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क्वारंटीन सेंटर पर फेसबुक पोस्ट करने पर एफआईआर, कोर्ट ने कहा असंतोष की आवाज को दबाने की कोशिश

- फेसबुक पर क्वारंटीन सेंटर की कमियां उजागर करने पर एफआईआर - मामला पहुंचा हाईकोर्ट, कोर्ट ने एफआईआर को बताया गलत - जस्टिस पंकज नकवी और जस्टिस विवेक अग्रवाल की खंडपीठ ने एफआईआर को किया खारिज
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लखनऊ

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Karishma Lalwani

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Updated: 15 Nov 2020, 12:21 PM IST

क्वारंटीन सेंटर पर फेसबुक पोस्ट करने पर एफआईआर, कोर्ट ने कहा असंतोष की आवाज को दबाने की कोशिश

क्वारंटीन सेंटर पर फेसबुक पोस्ट करने पर एफआईआर, कोर्ट ने कहा असंतोष की आवाज को दबाने की कोशिश

लखनऊ. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक मामले में फेसबुक पोस्ट को लेकर दर्ज की गई एफआईआर को खारिज करते हुए उसे अस्पष्ट कहा है। दरअसल, याचिकाकर्ता उमेश प्रताप सिंह के खिलाफ फेसबुक पर आपत्तिजनक पोस्ट करने के मामले में एफआईआर दर्ज की गई थी। मामला हाईकोर्ट तक पहुंचा तो कोर्ट ने राज्य के अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई। उमेश प्रताप सिंह ने अपनी फेसबुक पोस्ट में प्रयाग राज‌ जिले में बने एक क्वारंटीन सेंटर के कुप्रबंधन और सुविधाओं की कमी को उजागर किया था। जस्टिस पंकज नकवी और जस्टिस विवेक अग्रवाल की खंडपीठ ने एफआईआर को खारिज किया। कोर्ट ने कहा, "यह स्पष्ट है कि एफआईआर अधिकारियों द्वारा क्वारंटीन सेंटर के प्रबंधन में हुए कुप्रबंधन और अव्यवस्‍थाओं के खिलाफ पैदा हुई असंतोष की आवाज को दबाने के लिए दर्ज की गई है।" बता दें कि याचिकाकर्ता उमेश प्रताप सिंह ने अपने खिलाफ धारा 505 (2) और 501 आईपीसी के प्रावधानों और महामारी (संसोधन) विधेयक, 2020 की धारा 3 (2) के तहत तहत दायर एफआईआर को रद्द करने की मांग की थी।

कमियों को उजागर करना अपराध नहीं

याचिकाकर्ता ने दलील दी थी कि उन्होंने कोटवाबनी में बने क्वारंटीन सेंटर के कुप्रंबधन का मुद्दा उठाया था, जिसके लिए उन पर एफआईआर दर्ज की गई। जबकि आईपीसी की धारा 501 और 505 (2) के तहत कमियों और कुप्रबंधन को उजागर करना अपराध नहीं है। उन्होंने अदालत से अनुरोध किया था कि उत्तरदाताओं-अधिकारियों को निर्देश दिया जाए कि वे उन्हें गिरफ्तारी न करें और परेशान न करें।

मानहानि के दायरे में नहीं आएगा मामला

कोर्ट ने खुद क्वारंटीन सेंटर का संज्ञान लेते हुए हाइजीनिक स्थितियों की कमी और अपर्याप्त उपचार को उजागर किया था। इसलिए यह तर्क दिया गया कि अगर याचिकाकर्ता ने अपने दोस्तों और रिश्तेदारों को हुई समस्याओं को उजागर किया था, तो यह मानहानि के दायरे में नहीं आएगा। न ही ये शत्रुता को बढ़ावा देने या वर्गों के बीच घृणा फैलाने जैसा माना जाएगा।

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