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Atal Bihari Vajpayee Birth Anniversary: भारतीय राजनीति के शिखर पुरुष कहे जाते थे अटल बिहारी वाजपेयी, लखनऊ से रहा गहरा नाता

जननायक अटल बिहारी वाजपेयी जमीन से जुड़े एक ऐसे राजनेता थे, जो शीर्ष पर पहुंचने के बाद भी आम आदमी के लिए अटल ही बने रहे। वह राजनीति के शिखर पर पहुंचने के बाद भी सादगी से ही अपना जीवन व्यतीत करने में विश्वास रखते थे।

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Atal Bihari Vajpayee was called pinnacle of Indian politics

Atal Bihari Vajpayee was called pinnacle of Indian politics

लखनऊ. जननायक अटल बिहारी वाजपेयी जमीन से जुड़े एक ऐसे राजनेता थे, जो शीर्ष पर पहुंचने के बाद भी आम आदमी के लिए अटल ही बने रहे। वह राजनीति के शिखर पर पहुंचने के बाद भी सादगी से ही अपना जीवन व्यतीत करने में विश्वास रखते थे। शायद यही वजह रही है राजनीति में तरह-तरह के झंझावतों से जूझने के बाद भी सर्वदा बने रहे। आज अटल बिहारी वाजपेयी की बर्थ एनिवर्सरी है।

अटल बिहारी वाजपेयी का जन्म मध्य प्रदेश के ग्वालियर में हुआ था। लेकिन उनका कर्मक्षेत्र उत्तर प्रदेश रहा है। यूपी की भूमि से उन्हें विशेष लगाव था। कानपुर में अटल बिहारी वाजपेयी ने उच्च शिक्षा से लेकर राजनीति तक का ककहरा सीखा। वहीं लखनऊ को कर्मभूमि बनाते हुए संसद का रास्ता यहीं से तय करते गए। अटल बिहारी वाजपेयी ने पढ़ाई के दौरान ही छात्र राजनीति में खास रूचि लेना शुरू कर दिया। तब इस बात का अंदाजा किसी को भी नहीं था कि साधारण सा दिखने वाला छात्र एक दिन देश का प्रधानमंत्री बनेगा।

लखनऊ को आज भी अटल बिहारी वाजपेयी की कर्मस्थली के रूप में जाना जाता है। वह लखनऊ से पांच बार सांसद चुने गए। इससे पहले भाजपा ने कभी लखनऊ से चुनाव नहीं जीता था। इससे पहले इसे कांग्रेस का गढ़ माना जाता था। अटल बिहारी वाजपेयी देश के उन चुनिंदा राजनेताओं में से थे, जिन्हें दूरदर्शी माना जाता था। आज वाजपेयी जी भले ही दुनिया में नहीं हैं लेकिन उनकी वाणी, उनका जीवन दर्शन सभी भारतवासियों को हमेशा प्रेरणा देता रहेगा। उनका ओजस्वी, तेजस्वी और यशस्वी व्यक्तित्व सदा देश के लोगों का मार्गदर्शन करता रहेगा। ऐसे में आइए जानते हैं वाजपेयी के बारे में ऐसी अनकही बातें, जिन्होंने उन्हें आम से खास बना दिया।

कवि प्रेमी

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के अंदर बचपन से ही एक कवि था। सभी जानते हैं कि वह एक अच्छे राजनेता होने के साथ-साथ एक अच्छे कवि भी थे। उन्हें कविताओं का जादूगर कहा जाता था। 'हार नहीं मानूंगा, रार नहीं ठानूंगा, काल के कपाल पर लिखता मिटाता हूं, गीत नया गाता हूं'... उनकी लोकप्रिय कविताओं में से एक है। संसद से लेकर जनसभाओं तक में वह अक्सर कविता पाठ के मूड में आ जाते थे।

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हिंदी प्रेमी

अटल बिहारी वाजपेयी ने हिंदी को विश्व स्तर पर पहचान दिलाने के लिए कई प्रयास किए थे। उनकी खुद की हिंदी भाषा शैली में मजबूत पकड़ थी। 1977 में वे जनता सरकार में विदेश मंत्री थे। संयुक्त राष्ट्र संघ में
उनके द्वारा दिया गया हिंदी में भाषण उस समय काफी लोकप्रिय हुआ था। उनके द्वारा हिंदी के चुने हुए शब्दों का ही असर था कि यूएन के प्रतिनिधियों ने खड़े होकर वाजपेयी के लिए तालियां बजाईं थीं। उन्होंने कई बार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हिंदी में दुनिया को संबोधित किया था।

बाजरे का पुआ और कड़ी के शौकीन थे वाजपेयी

अटल बिहारी वाजपेयी पर डॉ. प्रीतम सिंह द्वारा लिखी गई पुस्तक ‘अटल बिहारी बाजपेयी सृजन और मूल्यांकन’ का विमोचन दिसंबर 2014 में हरियाणा के कुरुक्षेत्र जिले में विद्या भारती के संस्कृति भवन में हुआ था। डॉ. प्रीतम वे पहले शख्स हैं जिन्होंने वाजपेयी पर शोध किया है। कुल 275 पन्नों की इस पुस्तक के कई पृष्ठों पर डॉ. प्रीतम सिंह के शोध कार्य की झलक प्रस्तुत किए गए घटनाक्रमों के रूप में दिखाई देती है। डॉ. प्रीतम सिंह के किताब में उल्लेख है कि अटल को बाजरे का पुआ और गुझिया बहुत पसंद हैं। ग्वालियर का चूड़ा तो उन्हें इतना अच्छा लगता था कि जब भी वे ग्वालियर जाते तो ढेर सा चूड़ा खरीद लाते।

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अटल-आडवाणी की सुपरहिट जोड़ी

कभी राजनीति में अटल-आडवाणी की तूती बोलती थी। कांग्रेस के खिलाफ राजनीति का सबसे बड़ा केंद्र बनकर उभरी इस जोड़ी ने देश में पहली बार गैर कांग्रेस सरकार बनाई थी। लेकिन भारतीय राजनीति में अटल की भूमिका हमेशा याद रखी जाएगी।