13 जनवरी 2026,

मंगलवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

अल्जामइर को समझें, जानें और बीमारी को दूर करें

यहां यह भी उल्लेख करना आवश्यक है कि 21 सितम्बर जिस सप्ताह में पड़ता है उस सप्ताह को डिमेंशिया सप्ताह के रूप में मनाया जाता है।

5 min read
Google source verification

image

Rohit Singh

Sep 19, 2016

Alzhiemer

Alzhiemer

लखनऊ।
प्रत्येक वर्ष 21 सितम्बर को पूरे विश्व में
अल्जाइमर दिवस मनाया जाता है। इस दिवस को मनाने की शुरूआत वर्ष 1994 में
अल्जाइमर्स डिसीज इन्टरनेशनल (एडीआई) की 10 वीं वर्ष गांठ पर हुई थी और तब
से यह लगातार मनाया जाता है। एडीआई पूरे विश्व में 73 अल्जाइमर्स समूहों का
एक संघ है, जिसकी स्थापना 1984 में अल्जाइर्स समूहों के एक नेटवर्क के रूप
में की गई थी। जिससे कि अल्जाइमर्स रोग से संबंधित सूचनाओं, संसाधनों एवं
कुशलताओं को समझा जा सके।




यह विशेष दिवस विश्व में वृद्धावस्था में
होने वाली सबसे मुख्य समस्या कारक बीमारी के संबंध में हमारी चिंता को
प्रदर्शित करने का एक अवसर प्रदान करती है। यह विशेष दिवस यह भी प्रदर्शित
करता है कि पूरे विश्व में अल्जाइमर्स समूह एक दूसरे के साथ मिलकर कार्य कर
रहे है, जिसका उद्देश्य डिमेंशिया से ग्रस्त मरीजों एवं उनके परिवारजनों
के जीवन को बेहतर बनाना है। यहां यह भी उल्लेख करना आवश्यक है कि 21
सितम्बर जिस सप्ताह में पड़ता है उस सप्ताह को डिमेंशिया सप्ताह के रूप में
मनाया जाता है।


इस विशेष दिन पर वृद्धजनों के संज्ञानात्मक पहलू से
संबंधित संगठन, संस्थाएं एवं प्रोफेशनल्स अल्जाइमर्स डिमेंशिया के बारे में
जनमानस को जागरूक करने के लिए एक साथ प्रयास करते है। डिमेंशिया उन
बीमारियों का समूह है जो व्यक्ति की बौद्धिक, संज्ञानात्मक एवं तार्किक
क्षमता में लगातार कमी लाता है। अल्जाइमर्स, डिमेंशिया का सर्वाधिक रूप से
होने वाला एक प्रकार है।


रोगियों की संख्या
विश्व
अल्जाइमर्स
रिपोर्ट 2015 के अनुसार पूरे विश्व में 60 वर्ष या इससे ऊपर के वृद्धजनों
की कुल संख्या लगभग 90 करोड़ है और इसमें से 4.68 करोड़ वृद्धजन डिमेंशिया
नामक बीमारी से ग्रस्त है। यह रिपोर्ट यह भी बताती है कि संख्या के आधार पर
पूरे विश्व में भारत तीसरा ऐसा देश है जहां सबसे ज्यादा इस बीमारी से
ग्रस्त लगभग 41 लाख वृद्धजन रहते है।




डिमेंशिया बीमारी से ग्रस्त
इन 41 लाख वृद्धजनों में से लगभग 60 से 75 प्रतिशत लोग अल्जाइमर्स
डिमेंशिया से ग्रसित हैं। अल्जाइमर्स डिमेंशिया की शुरूआत याद्दाश्त की
कमी, सोचने-समझने की क्षमता में कमी एवं दिन प्रतिदिन के व्यवहार के
असामान्य हो जाने से होती है और समय बीतने के साथ ही इसकी तीव्रता में
बढ़ोत्तरी इस स्तर तक हो जाती है कि यह रोजमर्रा के कार्यो में व्यवधान
डालने लगती है।


लक्षण
-
याद्दाश्त
में कमी आना, जो सामान्यतः तात्कालिक सीखे गये नामों, गतिविधियों के
उद्दयेश्य, बातचीत के मुद्दे, पूरे किये गये कार्य इत्यादि को भूलने के रूप
में सामने आते है।


