
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में मुसलमानों को एक भी टिकट न देने वाली भारतीय जनता पार्टी उनको विधान परिषद भेजने में सपा से आगे है। वर्तमान समय में समाजवादी पार्टी के 2 मुस्लिम नेता विधान परिषद के सदस्य है। वहीं, भाजपा के 3 मुस्लिम नेता विधान परिषद के सदस्य है। तारीक मंसूर के विधान परिषद का सदस्य बनने के बाद भाजपा के मुस्लिम विधायकों की संख्या 4 हो जाएगी। मुसलमानों को विधान परिषद भेजना भाजपा की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।
विधान परिषद में ये 4 मुस्लिम नेता हैं BJP के विधायक
(1) मोहसीन रजा- उत्तर प्रदेश वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष मोहसीन रजा वर्तमान समय में विधान परिषद में BJP के सदस्य है। वह 2017 में योगी सरकार में मंत्री बने लेकिन उस समय किसी सदन का सदस्य न होने के कारण पार्टी ने उन्हें विधान परिषद का सदस्य बनाया था। हालांकि, वह इस साल विधान परिषद से रिटायर भी होने वाले हैं। अब देखना यह है कि पार्टी उन्हें फिर से विधान परिषद भेजती है की नहीं।
(2) बुक्कल नवाब- 2017 में सपा के MLC पद से इस्तीफा देने के बाद बुक्कल नवाब BJP में शामिल हो गए थे। उस वक्त उन्होंने यह कहते हुए सपा से इस्तीफा दे दिया था, “पार्टी बाप-बेटे के लिए अखाड़ा बन चुकी है। अब उनका दम घुटता है। इसलिए वह पार्टी छोड़ रहे है।” इसके बाद उन्होंने अमित शाह की उपस्थिती में BJP की सदस्यता ले ली। इसके बाद पार्टी ने उन्हें 2018 में विधान परिषद भेज दिया।
(3) दानिश आजाद अंसारी- योगी सरकार 2.0 में अल्पसंख्यक विभाग के राज्यमंत्री दानिश आजाद अंसारी भी विधान परिषद के सदस्य है। दरअसल 2022 के विधानसभा चुनाव में BJP ने एक भी मुस्लिम उम्मीदवार नहीं उतारा था। इसके बावजूद पार्टी सत्ता में वापस आई। इसके बाद पार्टी ने सरकार में मुस्लिमों के प्रतिनिधी के तौर पर दानिश को शामिल किया और पहले उन्हें मंत्री फिर विधान परिषद सदस्य बनाया।
(4) प्रो. तारीक मंसूर- अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के कुलपति को योगी आदित्यनाथ की सरकार विधान परिषद भेज रही है। इसके पीछे BJP की मुसलमानों को साधने की रणनीति बताई जा रही है। BJP प्रदेश में पसमांदा सम्मेलन कर रही है। इसके पीछे लोग यह मान रहे हैं कि वह सपा के परंपरागत वोट बैंक में सेंध लगाना चाहती है।
सपा के 2 नेता है विधान परिषद के सदस्य
प्रदेश में मुसनमानों की एक तरफा पसंद बन चुकी सपा के पास फिलहाल विधान परिषद में कुल दो सदस्य है।
(1) शाहनवाज खान- समाजवादी पार्टी के विधान परिषद सदस्य शाहनवाज खान के पिता और पूर्व राज्यमंत्री सरफराज खान को आजम खान का करीबी माना जाता है। शाहनवाज को विधान परिषद भेजकर अखिलेश ने नाराज आजम को मनाने का काम किया था। सपा में युवा नेता के तौर पर शाहनवाज खान काफी सक्रिय रहे हैं। लंदन में पढ़ाई करने वाले शाहनवाज ने लोकसभा चुनाव 2019 और विधानसभा चुनाव 2022 के दौरान काफी सक्रियता दिखाई थी। उन्होंने रामपुर में आजम खान का प्रचार अभियान उनकी अनुपस्थिति में बखूबी संभाला था।
(2) जासमीर अंसारी- 2007 में बसपा के विधायक रहे जासमीर अंसारी 2019 के लोकसभा चुनाव के बाद कांग्रेस छोड़कर सपा में शामिल हो गए थे। बता दें कि जासमीर बैकवर्ड मुस्लिम समुदाय से आते हैं। जासमीर को सपा की तरफ से 2022 के विधानसभा चुनाव के दौरान सीतापुर में स्टार प्रचारक घोषित किया गया था। अखिलेश यादव के प्रति वफादारी और भाजपा के पिछड़े मुस्लिम नेता के काट के तौर पर सपा ने जासमीर को 2022 में विधान परिषद
भेजा।
Published on:
02 Apr 2023 09:39 am
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