
लखनऊ। ईद-उल-जुहा का पर्व इस बार 2 सितंबर को मनाया जाएगा। इस पर्व को बकरीद के नाम से भी जाना जाता है। पूरे देश के साथ ही यूपी के लखनऊ व अन्य शहरों में ईद-उल-जुहा को लेकर तैयारियां जोरो पर हैं। इस्लामिक कैलेंडर के मुताबिक ईद-उल-जुहा का पर्व 12 वें महीने के दसवें दिन मनाया जाता है। इस दिन कुर्बानी दिए जाने की परम्परा है। बकरीद से पहले लखनऊ में कई जगहों पर बकरों की मंडी लगती है। बकरीद के दिन होने वाले नमाज को लेकर मस्जिदों में भी ख़ास तैयारी की जाती है।
इस्लाम को मानने वाले लोग बकरीद के दिन अपनी किसी प्रिय चीज को अल्लाह के लिए कुर्बानी देते हैं। कुर्बानी की परम्परा में बकरों की कुर्बानी देने की परम्परा प्रचलन में हैं। बकरीद पर मुस्लिम समुदाय के लोग बकरे की कुर्बानी देते हैं। कुर्बानी के लिए बकरे को घर में पाला-पोसा जाता है और उसका पूरा ख्याल रखा जाता है। इस बकरे की बकरीद के दिन कुर्बानी दी जाती है।
परंपरा के मुताबिक कुर्बानी के गोश्त को तीन हिस्सों में बांटा जाता है। इस गोश्त का एक हिस्सा कुर्बानी करने वाला अपने घर में रख लेता है और दो हिस्सें को बाँट देता है। बकरीद की नमाज पढ़ने के बाद कुर्बानी दी जाती है। कुर्बानी तीन दिनों तक 2 से 4 सितंबर तक दी जा सकती है। सुबह के समय मुस्लिम समाज के लोग मस्जिदों में एक साथ नमाज पढ़ते हैं और नमाज पढ़ने के बाद एक दूसरे के गले लगकर ईद की बधाई देते हैं। लखनऊ के सभी प्रमुख मस्जिदों में इस दिन होने वाली नमाज को लेकर खासी तैयारी की जाती है। नमाज के बाद वापस घर लौटने पर बकरे की कुर्बानी दी जाती है। बकरीद पर कुर्बानी देने के लिए बकरों की बिक्री के समय बकरों की बोली बढ़चढ़ कर लगती दिखाई जाती है।लखनऊ में तो कई बार तो बकरों की बोली पांच लाख रूपये तक भी पहुंचते देखी जा चुकी है।
Published on:
31 Aug 2017 01:33 pm
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