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Brijbhushan Rajput: सियासी ‘ड्रामे’ के लिए मशहूर BJP विधायक फिर सुर्खियों में, मंत्री से टकराव; पिता भी रहे विवादित राजनीतिक अंदाज के लिए चर्चित

Mahoba politics: महोबा में जल शक्ति मंत्री के काफिले को रोककर विरोध जताने वाले चरखारी विधायक बृजभूषण राजपूत एक बार फिर चर्चा में हैं। सड़क, पानी और योजनाओं में कथित लापरवाही को लेकर उनका टकराव सियासी बहस बन गया है। उनका आक्रामक अंदाज़ और पुराना राजनीतिक इतिहास अब पार्टी के लिए भी असहज स्थिति खड़ी कर रहा है।

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लखनऊ

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Ritesh Singh

Feb 07, 2026

सियासी ‘थिएट्रिक्स’ से चर्चा में रहने वाले BJP विधायक बृजभूषण राजपूत, मंत्री से टकराव के बाद फिर सुर्खियों में     (फोटो सोर्स : WhatsApp News Group)

सियासी ‘थिएट्रिक्स’ से चर्चा में रहने वाले BJP विधायक बृजभूषण राजपूत, मंत्री से टकराव के बाद फिर सुर्खियों में     (फोटो सोर्स : WhatsApp News Group)

BJP MLA controversy: उत्तर प्रदेश की राजनीति में कभी-कभी ऐसे नेता उभरते हैं जिनकी पहचान केवल भाषणों या पद से नहीं, बल्कि उनके नाटकीय और टकराव पूर्ण अंदाज़ से बनती है। महोबा जिले की चरखारी विधानसभा सीट से दो बार के भाजपा विधायक बृजभूषण राजपूत इन दिनों एक बार फिर चर्चा में हैं। हाल ही में उनका जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह के काफिले को रोककर विरोध दर्ज कराना राजनीतिक हलकों में बड़ी बहस का विषय बना हुआ है। लेकिन यह पहला मौका नहीं है जब राजपूत ने इस तरह का सख्त और सार्वजनिक विरोध किया हो। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह शैली उन्हें विरासत में मिली है,उनके पिता, पूर्व सांसद गंगाचरण राजपूत, भी अपने आक्रामक राजनीतिक तरीकों के लिए जाने जाते रहे हैं।

महोबा में मंत्री का काफिला रोकने से शुरू हुआ विवाद

मामला तब तूल पकड़ गया जब बृजभूषण राजपूत ने महोबा जिले में हर घर नल योजना के तहत बिछाई जा रही पाइपलाइन के कारण उखड़ी सड़कों और कथित लापरवाही को लेकर मंत्री स्वतंत्र देव सिंह के काफिले को रोक दिया। राजपूत का आरोप था कि गांवों की सड़कें पाइपलाइन बिछाने के बाद ठीक नहीं कराई गईं । योजना के क्रियान्वयन में भ्रष्टाचार हुआ । अधिकारियों ने शिकायतों पर ध्यान नहीं दिया । उनका कहना था कि वे पिछले दो वर्षों से यह मुद्दा उठा रहे हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।

वायरल वीडियो और बढ़ी सियासी गर्मी

घटना के बाद एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसमें राजपूत समर्थकों से कहते दिखे कि वे पहले भी “ऐसे तरीके” अपनाते रहे हैं। इस बयान ने विपक्ष को सरकार पर निशाना साधने का मौका दिया। भाजपा के भीतर भी इस घटना को लेकर असहजता देखी गई। सूत्रों के अनुसार, प्रदेश नेतृत्व ने विधायक से स्पष्टीकरण मांगा है।

‘राजनीतिक नाटकीयता’ की विरासत

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बृजभूषण राजपूत का अंदाज़ उनके पिता गंगाचरण राजपूत से मेल खाता है। गंगाचरण राजपूत कई दलों से जुड़े रहे और अपने बयानों व विरोध के तरीकों को लेकर सुर्खियों में रहे। पुरानी राजनीतिक चर्चाओं में यह भी कहा जाता है कि 2004 के लोकसभा चुनावों के बाद केंद्र की राजनीति में नेतृत्व को लेकर चली हलचल के दौरान उन्होंने बेहद नाटकीय विरोध दर्ज कराया था। यह घटना लंबे समय तक राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय रही।

2014 में भी दिखा था यही तेवर

बृजभूषण राजपूत का आक्रामक अंदाज नया नहीं है। वर्ष 2014 में, जब वे बुंदेलखंड अधिकार सेना नामक संगठन से जुड़े थे, तब उन्होंने सैकड़ों समर्थकों के साथ तत्कालीन कांग्रेस सांसद व केंद्रीय मंत्री प्रदीप आदित्य जैन के आवास का घेराव किया था। मुद्दा तब भी बुंदेलखंड में  पेयजल संकट,बिजली आपूर्ति,सूखे की समस्या को लेकर था। प्रदर्शन कई घंटों तक चला और आश्वासन के बाद ही समाप्त हुआ।

 BJP में एंट्री और चुनावी सफर

बृजभूषण राजपूत ने 2016 में भाजपा ज्वाइन की। 2017 विधानसभा चुनाव में उन्हें चरखारी सीट से टिकट मिला, जहां उन्होंने समाजवादी पार्टी की उम्मीदवार को बड़े अंतर से हराया। 2022 में भी उन्होंने यह सीट बरकरार रखी। वे लोध समाज से आते हैं, जो क्षेत्रीय राजनीति में प्रभावशाली माना जाता है।

पार्टी की असहजता

भाजपा के भीतर से मिल रही जानकारी के अनुसार, प्रदेश संगठन के वरिष्ठ नेताओं ने राजपूत के आचरण पर नाराज़गी जताई है। पार्टी का मानना है कि मंत्री के साथ सार्वजनिक टकराव से विपक्ष को सरकार पर हमले का मौका मिलता है।
एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि ऐसी कार्रवाई पार्टी अनुशासन के अनुरूप नहीं मानी जाती।”

बुंदेलखंड की भूमि खास 

राजपूत के समर्थन में कुछ लोग यह भी तर्क दे रहे हैं कि बुंदेलखंड क्षेत्र लंबे समय से पेयजल, सड़क और बुनियादी सुविधाओं की समस्याओं से जूझता रहा है। ऐसे में स्थानीय जनप्रतिनिधि का आक्रोश क्षेत्रीय असंतोष को दर्शाता है। राजपूत की छवि दो तरह से देखी जा रही है,समर्थकों के अनुसार वे जमीनी मुद्दों के लिए खुलकर लड़ने वाले नेता हैं। आलोचकों के अनुसार उनकी शैली अनावश्यक टकराव और राजनीतिक नाटकीयता से भरी है।