
अपर्णा यादव ने मुलायम परिवार की कई बार की 'मटिया पलीद'! फोटो सोर्स- फेसबुक
Prateek Aparna Yadav Divorce Case Update: पूर्व CM और समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव के छोटे बेटे प्रतीक यादव ने अपनी पत्नी और उत्तर प्रदेश महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव से तलाक लेने की घोषणा कर दी है।
प्रतीक यादव ने सोशल मीडिया पर लगातार 2 पोस्ट शेयर करते हुए अपर्णा यादव पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने अपर्णा को स्वार्थी बताते हुए परिवार को तोड़ने का आरोप लगाया और यहां तक कहा कि उनसे शादी करना उनकी जिंदगी की सबसे बड़ी बदकिस्मती साबित हुई। प्रतीक यादव की इन पोस्ट्स के सामने आने के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में हलचल मच गई है। हालांकि, इन आरोपों पर फिलहाल परिवार या संबंधित पक्षों की ओर से कोई खुलकर प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
अगर अपर्णा यादव के पिछले करीब 12 सालों के राजनीतिक और सार्वजनिक जीवन पर नजर डालें, तो उनके कई फैसले और बयान ऐसे रहे हैं, जिनसे मुलायम सिंह यादव का परिवार कई बार 'असहज' स्थिति में नजर आया। समाजवादी पार्टी में रहते हुए भी अपर्णा यादव की राजनीति एक अलग राह पर चलती दिखी। साथ ही उनके वैचारिक मतभेद समय-समय पर सार्वजनिक रूप से सामने आते रहे हैं।
अपर्णा यादव और प्रतीक यादव का रिश्ता करीब 2 दशक पुराना बताया जाता है। दोनों की पहली मुलाकात लखनऊ के एक निजी स्कूल में हुई थी। अपर्णा यादव के पिता, वरिष्ठ पत्रकार अरविंद सिंह बिष्ट और मुलायम सिंह यादव के बीच पहले से ही परिचय था, जिससे दोनों परिवारों के संबंध भी पुराने रहे हैं। प्रतीक और अपर्णा के बीच लगभग 8 सालों तक चले रिश्ते को फरवरी 2012 में विवाह का रूप दिया गया। सैफई में आयोजित भव्य समारोह में दोनों की शादी हुई। यह वही समय था जब उत्तर प्रदेश की राजनीति में समाजवादी पार्टी का दबदबा था और अखिलेश यादव CM बनने की तैयारी कर रहे थे।
अपर्णा यादव पहली बार साल 2014–15 के दौरान सुर्खियों में आईं, जब उन्होंने समाजवादी पार्टी की आधिकारिक राजनीतिक लाइन से हटकर PM नरेंद्र मोदी के ‘स्वच्छ भारत अभियान’ की सार्वजनिक रूप से सराहना की। इसके बाद PM मोदी के साथ उनकी एक सेल्फी सामने आने पर राजनीतिक हलकों में चर्चाएं और तेज हो गईं। अपर्णा यादव ने खुलकर CM योगी आदित्यनाथ को अपना बड़ा भाई बताया और अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण के लिए 11 लाख रुपये का दान देकर यह स्पष्ट संकेत दे दिया कि उनकी वैचारिक सोच अब समाजवादी पार्टी से अलग दिशा में जा चुकी है।
साल 2017 में अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav ) और शिवपाल यादव (Shivpal Yadav) के बीच उभरे वैचारिक मतभेदों के दौरान अपर्णा यादव की स्थिति परिवार और पार्टी दोनों स्तरों पर असहज होती चली गई। इस दौरान अपर्णा की सास साधना गुप्ता पर अखिलेश खेमे की ओर से परिवार को तोड़ने जैसे आरोप लगाए गए, जिससे आपसी दूरियां और बढ़ गईं।
| क्रम | विवाद / मुद्दा | विवरण |
|---|---|---|
| 1 | आरक्षण विवाद | अपर्णा यादव ने जातिगत आरक्षण का विरोध करते हुए सवर्ण समाज के पक्ष में बयान दिया था, जिससे समाजवादी पार्टी की लाइन से उनका मतभेद खुलकर सामने आया। |
| 2 | 2017 विधानसभा चुनाव और राजनीतिक दूरी | 2017 में लखनऊ कैंट से चुनाव हारने और बाद में 2022 में भाजपा में शामिल होने के बाद परिवार और पार्टी से उनकी दूरी और बढ़ गई। |
| 3 | पारिवारिक राजनीतिक फैसलों पर असहमति | अपर्णा यादव ने कई मौकों पर परिवार के राजनीतिक फैसलों से असहमति जताई, जिससे अंदरूनी मतभेद सार्वजनिक होते रहे। |
| 4 | 2014 में अलग राजनीतिक रुख | वर्ष 2014 में सपा कार्यकारिणी की बैठक के दौरान उन्होंने पहली बार सार्वजनिक मंच से परिवार और पार्टी लाइन से अलग राय रखी। |
| 5 | भाजपा नीतियों का समर्थन | अपर्णा यादव ने परिवार के विपरीत जाकर भाजपा की नीतियों का समर्थन किया, जिसे प्रतीक यादव ने परिवार को तोड़ने वाला कदम बताया। |
| 6 | केजीएमयू रेजिडेंट डॉक्टर विवाद | हाल ही में केजीएमयू में रेजिडेंट डॉक्टर रमीज कांड के दौरान अपर्णा यादव के नेतृत्व में हुए हंगामे ने एक नया राजनीतिक और प्रशासनिक विवाद खड़ा कर दिया। |
2017 के विधानसभा चुनाव में लखनऊ कैंट सीट से हार के बाद अपर्णा यादव को यह महसूस होने लगा कि समाजवादी पार्टी में उन्हें धीरे-धीरे दरकिनार किया जा रहा है। अंततः जनवरी 2022 में उन्होंने समाजवादी पार्टी से अलग होकर भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया। हालांकि, इन तमाम राजनीतिक और पारिवारिक मतभेदों के बावजूद प्रतीक और अपर्णा के बच्चे तथा अखिलेश यादव के बच्चे कई पारिवारिक कार्यक्रमों में एक साथ नजर आते रहे हैंय़ जिससे यह संकेत मिलता रहा कि बच्चों के स्तर पर किसी तरह की कड़वाहट नहीं है।
Published on:
20 Jan 2026 11:05 am
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