रेस इस पूरे प्रकरण से सर्वाधिक उत्साहित है। कांग्रेस ने साफ कह दिया था कि वह समाजवादी पार्टी से गठबंधन तभी करेगी, जब अखिलेश मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार होंगे। अब जब अखिलेश पार्टी की अंदरूनी लड़ाई जीत चुके हैं, गुलाम नबी आजाद तक ने सीधे गठबंधन की बात कह दी है। शीला दीक्षित अपनी उम्मीदवारी वापस ले चुकी हैं और राहुल गांधी के साथ सीधी वार्ता पर सहमति बन चुकी है। राक्रांपा जैसे दल स्वयमेव आगे आकर गठबंधन की बात कर रहे हैं, वहीं लोकदल मुखिया अजित सिंह को भी अखिलेश के साथ आगे बढऩे की उम्मीद है। अब यदि सपा-कांग्रेस-रालोद सहित गैर भाजपा-बसपा राजनीतिक गठबंधन बनता है तो सबको चमत्कारिक नतीजों की उम्मीद भी है।

छीन लिया आसमान
भले ही राजनीतिक खींचतान मची रही हो, किन्तु इस घमासान से अखिलेश यादव ने भाजपा व बसपा से चुनाव से ठीक पहले संभावनाओं का बड़ा आसमान छीन लिया है। जब प्रधानमंत्री मोदी यहां रैलियां कर रहे थे, बसपा मुखिया मायावती अपनी प्राथमिकताएं गिना रही थीं, मीडिया से लेकर चूल्हे-चौके तक की सुर्खियों में अखिलेश थे। बीते छह माह में अखिलेश ने मुख्तार अंसारी से लेकर अतीक तक का विरोध कर अपनी एक आदर्श छवि तो स्थापित ही की है, परिवार के दबाव से बाहर आने जैसी छवि का निर्माण भी किया है। यही कारण है कि साइकिल पर कब्जा होने के बाद जहां कांग्रेस व अन्य छोटे दल सपा के साथ गठबंधन की संभावनाएं तलाश रहे हैं, बसपा व भाजपा को अपनी पूरी रणनीति ही बदलने पर विवश होना पड़ा है।

...तो कौन ज्यादा अच्छा लड़का
बात पिछले वर्ष जून की है। राहुल गांधी ने उत्तर प्रदेश प्रवास के दौरान राजधानी लखनऊ में अपने एक कार्यक्रम में कहा था कि अखिलेश अच्छा लडक़ा है, पर ठीक से काम नहीं कर पा रहा है। उस समय अखिलेश मौन रहे पर दो महीने बाद ही सितंबर में उन्होंने जवाब देते हुए कहा था कि राहुल अच्छा लडक़ा है, उसे बार-बार यूपी आना चाहिए। अब जब दोनों अच्छे लडक़े एक ही प्लेटफॉर्म पर आने जा रहे हैं, तो चर्चाएं शुरू हो गयी हैं कि कौन ज्यादा अच्छा लडक़ा साबित होगा।