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लोकसभा चुनाव 2019: ओबीसी को पेशेवर और खेतिहर के बीच बांटने की भाजपा की तैयारी

सरकार पता करा रही है कि सरकारी योजनाओं का लाभ पेशेवरों को ज्यादा मिला या खेतिहरों को।  

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BJP obc and farmer strategy

लोकसभा चुनाव 2019: ओबीसी को पेशेवर और खेतिहर के बीच बांटने की भाजपा की तैयारी

लखनऊ. उत्तर प्रदेश के उपचुनाव में संयुक्त गठबंधन के हाथों बुरी तरह से मात खाई भारतीय जनता पार्टी अब अति पिछड़ी जातियां के सहारे सामाजिक समीकरण साधने की तैयारी में है। राजनाथ सरकार के दौरान पिछड़ों में अति पिछड़ों को आरक्षण देने के लिए बनाई गई सामाजिक न्याय समिति की सिफारिशों को न्यायालय में घसीटे जाने के बाद पार्टी ने अति पिछड़ों को लुभाने के लिए नया कार्ड खेला है। इसके तहत पिछड़ी जातियो में से अति पिछड़ी जातियों को पेशेवर और खेतिहर के बीच में बांटने की तैयारी की जा रही है।
सरकार इस बात का पता करा रही है कि सरकारी योजनाओं का लाभ पेशेवरों को ज्यादा मिला या खेतिहरों को। इसके आंकड़े जुटाए जाने का काम शुरू कर दिया गया है। हालांकि मोस्ट बैकवर्ड क्लासेज के अध्यक्ष शिवलाल साहू का मानना है कि जब तक मंडल कमीशन में एल आर नायक की संस्तुतियों को लागू नहीं किया जाता तब तक सही मायने में सामाजिक न्याय का सिद्धांत पूरा नहीं होगा। भाजपा के प्रदेश मंत्री अमरपाल मौर्या भी इस बात के हिमायती हैं कि पार्टी सामाजिक समरसता पर जोर देती है।
पिछड़ों में हिन्दुत्व का गीत
हिन्दी पट्टी की अगर बात करें तो उसमें उत्तर प्रदेश का नाम सर्वोच्च स्थान पर दिखता है। यहां के नगर निगम चुनाव के नतीजों पर नजऱ डालें तो पिछड़े वर्गों के बीच हिंदुत्व खेमे के प्रति झुकाव साफ तौर पर देखा जा सकता है। यह माना जाता है कि कांग्रेस के साथ सवर्ण मतदाता हैं, इसलिए पिछड़ों को जोडऩे की भाजपा ने तरकीब निकाली है कि वंचित पिछड़ों को सूचीबद्ध किया जाएगा और उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाया जाएगा। पिछड़े वर्ग की ज्यादातर जातियों में शुरू के दौर में हिंदुत्व की राजनीति करने वाली जनसंघ, भाजपा और उनके मार्गदर्शक संगठन- आरएसएस भी पिछड़ों पर जोर दे रहे हैं। बीते दौर की तरफ नजर डालें तो पता चलेगा कि 90 के दशक में कल्याण सिंह उत्तर प्रदेश में और उमा भारती मध्य प्रदेश में पिछड़ों के उदीयमान नेता थे। अब उनका दौर भाजपा ने खत्म सा कर दिया है, लेकिन मौजूदा नजाकत को देखते हुए पिछड़ों को फिर से जोडऩे की जरूरत आन पड़ी है। इसीलिए भाजपा पिछड़ों को पेशेवर, खेतिहर के बीच में बांटने की योजना पर काम कर रही है।

पेशेवर जातियां
भाजपा ने पिछड़ी जातियों में से उन जातियों को पेशेवर जातियां माना है जो किसी न किसी पेशे में संलग्न हैं, मसलन - दुग्ध उत्पादक, केश कर्तन, बुनकर, बढ़ई यानी की कारपेंटर, मूूर्तिकार, शिल्पकार, जरदोजी कार्य समेत करीब 28 ऐसे पेशे हैं जिनके काम करने वालों को सरकार की योजनाओं का लाभ नहीं मिला है। पार्टी इन जातियों को 27 प्रतिशत में से 15 प्रतिशत आरक्षण दिये जाने की तैयारी की है।
खेतिहर जातियां
भारतीय जनता पार्टी के जानकारों का मानना है कि ओबीसी की जातियों में वे जातियां जो खेती किसानी के कामों में लगी हैं, उन्हें आरक्षण का ज्यादा लाभ मिले। जैसे पटेल-कुर्मी, मौर्या, कुशवाहा, लोध, आदि। पेशेवर ओबीसी में दुग्ध उत्पादकों को ज्यादा लाभ मिला है। बाकी पेशेवर पिछड़ीे जाति के लोग योजनाओं का लाभ लेने से वंचित रहे हैं। ऐसे वंचितों की संख्या 73 प्रतिशत है। इन जातियों को २७ में से १२ प्रतिशत कोटा देने के पक्ष में है।