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तो क्या चुनावी स्टंट है आरिफ और सारस की कहानी, सच्चाई जानकर चौंक जाएंगे आप

Amethi News : अमेठी निवासी आरिफ और सारस की दोस्ती की कहानी सोशल मीडिया समेत अखबारों तक सुर्खियां बनी है। इसको लेकर सपा प्रमुख अखिलेश यादव भी कई बार भाजपा सरकार पर तंज कस चुके हैं।

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लखनऊ

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Vishnu Bajpai

Apr 03, 2023

Is the story of Arif and Saras an election stunt?

अमेठी के जामो ब्लॉक के मंढका गांव निवासी आरिफ और सारस की दोस्ती की कहानी इन दिनों सोशल मीडिया समेत अखबारों तक सुर्खियां बनी है। इसको लेकर सपा प्रमुख अखिलेश यादव भी कई बार भाजपा सरकार पर तंज कस चुके हैं। ऐसे में अब यह सवाल उठने लगा है कि कहीं इस कहानी का मूल आरिफ का चुनावी स्टंट तो नहीं है। आइए जानते हैं आखिर इसकी सच्चाई क्या है।

पहले कहानी की शुरुआत समझिए...
आरिफ के अनुसार यह दोस्ती मार्च 2022 से शुरू हुई। बकौल आरिफ "साल 2022। मार्च का महीना। अमेठी जिले के जामो ब्लॉक का मंढका गांव। तीस वर्षीय आरिफ रोज की तरह सुबह-सुबह अपने खेतों की ओर गए थे। खेत से कुछ दूर पहले ही आरिफ को एक सारस घायल अवस्‍था में पड़ा मिला। नजदीक पहुंचने पर असहाय सारस आरिफ की ओर मदद भरी नजरों से देखने लगा। उसका पैर टूटा था। आरिफ उसे अपने घर ले आए। यहां लाकर उसकी मरहम पट्टी की गई।

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साल भर पहले जख्म पर लगाया था मरहम
आरिफ बताते हैं "साल भर पहले सारस पक्षी के घाव पर मरहम लगाया था। वक्त के साथ घाव ठीक तो हुआ ही, साथ ही सारस का उसके साथ भावनात्मक लगाव भी बढ़ गया। अब इसे कुदरती रिश्ता कहें या मानवता की पराकाष्ठा। न सारस आरिफ को छोड़ना चाहता है, और न आरिफ सारस को छोड़ना चाहते हैं। यानी दोनों एक-दूसरे के बिना नहीं रहना चाहते। मार्च 2022 से शुरू हुई इस इंसान और पक्षी की दोस्ती की कहानी फरवरी 2023 में सार्वजनिक होती है। इसके बाद क्या हुआ, आइए बताते हैं।

वन विभाग ने समसपुर पक्षी विहार में सारस छोड़ने की अनुमति मांगी
डिविशनल फॉरेस्ट ऑफिसर अमेठी डीएन सिंह ने बताया कि उन्होंने मार्च में प्रधान मुख्य वन संरक्षक को पत्र लिखा था। इसमें सारस को आरिफ से अलग करके उसके प्राकृतिक वास समसपुर पक्षी विहार में छोड़ने की अनुमति मांगी थी।

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अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक सुनील चौधरी ने प्रभागीय वनाधिकारी अमेठी को सारस को सुरक्षित समसपुर पक्षी विहार छोड़ने की अनुमति दे दी। इसके बाद 20 मार्च को आरिफ से सारस को अलग कर दिया गया।

अखिलेश यादव के आने के बाद शुरू हुई कार्रवाई
23 मार्च को पत्रिका ने आरिफ से बात की। इसमें आरिफ ने बताया था कि "समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अखिलेश यादव क्षेत्र में आए थे। जहां उन्होंने आरिफ और सारस से भी मुलाकात की। अखिलेश यादव अचानक आए। सारस और उनसे मिलकर खुशी व्यक्त की और चले गए।

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इसके बाद अचानक वन विभाग के अधिकारी घर पहुंच गए, और बोले कि ऊपर से आदेश है। सारस को हमें पक्षी विहार में छोड़ना होगा।" आरिफ आगे बताते हैं ‌"ऐसा नहीं है कि पहले वन विभाग के अधिकारी यहां नहीं आए। वे पहले भी आते थे, सारस के बारे में पूछताछ करते थे, लेकिन कभी ले जाने की बात नहीं की।"

अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार पर कसे तंज
वन विभाग द्वारा सारस को आरिफ से अलग करने के बाद सपा मुखिया अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार पर एक के एक कई बार ट्वीट कर तंज कसे। इसके बाद सारस अमेठी पक्षी विहार से गायब हो गया। हालांकि वन विभाग ने उसे पास के ही गांव से बरामद कर लिया।

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अखिलेश ने फिर ट्विटर पर तंज कसे। शासन के आदेश पर सारस को अमेठी से हटाकर कानपुर शिफ्ट किया गया। जहां अखिलेश यादव उसे देखने पहुंच गए। इस दौरान उनके साथ आरिफ भी मौजूद रहे।

अब जानते हैं कि इस सबके पीछे की मंशा क्या है?
अमेठी में एक साल तक गुप्त रही आरिफ और सारस की दोस्ती सार्वजनिक होते ही अखिलेश का मिलने जाना। इसके बाद अचानक वन विभाग का सक्रिय होना और आरिफ से सारस को अलग करना। फिर अखिलेश यादव का ट्विटर पर भाजपा सरकार के खिलाफ तंजबाण छोड़ना और आरिफ के संपर्क में बराबर बने रहना।

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बाद में आरिफ के साथ कानपुर जाकर सारस का हालचाल लेना। यह सब ठीक निकाय चुनाव के पहले होना। इन सब बातों पर ध्यान देने के बाद जो फिल्म बन रही है। उसके अनुसार यह आरिफ का चुनावी स्टंट कहा जा सकता है। फिलहाल यह कितना सच है। आने वाले समय में ही पुख्ता होगा।