- याद्दाश्त की कमी में तीव्रता, रोजमर्रा की
गतिविधियों एवं जिम्मेदारियों में व्यवधान डालना प्रारंभ करती है। अक्सर इस
बीमारी से ग्रस्तरोगी दिन, तारीख, समय इत्यादि का विवरण बताने में असमर्थ
रहते है तथा

उन्हें अपने दिन प्रतिदिन के कार्यों को
करने में, पहचानने में, किसी विषय को स्पष्ट रूप से सोचने तथा समझने में
एवं उचित निर्णय लेने में मुश्किल होती है। इस बीमारी के कारण अधिकतर रोगी
का व्यक्तित्व बदल जाता है।

कारण
- डिमेंशिया का मुख्य कारण मश्तिष्क की कोशिकाओं में होने वाली क्षति है।

-
न्यूरोडिजनरेटिव बीमारियां, कुछ स्ट्रक्चरल बीमारियां या ट्रामा, वैस्कुलर
बीमारियां, मेटाबोलिक बीमारियां, डीमाईलीनेटिंग बीमारियां, संक्रामक
बीमारियां, कुपोषण तथा किसी भी प्रकार की इण्डोक्राइन बीमारियां डिमेंशिया
का कारक है।

निदान एवं उपचार
- डिमेंशिया के
निदान के लिए सघन चिकित्सकीय इतिहास, शारीरिक परीक्षण, प्रयोगशाला परीक्षण
के साथ ही याद्दाश्त, सोचने की प्रक्रिया, दिन प्रतिदिन कार्य करने की
क्षमता तथा व्यवहार में हाने वाले बदलाव के बारे में सघन परीक्षण करने की
आवश्यकता है। इसी तरह डिमेंशिया के निदान के लिए एक बहु आयामी टीम बहुत ही
जरूरी है।

डिमेंशिया का निदान बीमारी होने के पहले के जोखिम कारकों,
बीमारी के स्वरूप एवं प्रारम्भिक लक्षणों पर आधारित है। निदान के उपरान्त
चिकित्सक, दिन-प्रतिदिन के कार्यों को करने की क्षमता में होने वाली कमी,
व्यवहार मे हाने वाले बदलाव तथा संज्ञानात्मक क्षमता में होने वाले हृास
संबंधी समस्याओं का एक त्रिकोण विकसित करता है। इसके बाद उसके उपचार की
रणनीति नियोजित की जाती है। इसमें दो तरह के उपचार होते हैं। पहला जिसमें
चिकित्सक रोगी को दवा की सलाह देते है एवं प्रारंभ मे इसकी खुराक कम रखते
है। वही दूसरे में रोगी एवं उनके देखभालकर्ताओं को कई तरह के कार्य एवं
जिम्मेदारियां दी जाती है।

यह इस प्रकार है

- संज्ञानात्मक क्षमता को बढ़ाने की कोशिश
- वास्तविकता अभिमुखीकरण एवं याद्दाश्त प्रशिक्षण
- रेमिनीसेन्स थैरेपी
- संगीत एवं नृत्य थैरेपी
- मसाज थैरेपी
- यायाम/योग/आर्ट थैरेपी
- फैमिली थैरेपी
- व्यक्ति एवं सामूहिक थैरेपी
- इमोशनल ओरिएंटेड साइको थैरेपी
- परिवार एवं देखभालकर्ताओं के साथ बातचीत
- साइको एजुकेशन आफ केयरगिवर्स
- देखभालकर्ताओं के देखभाल संबंधी भार एवं समस्याओं को कम करने के तरीके बताना
- पर्यावरणीय बदलाव
-
याद्दाश्त को बढ़ाने वाले उपकरणों का प्रयोग जैसे कि घड़ी, कैलेंडर,
दिन-प्रतिदिन करने वाले कार्यों की सूची बनाना, नेम टैग तथा एलर्ट
ब्रेस्लेट इत्यादि।

उपलब्ध उपचार केन्द्र

डिमेंशिया
इण्डिया रिपोर्ट 2010 बताती है कि भारत वर्ष में सरकारी अस्पतालों की तुलना
में उनमें चलने वाले मेमोरी क्लीनिक की संख्या बहुत ही सीमित है। रिपोर्ट
में यह भी बताया गया है कि इस रोग के उपचार के लिए उपलब्ध केन्द्र में
डिमेंशिया के 35 लाख रोगियों की आवश्यकता की पूर्ति के लिए अपर्याप्त है।
उत्तर प्रदेश में डिमेंशिया के उपचार के लिए कोई पूर्ण विकसित केन्द्र
उपलब्ध नहीं है।

