22 जनवरी 2026,

गुरुवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

स्वर्ण प्राशन संस्कार का सनातन और आयुर्वेद दोनों में अहमियत, जानें बच्चों के लिए क्यों है जरूरी

Ayurveda: हजारों वर्ष पूर्व वायरस और बैक्टीरिया जनित बीमारियों से लड़ने के लिए ऋषि-मुनियों ने एक ऐसे रसायन का निर्माण किया, जिसे स्वर्ण प्राशन कहा जाता है। स्वर्ण प्राशन बच्चों को स्वस्थ रखने में बहुत प्रभावी है।

2 min read
Google source verification

लखनऊ

image

Aman Pandey

Sep 25, 2024

Ayurveda: "आयुर्वेदिक दवाओं पर शोध कर उन्हें आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के मानकों पर परखना जरूरी है। अगर हम आयुर्वेद शास्त्र को केवल कहानियों या कथाओं के जरिए बच्चों को समझाएंगे, तो वे इसे सही से नहीं अपना पाएंगे। इसलिए हमें इसे प्रमाणों के साथ समझाना होगा, ताकि यह स्पष्ट हो कि जो लिखा गया है, उसका वैज्ञानिक आधार क्या है।

इसी दिशा में आरोग्य भारती अवध प्रांत ने स्वर्ण प्राशन पर यूपी के संजय गांधी पीजीआई लखनऊ और किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी के साथ मिलकर शोध शुरू किया है। " यह बात वैद्य व आरोग्य भारती अवध प्रांत के उपाध्यक्ष अभय नारायण तिवारी ने कही।

'स्वर्ण प्राशन बच्चों को स्वस्थ रखने में बहुत प्रभावी'

लखनऊ के डा. अभय नारायण तिवारी ने कहा कि शोध में यह पाया गया कि स्वर्ण प्राशन बच्चों को स्वस्थ रखने में बहुत प्रभावी है। इससे न केवल इम्यून सिस्टम मजबूत होता है, बल्कि बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास को भी बढ़ावा मिलता है। जब शरीर में पोषक तत्वों की कमी होती है, तो इम्यूनिटी कमजोर हो जाती है, जिससे बच्चे बार-बार बीमार पड़ने लगते हैं।

यह भी पढ़ें: पीएम मोदी के US दौरे पर सीएम योगी ने दी प्रतिक्रिया, बोले- विदेश में मजबूत की भारत की छवि

आयुर्वेद में इस समस्या से बचने के लिए स्वर्ण प्राशन लेने की सलाह दी जाती है। शोध में यह भी पाया गया कि जिन बच्चों ने एक महीने तक स्वर्ण प्राशन लिया, उनमें अच्छे भाव उत्पन्न करने वाले हार्मोन में वृद्धि हुई और उनके शरीर की कोशिकाओं पर भी सकारात्मक असर पड़ा।

जानें क्या है स्वर्ण प्राशन

सनातन धर्म में बच्चे के जन्म होने के बाद 16 तरह संस्कार कराए जाने की मान्यता है। इनमें पहला संस्कार स्वर्ण प्राशन होता है, जो उत्तम स्वास्थ्य के लिए कराया जाता है। ऋषि-मुनियों द्वारा हजारों वर्ष पूर्व वायरस और बैक्टीरिया जनित बीमारियों से लड़ने के लिए एक ऐसे रसायन का निर्माण किया गया, जिसे स्वर्ण प्राशन कहा जाता है। स्वर्ण प्राशन संस्कार स्वर्ण (सोना) के साथ शहद, ब्रह्माणी, अश्वगंधा, गिलोय, शंखपुष्पी, वचा जैसी जड़ी बूटियों से तैयार होता है।