
पुराना दांव आजमाने की तैयारी में मायावती, संगठन में अपर कास्ट को बड़ी जिम्मेदारी
लखनऊ. सत्ता में वापसी के लिए मायावती एक बार फिर पुराना दांव आजमाने की तैयारी में हैं। इसके तहत बसपा प्रमुख ने अब संगठन में ब्राह्मण और अपर कास्ट की अन्य जातियों को संगठन में बड़ी जिम्मेदारी देने का फैसला किया है, जबकि अभी तक मूल संगठन में अधिकतर दलित नेताओं को ही जिम्मेदारी मिलती थी। अपर कास्ट के पू्र्व मंत्रियों व प्रभावशाली नेताओं को मंडलों में मुख्य जोन क्वार्डिनेटर की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके अलावा मायावती ने बसपा की सभी भाईचारा कमेटियों को भंग कर दिया है। नई कमेटी में ब्राह्मण, क्षत्रिय, पिछड़े और मुस्लिम नेताओं की अहम भागीदारी है।
बहुजन समाज पार्टी ने पूर्व शिक्षा मंत्री रंगनाथ मिश्र को मिर्जापुर मंडल, पूर्व एमएलसी ओपी त्रिपाठी को देवीपाटन मंडल, अरुण पाठक को आजमगढ़ मंडल और वीरेंद्र पांडेय को गोरखपुर मंडल की जिम्मेदारी सौंपी है। अन्य मंडलों में भी क्वार्डिनेटर लिस्ट तैयार हो रही है, जिसमें अपर कास्ट के प्रभावशाली नेताओं को जिम्मेदारी दी जाएगी। जोनल क्वार्डिनेटरों के जिम्मे न सिर्फ ब्राह्मण समाज, बल्कि अपर कास्ट की अन्य जातियों के लोगों को भी बसपा से जोड़ना है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि कुछेक अपवाद छोड़ दें तो मायावती पर अन्य जातियों खासकर अपर कास्ट को तरजीह न देने के आरोप लगते रहे हैं। इसे देखते हुए मायावती विधानसभा चुनावों में किसी भी जाति को नाराज न करने की रणनीति के तहत यह कदम उठाया है।
2022 के विधानसभा चुनाव से पहले मायावती के सामने ऐसे विपक्षी दलों की तगड़ी चुनौती है जो बसपा के मूल वोट बैंट में सेंध लगा रहे हैं। इनमें सबसे ऊपर भाजपा और कांग्रेस है। इसके अलावा भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर भी कुछ हद तक बसपा के दलित वोटों में सेंध लगाने को तैयार हैं। ऐसे में मायावती की निगाहें अब अपर कास्ट पर टिकी हैं, ताकि वोट प्रतिशत का बैलेंस बनाकर रखा जा सके। यही कारण है कि उन्होंने मूल संगठन में अपर कास्ट के नेताओं को भी जिम्मेदारी दी है।
Published on:
29 Jul 2020 05:03 pm
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