प्रोफेसर एससी तिवारी के नेतृत्व में किंग जार्ज
चिकित्सा विश्वविद्यालय का वृद्धावस्था मानसिक स्वास्थ्य विभाग अपने
बहुआयामी टीम के द्वारा डिमेंशिया के रोगियों के उपचार एवं उनके प्रबंधन के
लिए अथक प्रयास कर रहा है।

रोग की रोकथाम

डिमेंशियालिए
उत्तरदायी कुछ जोखिम कारकों की रोकथाम मुश्किल है, किन्तु इन जोखिम कारकों
को कम किया जा सकता है और मश्तिष्क व्यायाम के द्वारा डिमेंशिया को रोका
जा सकता है। कुछ आदतों
जैसे कि धूम्रपान एवं द्रव्य से परहेज एवं
कोलेस्ट्राल एवं ब्लड शुगर स्तर को नियमति बनाये रखना, नियमित शारीरिक
व्यायाम एवं संतुलित आहार इत्यादि इस रोग से बचने के उपाय है।

देखभालकर्ताओं
के लिए डिमेंशिया के रोगी की देखभाल एवं उनका प्रबंधन एक सूझबूझ भरा एवं
थका देने वाला कार्य है। अतः डिमेंशिया के रोगियों की देखभाल करने वालों को
एक सुनियोजित तरीके से
अपने मरीजों का प्रबंधन करना चाहिए ताकि देखभालकर्ता एवं रोगी दोनों एक बेहतर जीवन व्यतीत कर सके।

डिमेंशिया
रोगियों के लिए तनावमुक्त, सुरक्षित, दोस्ताना, आरामदायक, स्थिर, परिचित
तथा बाधा मुक्त वातावरण प्रदान करें। उचित एवं पौष्टिक आहार प्रदान करें।
रंगों की अतिरंजिता से बचे। रोगियों के प्रयोग में आने वाली वस्तुओं के
स्थान में बदलाव न करें। रोगियों को कुछ मनोरंजक गतिविधियों जैसे कि संगीत,
बागवानी इत्यादि में शामिल करें। रोगी को अगर देखने की समस्या है तो
सूर्यास्त के बाद उससे कोई कार्य
न करवायें। हमें रोगी के सामने स्पष्ट
रूप से छोटे वाक्यों का प्रयोग करते हुए बात करें। मरीज की उपस्थिति में
फुसफुसाहट से बचे। फिक्सड हियरिंग एड प्रदान करें।

इस वर्ष
डिमेंशिया जागरूकता सप्ताह 19 से 25 सितम्बर, 2016 को मनाया जा रहा है।
डिमेंशिया जागरूकता सप्ताह का उद्देश्य उन लोगों तक पहुंचना है जो
डिमेंशिया के बारे में चिंतित है और उनकी इस चिंता को कम करना एवं आगे बढ़कर
उनकी सहायता करना है, क्योंकि ’’डिमेंशिया के प्रारम्भ के साथ जीवन का अंत
नही होता है’’।

राज्य मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण, उत्तर प्रदेश
शासन इस दिवस एवं सप्ताह के अवसर पर पूरे उत्तर प्रदेश में विभिन्न
संसाधनों जैसे कि पम्पलेट, पोस्टर एवं बैनर इत्यादि के माध्यम से इस बीमारी
के पहचान एवं उचित इलाज के संबंध में जनमानस में जागरूकता फैलाने का अथक
प्रयास कर रहा है। इसके अतिरिक्त राज्य मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण के सचिव
डॉ. एस सी तिवारी, जी के द्वारा रेडियों एवं टीवी पर डिमेंशिया रोग से
संबंधित विभिन्न व्याख्यानों एवं प्रस्तुतीकरण के माध्यम से भी यह प्रयास
हो रहा है।

( ये लेख केजीएमयू के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक
और वृद्धावस्था मानसिक रोग विभाग के हेड व वरिष्ठ मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ.
एससी तिवारी से बातचीत पर आधारित है )