20 जनवरी 2026,

मंगलवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

…तो क्या सच में सपा से साइडलाइन हो रहे हैं अमर सिंह

ऐसा पहली बार नहीं है जब अमर सिंह समाजवादी पार्टी के बड़े कार्यक्रमों से दूर रहे...

3 min read
Google source verification

image

Hariom Dwivedi

Nov 24, 2016

Amar Singh

Amar Singh

लखनऊ. 21 नवंबर की सुबह मुलायम परिवार के लिए सुकून भरी रही। काफी दिनों बाद शुभचिंतकों सहित पूरा यादव कुनबा एक मंच पर नजर आया। सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव, मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और सपा प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल यादव के साथ ही छह साल का वनवास 25 दिनों में खत्म करने वाले रामगोपाल भी मंचासीन नजर आये। इतना ही नहीं समाजवादी पार्टी के रजत जयंती समारोह से दूरी बनाने वाले उत्तर प्रदेश के कद्दावर मंत्री आजम खान भी मौजूद रहे। देश के सबसे लंबे एक्सप्रेस-वे के उद्घाटन के मौके पर सांसद डिंपल यादव संग जयाप्रदा भी मौजूद रहीं, लेकिन मुलायम के दिल में जगह रखने वाले अमर सिंह समारोह से नदारद थे। सूत्रों की मानें तो जहां रामगोपाल यादव मुलायम के बुलावे पर समारोह में पहुंचे थे, वहीं अमर सिंह को कार्यक्रम का न्यौता भी नहीं भेजा गया।

ऐसा पहली बार नहीं है जब अमर सिंह सपा के बड़े कार्यक्रमों से दूर रहे। सपा के रजत जयंती समारोह के पहले और बाद में उनकी चर्चा तो खूब हुई पर वह समारोह में शामिल नहीं रहे। 3 नवंबर को अखिलेश की विकास यात्रा में भी नहीं आये। हद तो तब हो गई जब वह मुलायम के बर्थडे पर विश करने भी नहीं पहुंचे। सूत्रों की मानें तो वह भी सपा सुप्रीमो से खफा-खफा हैं क्योंकि उनके पास राज्यसभा में सपा के संसदीय दल का नेता बनने का सुनहरा अवसर था, लेकिन मुलायम ने भाई रामगोपाल पर ही भरोसा जताया।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सपा के बड़े कार्यक्रमों से दूर होने की वजह अखिलेश यादव हैं। वह कई बार सार्वजनिक मंच से अमर सिंह पर निशाना साध चुके हैं और अब रामगोपाल की भी पार्टी में वापसी हो गई है। आजम तो पहले से ही अमर के धुर विरोधी माने जाते हैं। ऐसे में अब कम ही संभावना है कि हाल-फिलहाल में मुलायम के खास अमर बड़े मंच पर दिखाई दें।

सूत्रों की मानें तो सपा के बड़े कार्यक्रमों में अमर को न बुलाना मुलायम सिंह यादव की एक रणनीति का हिस्सा है। इसलिए उन्होंने अखिलेश के अमर को न बुलाने के फैसले का समर्थन किया। कहा जा रहा है मुलायम की कोशिश प्रदेश की जनता को एकजुटता का एक मैसेज देने की है, जिसमें वे काफी हद तक सफल भी रहे। अगर दूसरे पहलू पर गौर करें तो पारिवारिक कलह के बीच अखिलेश का रुतबा बढ़ा है। सपा में अब मुख्यमंत्री ही सर्वोपरि हैं, बिना उनकी मर्जी के कुछ नहीं होने वाला। ऐसे में अब माना जा रहा है कि अमर सिंह धीरे-धीरे सपा से फिर साइडलाइन हो रहे हैं।

सपा के इन बड़े कार्यक्रमों से नदारद रहे अमर
अखिलेश की विकास यात्रा : 03 नवंबर को मुख्यमंत्री ने विकास से विजय की ओर के नारे के साथ समाजवादी पार्टी की रथयात्रा निकाली। माना जा रहा था कि इसमें अमर सिंह भी शामिल होंगे पर वे नहीं आए।

रजत जयंती समारोह : 05 नवंबर को सपा के 25 वर्ष होने पर पार्टी के रजत जयंती समारोह में सभी दिग्गज सपाई मौजूद रहे, लेकिन इस बड़े कार्यक्रम से भी अमर सिंह नदारद रहे।

सीएम का ड्रीम प्रोजेक्ट : 21 नवंबर को लखनऊ-आगरा एक्सप्रेस-वे के लोकार्पण के मौके पर जब समाजवादी पार्टी का पूरा कुनबा अखिलेश के गुण गा रहा था, अमर नोटबंदी पर मोदी के समर्थन में मशगूल थे।

मुलायम का जन्मदिन : 22 नवंबर को सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव का जन्मदिन था। हालांकि, रेल हादसे से दुखी मुलायम ने बर्थडे सेलिब्रेशन से मना कर दिया था, बावजूद इसके मुलायम आवास पर बधाई देने वालों का तांता लगा रहा। लेकिन अमर सिहं नहीं आए।

गाजीपुर में मुलायम की रैली : 23 नवंबर को गाजीपुर में मुलायम की पहली चुनावी रैली में भी अमर सिंह गायब थे, जबकि पूर्वाचंल में उनकी ठाकुर वोटरों पर खासी पकड़ मानी जाती है।