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जब मिलती है दस हजार की नौकरी तो क्यों बनें इंजीनियर!

देशभर में 800 से ज्यादा इंजीनियरिंग कॉलेज पर तलवार लटक रही है जिनमें यूपी के भी 100 से ज्यादा कॉलेज शामिल हैं।

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लखनऊ. एक तरफ देशभर में 800 से ज्यादा इंजीनियरिंग कॉलेज पर तलवार लटक रही है जिनमें यूपी के भी 100 से ज्यादा कॉलेज शामिल हैं। ऐसे में यूपी के संस्थानों में इंजीनियरिंग की पढ़ाई के स्तर पर भी सवाल उठने शुरू हो गए हैं। यहां 100 से ज्यादा ऐसे कॉलेज हैं जिनमें बेहद कम दाखिले हुए हैं, वहीं 29 कॉलेज ऐसे हैं जिनमें एक भी दाखिला नहीं हुआ। इन कॉलेजों को बंद करने या फिर पॉलीटेक्निक, आईटीआई में बदलने की कोशिश की जा रही है। छात्रों व एक्सपर्ट्स का कहना है कि इंजीनियरिंग के घटते क्रेज का सबसे बड़ा कारण प्लेसमेंट न होना है। कुछ संस्थान ऐसे हैं जिनमें प्लेसमेंट होता भी है तो दस से बारह हजार प्रति माह की नौकरी मिलती है।

इंजीनियरिंग का घटा क्रेज

2015 में एकेटीयू से संबद्ध एक निजी संस्थान से पास आउट हुए राजधानी के रविंदर पाल सिंह ने बताया कि कॉलेज से कोई प्लेसमेंट नहीं हुआ। फिर एक प्लेसमेंट एजेंसी के जरिए उन्हें दस हजार रुपये की नौकरी मिली। वे अब सबको को यूपी के प्राइवेट संस्थानों से इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने से मना करते हैं। वहीं एक आईटी कंपनी में काम कर रहे निखिल श्रीवास्तव ने बताया कि नौकरी की आईटी सेक्टर में नौकरी के मामले में हालात बेहद खराब हैं। खासतौर पर छात्र अगर बड़े शहर में जाना न चाहे तो छोटे शहरों में बीटेक करके नौकरियां ही नहीं है।

यूपी के हालात बेहद खराब

करियर काउंसलर आरसी पांडे का कहना है कि इंजीनियरिंग का क्रेज यूपी में घटा है। इसका सबसे बड़ा कारण प्लेसमेंट न होना और कम पैसों की नौकरी मिलनी ही है। इसी कारण ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन (एआईसीटीई) ने ऐसे सभी कॉलेजों को बंद करने का फैसला किया है जिनकी सीटें भर नहीं पाई हैं और साल दर साल उनमें दाखिलों में गिरावाट आ रही है। सबसे ज्याजदा संकट तेलंगाना व महाराष्ट्र पर है जिसके बाद यूपी का नंबर है। यहां 100 से ज्यादा ऐसे कॉलेज हैं जिनमें बेहद कम दाखिले हुए हैं, वहीं 29 कॉलेज ऐसे हैं जिनमें एक भी दाखिला नहीं हुआ। ऐसे में इन कॉलेजों को बंद करने या फिर पॉलीटेक्निक, आईटीआई में बदलने की कोशिश की जा रही है।

डायरेक्ट एडमिशन से भी नहीं बढ़ी सीटें

एकेटीयू से जुड़े प्रदेश में लगभग 600 इंजीनियरिंग और मैनेजमेंट संस्थान हैं। इस बार शुरू से ही इनमें से कई कॉलेजों में एडमिशन बेहद कम हुए। लगभग डेढ़ महीने चली काउंसलिग के माध्यम से 18 हजार स्टूडेंट्स ने एडमिशन लिया था।इसके बाद डायरेक्ट एडमिशन के जरिए कई दाखिले जरूर हुए ळेकिन आधी से ज्यादा सीटें इस बार खाली रह गईं। एकेटीयू के कुलपति प्रो. विनय पाठक का कहना है जिन कॉलेजों में कम स्टूडेंट्स हुए हैं या जिनकी स्थिति चलाने लायक ही नहीं है एकेटीयू ऐसे संस्थानों की समीक्षा करेगा। ऐसे संस्थानों में आईटीआई, पॉलिटेक्निक, कौशल विकास केंद्र खोलने के लिए प्रेरित करेगा।s

एआईसीटीई ने किया फैसला

एआईसीटीई ने ऐसे सभी कॉलेजों को बंद करने का फैसला किया है जिनकी सीटें भर नहीं पाई हैं और साल दर साल उनमें दाखिलों में गिरावाट आ रही है। हालांकि अभी तक काउंसिल ने इन कॉलेजों की लिस्ट को सार्वजनिक नहीं किया है। जब तक सभी कॉलेज अपनी फाइनल रिपोर्ट जमा नहीं करवाते हैं, तब तक लिस्ट जारी नहीं किया जाएगा. रिपोर्ट आने के बाद ही यह तय हो पाएगा कि किन कॉलेजों को बंद किया जाना है और कौन से कॉलेज किसी और कॉलेज में शामिल किए जाएंगे।

यूपीएसईई के पांचवें राउंड की काउंसलिंग खत्म होने के बाद भी लगभग 1.44 हजार सीटें खाली रह गई थीं। फिर डायरेक्ट एडमिशन के जरिए भी इतनी सीटें नहीं भर पाईं। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि आखिर एकेटीयू से संबद्ध संस्थानों का स्तर नीचे गिर गया है या स्टूडेंट्स की इंजीनियरिंग से मोहभंग हो गया है। इस पर एकेटीयू की कुलपति प्रो. विनय पाठक का कहना है कि कई निजी संस्थानों में पढ़ाई का स्तर बेहद खराब उन्हें बंद कर देना चाहिए। एकेटीयू इसके लिए प्रयासरत है और जल्द ही एग्जीक्यूटिव काउंसलिंग में इसके लिए अध्यादेश भी लाया जाएगा।