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मिशन 2019 : विपक्ष की नजदीकियां और अपनों की बगावत से बढ़ रहीं बीजेपी की मुश्किलें

लोकसभा चुनाव से पहले विपक्षी दलों के बीच बढ़ती नजदीकियां और अपनों की नाराजगी भाजपा के लिये सिरदर्द साबित होती जा रही है...

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लखनऊ

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Hariom Dwivedi

Apr 06, 2018

challenges before up election 2019

लखनऊ. लोकसभा चुनाव से पहले सपा-बसपा के बीच बढ़ती नजदीकियां और अपनों की नाराजगी भाजपा के लिये सिरदर्द साबित होती जा रही है। गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा उपुचनाव में हार के बाद बीजेपी के सामने अंदर-बाहर की चुनौतियां और बढ़ गई हैं। गोरखपुर, अमेठी, प्रतापगढ़, बांदा, बाराबंकी, फतेहपुर और बहराइच समेत यूपी में कई जगह विधायकों और सांसदों न अपनी ही पार्टी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उपचुनाव में भाजपा को जहां गोरखपुर जैसी अपनी प्रतिष्ठित सीट गंवानी पड़ी, वहीं पार्टी के दलित और ओबीसी नेताओं ने अपनी ही सरकार के खिलाफ बयानबाजी कर रहे हैं।

बहराइच की सांसद सावित्री बाई फूले ने दलित मुद्दों को लेकर लखनऊ में बड़ा प्रदर्शन कर केंद्रीय नेतृत्व के माथे पर पसीना ला दिया, वहीं अब रॉबर्टसगंज से बीजेपी सांसद छोटेलाल ने उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। गौरतलब है कि ऐसा पहली बार नहीं है, जब उत्तर प्रदेश के नाराज नेता शिकायत लेकर प्रधानमंत्री के दरबार में पहुंचे हों। सहयोगी दल सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के नेता ओमप्रकाश राजभर भी कई बार अपनी नाराजगी सार्वजनिक कर चुके हैं। इतना ही नहीं पिछड़ों के लेकर गाहे-बाहे वह बड़े आंदोलन की धमकी भी देते रहते हैं।

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...तो गड़बडा सकते हैं सियासी समीकरण
2014 के लोकसभा चुनाव हो या फिर 2017 के विधानसभा चुनाव, जीत में दलित वोट प्रतिशत की बड़ी भागीदारी रही है। लेकिन मौजूदा समय में अंदर-बाहर दलितों की नाराजगी से भाजपा के समीकरण गड़बड़ा सकते हैं। आंकड़ों में देखें तो उत्तर प्रदेश में बीजेपी के कुल सांसदों में 67 सांसद दलित हैं। इनमें से उत्तर प्रदेश के 17 दलित सांसद भी शामिल हैं।

भाजपा के सामने दोहरी चुनौती
जातिगत आंकड़ों के हिसाब से देखें तो उत्तर प्रदेश में 49 जिले ऐसे हैं, जहां सबसे ज्यादा संख्या दलित मतदाताओं की है। 2011 की जनगणना के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में 42-45 फीसदी ओबीसी वोटर हैं, और 21-22 फीसदी दलित मतदाता हैं। ऐसे हालातों में पार्टी आलाकमान के सामने दोहरी चुनौती है कि वह पहले अपना घर संभालें या फिर उत्तर प्रदेश में एकजुट होकर विपक्ष से निपटने की रणनीति बनायें।

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पार्टी में विरोध के स्वर
- गोरखपुर से विधायक राधा मोहन दास अग्रवाल ने मोर्चा खोल दिया। सीएम योगी के कहने पर माने।
-बलिया में लॉ एंड ऑर्डर का मुद्दा लेकर सड़क पर उतरे विधायक सुरेंद्र सिंह।
- बांदा में बीजेपी विधायक राजकरन कबीर ने अवैध खनन के खिलाफ सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया।
- अपना दल के सांसद और विधायक के खिलाफ प्रतापगढ़ में कैबिनेट मंत्री राजेन्द्र प्रताप सिंह ने खोला मोर्चा।
- इलाहाबाद की मेजा से बीजेपी विधायक नीलम करवरिया ने सरकार के खिलाफ हस्ताक्षर अभियान चलाया।
- अमेठी में विधायक मयंकेश्वर सिंह और मंत्री सुरेश पासी के बीच बढ़ा विवाद इस्तीफे की धमकी तक पहुंचा।
- बाराबंकी से सांसद प्रियंका रावत ने डीएम पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए।
- मंत्री ओम प्रकाश राजभर लगातार बीजेपी सरकार के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराते रहे हैं। बड़े आंदोलन की भी धमकी दे रहे हैं।
- फतेहपुर सीकरी से सांसद चौधरी बाबूलाल ने बीजेपी सांसद रामशंकर कठेरिया के खिलाफ ही मोर्चा खोल दिया।
- बहराइच से सांसद सावित्रा बाई फुले ने बीजेपी सरकार पर आरक्षण खत्म करने की साजिश का आरोप लगाया और लखनऊ में जोरदार प्रदर्शन किया।

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