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2019 चुनाव से पहले बीजेपी का बड़ा दांव, कर दिया ये ऐलान

सपा बसपा को धूल चाटने के लिए बीजेपी ने अति पिछड़ी जातियों के वोट को साधने की रणनीति पर काम करना शुरू कर दिया है।

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लखनऊ

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Akansha Singh

Aug 11, 2018

lucknow

पिछड़ो को साधने के लिये बीजेपी का बड़ा दांव, कर दिया ये ऐलान

लखनऊ. 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने अपना परचम लहराने की स्ट्रेटेजी बना ली है। सपा बसपा को धूल चाटने के लिए बीजेपी ने अति पिछड़ी जातियों के वोट को साधने की रणनीति पर काम करना शुरू कर दिया है। मोदी सरकार ने केंद्र में बैठ कर जहां ओबीसी कमीशन को संवैधानिक दर्जा देने का काम किया है वहीं प्रदेश के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने ओबीसी के वोट साधने के लिए एक ऐलान किया है। केशव प्रसाद मौर्या ने यह ऐलान किया कि ओबीसी के मसीहा माने जाने वाले बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर के नाम पर सूबे के हर जिले एक सड़क होगी।

सड़क का नाम रखने की कवायद शुरू
प्रदेश में सड़क को कर्पूरी ठाकुर के नाम से रखने की कवायद शुरू गई है। फुलपूर जिले में एक सड़क का नाम कर्पूरी ठाकुर के नाम पर कर दिया गया है। प्रदेश के जिलों में सड़कों को चिन्हित करने का काम शुरू कर दिया गया है। माना जा रहा है कि एक महीने के अंदर प्रदेश के हर जिले में कम से कम एक सड़क का नाम कर्पूरी ठाकुर के नाम पर रखा दिया जाएगा।

पिछड़ा वर्ग के मसीहा हैं कर्पूरी ठाकुर
अति पिछड़ा वर्ग को राजनीति की मुख्यधारा से जोड़ने का पूरा श्रेय बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर को जाता है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी कर्पूरी ठाकुर की ही तर्ज पर अन्य पिछड़ा वर्ग से यादव को अलग करते हुए अति पिछड़े वर्ग को जनता दल यूनाइटेड के साथ जोड़ा और सरकार बनाई।

कर्पूरी ठाकुर के नाम पर स्कूलों में छुट्टी
प्रदेश में योगी सरकार बनते ही अखिलेश सरकार में जारी की गई छुट्टियों की लिस्ट में बड़ा फेरबदल किया गया था। इस बदलाव में लिस्ट से कर्पूरी ठाकुर जयंती की छुट्टी भी रद्द कर दी गई थीं। लेकिन जनवरी में योगी सरकार फिर से कर्पूरी ठाकुर और संत रविदास जयंती पर अवकाश की घोषणा कर दी थी। योगी सरकार के इस फैसले के बाद राजनीतिक गलियारों में जातीय वोट बैंक को लेकर एक बार फिर बहस शुरू हुई।

कर्पूरी ठाकुर ने पिछड़ा वर्ग को दिलाया था आरक्षण
कर्पूरी ठाकुर ने ही साल 1978 में बिहार में सबसे पहले सरकारी नौकरियों में 26 प्रतिशत आरक्षण लागू किया था। इसमें 12 प्रतिशत अति पिछड़ों के लिए व 8 प्रतिशत पिछड़ों के लिए था। इस फैसले के बाद आज भी बिहार के सीएम नीतीश कुमार अगर आरक्षण लागू करते हैं तो अति पिछड़ों को ज्यादा और पिछड़ों को कम आरक्षण देते हैं। इसी फॉर्मूले के जरिए नीतीश कुमार बिहार की सत्ता पर काबिज हैं।

पिछड़ों को साधने के लिए केशव को मिली जिम्मेदारी
केशव प्रसाद मौर्य को ओबीसी जातीय सम्मेलन की जिम्मेदारी सौंपी गई है। जिसकी वजह से उत्तर प्रदेश भर में तमाम पिछड़ी जातियों का जातिवार सम्मेलन शुरू कर दिया गया है। पिछले कुछ दिनों में लखनऊ में बीजेपी ने प्रजापति यानि कुम्हार, नाई और राजभर जैसे अति पिछड़ी जातियों का सम्मेलन किया है और अगले कुछ दिनों में दूसरी जातियों का भी सम्मेलन बुलाने जा रही है। सभी सम्मेलनों में केशव मौर्य और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मोदी सरकार के नीतियों और कार्यक्रमों को उनके सामने रखा।