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बलरामपुर से है अटल बिहारी का पुराना नाता, यहां से पहली पर जीते थे चुनाव

विरोधी भी करते हैं अटल का सम्मान, सदन में उनको सुनने के लिए सभी हो जाते थे शांत।  

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Atal Bihari Bajpayee

बलरामपुर से है अटल बिहारी का पुराना नाता, यहां से पहली पर जीते थे चुनाव

लखनऊ. अटल बिहारी वाजपेयी राजनीति में ऐसे व्यक्तित्व हैं जिन्हें विरोधी भी पसंद करते हैं। उनका भाषण और अंदाज ऐसा की हर कोई उनको सुनने के लिए रूक जाता था या मानो ठहर जाता था, जब वे बोलते थे तो सदन में सन्नाटा छा जाता था और हर कोई उनकी आवाज को ध्यान से सुनता था। जब नेहरू जी प्रधानमंत्री थे उस समय अटल जी जब सदन में बोलने के लिए खड़े होते थे तो विरोधी उनकी आवाज को दबा देते थे और उन्हें बोलने का मौका काफी कम ही मिलता था, उस समय नेहरू जी कहा करते थे कि इस व्यक्ति को बोलने का मौका दें यह व्यक्ति आग चलकर देश का प्रधानमंत्री बनेगा और ऐसा ही हुआ बाद में अटलजी देश के प्रधानमंत्री बने। अटल बिहारी बाजपेयी पहली बार यूपी के बलरामपुर से सांसद चुने गए थे।

आज अटल जी बीमार हैं और दिल्ली के एम्स हॉस्पिटल में भर्ती हैं। अटल जी का यूपी से गहरा नाता है, कानपुर से उन्होंने राजनीति शास्त्र में एमए किया और यहीं से उनके राजनीति की शुरुआत भी हुई। वे लखनऊ से कई बार लोकसभा सांसद रहे। 2005 में उन्होंने राजनीति से सन्यास ले लिया।

अटल बिहारी वाजपेयी का जन्म 25 दिसंबर 1924 को मध्य प्रदेश के ग्वालियर में एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था। इनके पिता कृष्ण बिहारी बाजपेयी हिन्दी एवं ब्रज भाषा के कवि थे और गांव के स्कूल में टीचर थे। अटलजी को काव्य विरासत में मिली है।

1942 में आए राजनीति में
अटल विहारी वाजपेयी 1942 में राजनीति में आए उस समय भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान उनके भाई २३ दिनों के लिए जेल गए थे। अटल जी ने 1951 में आरएसएस के सहयोग से जनसंघ पार्टी बनाई, जिसमें श्यामा प्रसाद मुखर्जी जैसे दिग्गज नेता शामिल हुए।
अटल जी पहली बार 1957 में यूपी के बलरामपुर संसदीय क्षेत्र से लोकसभा का चुनाव जीतकर संसद पहुंचे।
१९७५-१९७७ में आपातकाल के दौरान वाजपेयी अन्य नेताओं के साथ उस समय गिरफ्तार कर लिए गए, जब वे आपातकाल के लिए इंदिरा गांधी की आलोचना कर रहे थे। जेल से छूटने के बाद वाजपेयी ने जनसंघ को जनता पार्टी में विलय कर दिया। १९७७ में देश में लोकसभा का चुनाव हुआ जिसमें जनता पार्टी की जीत हुई और मोरारजी भाई देसाई के नेतृत्व में केंद्र में सरकार बनी जिसमें अटल जी विदेश मंत्री बने। जनता पार्टी की सरकार 1979 में गिर गई, लेकिन उस समय तक अटल जी एक अनुभवी नेता और कुशल वक्ता के रूप में जाने जाने लगे थे।

जब मनमोहन सिंह ने अटलजी को भीष्म पितामह कहा था
अटल जी 1996 से लेकर 2004 तक तीन बार भारत के प्रधानमंत्री बने। 1996 में बीजेपी देश की सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी और वाजपेयी पहली बार पीएम बने। 1998 में दुबारा हुए लोकसभा चुनाव में बीजेपी को ज्यादा सीटें मिलीं और कुछ अन्य पार्टियों के सहयोग से वाजपेयी ने एनडीए का गठन किया और फिर पीएम बन गए। यह सरकार तेरह महीने तक चली। 1999 में फिर लोकसभा का चुनाव हुआ और बीजेपी फिर से सत्ता में आई और वाजपेयी तीसरी बार प्रधानमंत्री बने और इस बार उन्होंने अपना कार्यकाल पूरा किया। राजनीति में अटल जी जैसा नेता विरले ही पैदा होता है। 2005 में वाजपेयी ने राजनीति से सन्यास ले लिया। जब अटलजी ने सन्याय लिया तो उसी समय मनमोहन सिंह ने अटल बिहारी वाजपेयी को वर्तमान राजनीति का भीष्म पितामह कहा था।