
बीजेपी फ्लैग
अनिल के अंकुर
लखनऊ। मार्च में राज्यसभा की 10 सीटों के लिए यूपी में चुनाव होने जा रहे हैं। इन सीटों में अब तक सपा और बसपा व कांग्रेस का कब्जा था। पर इस बार भाजपा 10 में से नौ सीटें हथियाने की कोशिश में है। मौजूदा विधायकों की संख्या को देखते हुए भाजपा बिना किसी कोशिश के आठ सीटें तो आराम से जीत रही है। एक सीट सपा के कब्जे में जाएगी। अब बची हुई एक सीट के लिए भाजपा ने अपनी चाल चल दी है। भाजपा को इस सीट को हांसिल करने के लिए सिर्फ नौ वोटों की जरूरत होगी। इसलिए तीन निर्दल विधायकों समेत अन्य विधायकों के सम्पर्क में भाजपा के नेता हैं और जरूरत पडऩे पर क्रास वोटिंग की भी संभावना है। उधर निर्वाचन आयोग ने चुनाव में निगरानी रखनी शुरू कर दी है ताकि कोई हार्स ट्रेडिंग न कर सके।
किसे कितने वोटों की है जरूरत
राज्यसभा में जाने के लिए गणित कुछ इस प्रकार है। यूपी विधानसभा में 403 विधायक हैं। बीजेपी विधायक लोकेंद्र सिंह की मार्ग दुर्घटना में मृत्यु के चलते 402 विधायक बचे हैं जो इस चुनाव में वोट डाल सकेंगे। एक सीट जिताने के लिए जो प्रक्रिया है उसके मुताबिक एक सीट जीतने के लिए प्रथम वरीयता के 37 वोट चाहिए। सहयोगियों सहित 324 विधायकों के साथ बीजेपी 8 सीटें आसानी से जीत जाएगी। इसके बाद भाजपा के 296 वोट इस्तेमाल हो चुके होंगे और भजपा के पास 28 विधायक बचेंगे। विधान परिषद चुनाव में तीनों निर्दलीय और निषाद पार्टी के इकलौते विधायक सहित चारों ने बीजेपी का समर्थन किया था। इनको लेकर संख्या 32 हो जाती है। उसको भी जोड़ लें तो बीजेपी आसानी से 34-35 वोट जुटाती दिख रही है। भाजपा अपनी जीत सुनिश्चित करने के लिए दूसरे दलों के विधायकों के सम्पर्क में है ताकि वे क्रास वोटिंग कर दें अथवा उस दिन मतदन से गायब हो जाएं।
कांग्रेस प्रमोद तिवारी का क्या होगा?
हमेशा किसी न किसी सदन के सदस्य रहने वाले कांग्रेस के नेता प्रमोद तिवारी का भी कार्यकाल खत्म हो रहा है। अब सवाल यह उठता है कि इस बार क्या रणनीति बना रहे हैं। वहीं समूचा विपक्ष एक जुट होता नहीं दिख रहा है। अगर पूरा विपक्ष संयुक्त हो जाए तो 36 वोट दूसरी सीट के लिए जुटाए जा सकेंगे। अब देखने की बात है कि इस गणित में कौन सफल होता है। कांग्रेस के प्रमोद तिवारी या भाजपा। फिलहाल इस चुनाव में 10वीं सीट के लिए काफी संघर्ष दिख रहा है।
मायावती की गणित पर भी चल रहा है काम
उत्तर प्रदेश में मायावती के पास केवल 19 विधायक हैं। कांग्रेस के विधायकों की संख्या सात है। कांग्रेस एक बार बसपा का साथ दे चुकी है और अगर इन दोनों दलों के विधायकों को मिला लें तो संख्या 26 होती है। जबकि जीत के लिए 37 वोटों की जरूरत है। हालांकि अखिलेश मायावती को सहयोग देने के लिए कई बार हुंकार भर चुके हैं। इस पर अपनी एक सीट जिताने के बाद उनके पास 10 विधायक बचेंगे। अगर इन विधायकों को भी मायावती के लिए जोड़ लिया जाए तो संख्या 36 ही होती है जबकि जरूरत 37 विधायकों की होगी। अब माजरा तीन निर्दल विधायकों पर टिकता है।
Published on:
25 Feb 2018 12:00 pm
बड़ी खबरें
View Allलखनऊ
उत्तर प्रदेश
ट्रेंडिंग
