
सालों से फ्राईड चिकन के प्रेमियों को अपनी ओर आकर्षित करता रहा है और इस बार इस ब्रांड ने चुनिंदा लोगों को खास ‘ट्रीट’ के लिए आमंत्रित किया है। इस ट्रीट में लोगों को पता चलेगा कि केएफसी के किचन के अंदर क्या होता है। मैरिनेशन से लेकर, ब्रेडिंग तक और फिर गोल्डन ब्राउन फ्राई होने तक चिकन को किस प्रकार ताजा पकाया जाता है। सीक्रेट रेसिपी का ‘रहस्य’ अभी भी गोपनीय रखा गया है।

ग्राहकों को इस अभियान के तहत अपने किचन में बुला रहा है। इसलिए इसे ओपन किचन कहा जा सकता है। इस विजि़ट में शेफ और किचन के स्टाफ द्वारा बरती जाने वाली स्वच्छता और सुरक्षा के बारे में पूरी संतुश्टि हो गई। रेस्टोरैंट में टीम के सभी सदस्य मित्रवत थे और हर विवरण जानते थे। उन्होंने चिकन के स्रोत, उन्हें स्टोर करने और पकाने की प्रक्रियाओं आदि के बारे में पूछे गए सभी प्रश्नों का धैर्य से उत्तर दिया।

उन्होंने बताया कि चिकन पकाए जाने से पहले 34 क्वालिटी चेक्स से गुजरता है। इसमें 100 प्रतिशत होल मसल चिकन का उपयोग किया जाता है और कोई भी चिकन प्रोसेस नहीं किया जाता। केएफसी की टीम में हमें यह सब पूरे विस्तार से समझाया। पकाने में इस्तेमाल किया जाने वाला चिकन ग्रेड-ए गुणवत्ता का होता है और वेंकी एवं गोदरेज जैसे सर्वाधिक प्रतिश्ठित भारतीय आपूर्तिकर्ताओं से 100 प्रतिशत देसी स्रोत से प्राप्त किया जाता है।

चिकन पकाने में संलग्न सभी लोगों को किचन में प्रवेश करने से पहले हेयरनेट पहनना, हाथ धोना और सैनिटाईज़ होना बहुत जरूरी है। सबसे पहले चिकन को मैरिनेट किया जाता है, फिर इसे ब्रेड करके गोल्डन कुरकुरापन आने तक फ्राई किया जाता है। टीम के एक सदस्य ने बताया, ‘‘हमारे चिकन बहुत सावधानी से बनाए जाते हैं। उन्हें दिन में कई बार कुक किया जाता है। गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए हमारे पास कठोर निरीक्षण प्रक्रिया है। यदि कोई चिकन अपने होल्डिंग टाईम से ज्यादा समय रख दिया जाता है, तो उसे तत्काल फेंक दिया जाता है। इस प्रकार ग्राहकों तक केवल ताजा चिकन ही पहुंचता है।

अद्भुत बात यह है कि सभी चिकन उनके कुक द्वारा हाथों से पकाए जाते हैं। यह काम केएफसी के हर रेस्टोरैंट में होता है, ताकि चिकन फिंगर लिकिंग एवं ताजा हों। षेफ हर बैच से नमूने का तापमान, टैक्सचर एवं कलर जाँचता है और सुनिश्चित करता है कि यह सही तरीके से और पूरा पका हो। सबसे अच्छी बात यह है कि शाकाहारी एवं गैरशाकाहारी सामान अलग-अलग पकाया जाता है। उनका तेल, बर्तन और सामग्री अलग-अलग होते हैं। यहां तक कि वेज सेक्शन में काम करने वाले टीम के सदस्य ग्रीन एप्रॉन पहनते हैं, वहीं नॉन-वेज सेक्शन में काम करने वाले टीम के सदस्य रेड एप्रॉन पहनते हैं। जब किचन में अलार्म बजता है, तो पूरी टीम तेजी से वॉशिंग एरिया की ओर जाती है। उन्होंने बताया, हाईज़ीन के लिए कठोर नियमों का पालन किया जाता है। टीम के सदस्यों को हर 30 मिनट में अपने हाथ स्क्रब करना, धोना और सैनिटाईज़ करना जरूरी है। यह याद दिलाने के लिए अलार्म समय पर बज जाता है। सभी बर्तनों को दिन में 7 बार सैनिटाईज़ किया जाता है और खाना पकाने के लिए केवल आरओ वॉटर का उपयोग किया जाता है