
अमर सिंह का बड़ा ऐलान, लोकसभा चुनाव में करेंगे बीजेपी का समर्थन
लखनऊ. लोकसभा चुनाव के लिए सभी पार्टियों ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। भाजपा ने अपनी नई टीम का गठन कर लिया है तो अन्य दलों ने भी पार्टियों में बड़े फेर बदल किया हैं। इन सब के बीच एक बड़ी खबर यह है की राजयसभा सांसद अमर सिंह ने चुनाव को लेकर बड़ा ऐलान कर दिया है। लोक सभा चुनाव में वे किसका समर्थन करेंगे इस बात का खुलासा उन्होंने कर दिया है। उन्होंने कहा कि मैं भाजपा का खुलकर समर्थन करूंगा, भले ही भाजपा में शामिल होऊं या नहीं। देश में करोड़ों लोग भाजपा का समर्थन करते हैं, क्या वे भाजपा में पंजीकरण कराते हैं? भाजपा को समर्थन देने के लिए आवश्यक नहीं कि उसमें शामिल हुआ जाए।
सीएम योगी से मुलाकात करने आए थे अमर सिंह
दो दिन पहले लखनऊ दौरे पर आए अमर सिंह ने सूबे के मुखिया योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की। मुलाकात के दौरान उन्होंने लोकसभा चुनाव के बारे काफी बातें की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को रोकने के लिए प्रदेश में महागठबंधन नहीं, महाहठबंधन बन रहा है। बसपा सुप्रीमो मायावती को इसका पूरा लाभ नहीं मिल पाएगा। हां, हारी-थकी सपा को जरूर थोड़ी बहुत ऊर्जा मिलेगी। यह मोदी-योगी का दौर चल रहा है, इसमें किसी हठबंधन की चलने वाली नहीं है।
भाजपा में शामिल होने की लगाई जा रही थी अटकलें
अमर सिंह की अचानक योगी आदित्यनाथ से मुलाकात में प्रदेश की राजनीति गर्म कर दी थी और यह अटकलें लगाई जा रही थीं कि वह भाजपा में शामिल हो सकते हैं। हालांकि बाद में उन्होंने खुद इन कयासों को सिरे से ख़ारिज कर दिया और कहा कि लोग मकान, सुरक्षा व गायों के लिए मुख्यमंत्री से मिल सकते हैं तो मैं क्यों नहीं मिल सकता? उनका इशारा मुलायम व उनके परिवार के सदस्यों की तरफ था। आगे उन्होंने कहा कि योगी आदित्यनाथ के सीएम बनने के बाद उनसे यह मेरी पहली मुलाकात थी। इस सामान्य भेंट को राजनीति से नहीं जोड़ना चाहिए। अभी भाजपा में जाने जैसी कोई बात नहीं है। यदि भाजपा में जाऊंगा तो प्रेस कॉन्फ्रेंस करके एलान करूंगा, इसमें लज्जा की क्या बात है? राजनीतिक व्यक्ति का किसी दल में जाना कोई कौतूहल नहीं होता लेकिन मेरे लिए अभी ऐसा कुछ नहीं है।
सपा-बसपा का गठबंधन है महाहठबंधन
अमर सिंह ने सपा-बसपा के गठबंधन को महाहठबंधन करार दिया। उन्होंने कहा कि मायावती कह रही हैं कि सम्मानजनक सीट मिलने पर ही गठबंधन करेंगी। सम्मानजनक सीट की कोई परिभाषा नहीं है। अखिलेश पूर्ण समर्पण करेंगे तभी गठबंधन होगा। इसका पूरा लाभ मायावती को नहीं मिलेगा। बसपा का अपना जनाधार है। उससे गठबंधन करके पारिवारिक, राजनीतिक व सामाजिक तौर पर हारी-थकी सपा को जरूर थोड़ी बहुत ऊर्जा मिल जाएगी। ये दल वर्षों से आपस में लड़ते रहे हैं। नेता कमरे में बैठकर गठबंधन कर लेंगे लेकिन जमीन पर इसका ज्यादा असर नहीं दिखेगा।
Updated on:
26 Jul 2018 03:14 pm
Published on:
26 Jul 2018 10:03 am
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