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ये हैं यूपी पुलिस एनकाउंटर स्पेशलिस्ट, नाम सुनते ही बदमाशों के छूटता है पसीना

पत्रिका डॉट कॉम आपको ऐसे ही पुलिस अफसरों के बारे में बताने जा रहा है, जिन पर यूपी पुलिस के साथ-साथ आम जनता को भी नाज होता है।

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Oct 21, 2015

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लखनऊ.
आज पुलिस स्मृति दिवस है। देश में हर साल सैंकड़ों पुलिस अफसर समाज की भलाई के लिए ड्यूटी के दौरान शहीद हो जाते हैं। इन पुलिस अफसरों की चौबीस घंटे कड़ी ड्यूटी की वजह से ही आम जनता सुकून की नींद सोती है। यूपी पुलिस में कई ऐसे जांबाज अफसर हैं, जिनके नाम से ही बदमाश खौफ खाते हैं। अपने इलाके में इन अफसरों की पोस्टिंग होते ही बदमाश घर ने निकलना बंद कर देते हैं। पत्रिका डॉट कॉम आपको ऐसे ही पुलिस अफसरों के बारे में बताने जा रहा है, जिन पर यूपी पुलिस के साथ-साथ आम जनता को भी नाज होता है। यहां तक कि इन बहादुर अफसरों पर बॉलीवुड में फिल्मे भी बनी हैं।


एनकाउंटर स्‍पेशलिस्‍ट नवनीत सिकेरा



एनकाउंटर स्पेशलिस्ट नवनीत सिकेरा का नाम यूपी के सबसे तेजतर्रार पुलिस अफसरों में सबसे आगे रहता है। जब कुख्यात गैंगस्टर रमेश कालिया का लखनऊ में आतंक बढ़ता जा रहा था, तब उसका सफाया करने की जिम्मेदारी आईपीएस नवनीत सिकेरा को दी गई थी। इसके बाद वे रमेश कालिया के खिलाफ खुफिया ऑपरेशन की तैयारी करते हैं।


पुलिस बारातियों के भेष में राजधानी नीलमत्था के एक मकान में पहुंचती है। फिर पुलिस और कालिया के गुर्गों के बीच आखिरी एनकाउंटर शुरू होता है। करीब 20 मिनट चले इस एनकाउंटर दो पुलिसवालों भी घायल हो जाते हैं, लेकिन इस एनकाउंटर में कालिया भी मारा जाता है। नवनीत सिकेरा अब खुद को महिलाओं के प्रति होने वाले क्राइम की ओर केंद्रित कर लिया है। साथ ही पहली महिला हेल्‍पलाइन 1090 प्रोजेक्‍ट तैयार किया। इसे यूपी सरकार ने पूरे प्रदेश में लागू किया है।


आईपीएस अरुण कुमार



यूपी पुलिस में एसटीएफ का गठन आईपीएस अरुण कुमार के नेतृत्व में ही हुआ था। इसी पुलिस अफसर ने सीएम कल्याण सिंह की हत्या की सुपारी लेने वाले बदमाश श्रीप्रकाश शुक्ला का एनकाउंटर किया था। 4 मई 1998 को यूपी पुलिस के बेहतरीन 50 जवानों को छांट कर एसटीएफ बनाई गई थी। इस फोर्स का पहला टास्क श्रीप्रकाश शुक्ला का खात्मा था।


एसटीएफ के प्रभारी अरुण कुमार को 23 सितंबर 1998 को
खबर मिलती है कि श्रीप्रकाश शुक्‍ला दिल्‍ली से गाजियाबाद की तरफ आ रहा है। उसकी कार जैसे ही वसुंधरा इन्क्लेव पार करती है, अरुण कुमार सहित एसटीएफ पीछा शुरू करती है। मौका मिलते ही एसटीएफ की टीम ने अचानक श्रीप्रकाश की कार को ओवरटेक कर उसका रास्ता रोक दिया। एसटीएफ टीम ने पहले श्रीप्रकाश को सरेंडर करने को कहती है, लेकिन वो नहीं मानता और फायरिंग शुरू कर देता है। पुलिस की जवाबी फायरिंग में श्रीप्रकाश मारा गया। इसके बाद अरुण कुमार का खौफ बदमाशों का सिर चढकर बोलता है। उनकी इसी बहादुरी और एसटीएफ के गठन को लेकर बॉलीवुड फिल्म सहर भी बनी है।


अनिरुद्ध सिंह



यूपी पुलिस के तेज तर्राज अफसर अनिरुद्ध सिंह ने पूर्वांचल के माफिया के आतंक को खत्म किया। साल 2005 में उनकी बेखौफ पर्सनालिटी तब सामने आई जब वाराणसी में तैनाती के दौरान एक पचास हजार के ईनामी बदमाश ने गिरफ्तारी के डर से उन्‍हें गोली मार दी। घायल होने के बावजूद सिंह ने अकेले ही उस बदमाश को ढेर कर दिया। हालां‍कि उच्‍च अधिकारियों ने इसे पब्लिक आउटरेज बता दिया, लेकिन इसके बाद भी सिंह हताश नहीं हुए। यूपी, छत्‍तीसगढ़, बिहार और मध्‍य प्रदेश में आतंक मचाने वाले तीन लाख रुपये का ईनामी नक्‍सली सुनील कोल का खात्मा अनिरुद्ध सिंह ने ही किया। कोल पर 60 से ज्‍यादा हत्‍याएं करने का आरोप था।


आईपीएस अमिताभ यश



आईपीएस अमिताभ यश मूल रूप से बिहार के रहने वाले है। वे अपने सख्त रवैये के रूप में जाने जाते हैं। उनका मानना था कि लातों के भूत बातों से नहीं मानते हैं। उन्होंने एसटीएफ में रहकर करीब तीन दर्जन से ज्‍यादा बदमाशों को मार गिराया। इसके अलावा कई दर्जन एनकाउंटर करने वाली टीमों को उन्‍होंने गाइड और लीड किया।


अमिताभ यश के बारे में कहा जाता है कि वह जिस जिले में तैनाती पाते हैं वहां से अपराधी या तो बेल तुड़वाकर जेल चले जाते हैं या फिर जिला छोड़ देते हैं। ऐसे कई वाकये हुए जब अपराधियों पर सख्‍ती के कारण उनका ट्रांसफर भी हुआ, लेकिन उन्‍होंने कभी भी अपनी शैली में बदलाव नहीं किया। यही कारण रहा कि एसटीएफ के अलावा जब-जब उन्‍हें जिलों में तैनाती मिली तो टास्‍क पूरा होने के बाद उन्‍हें एसटीएफ में ही भेज दिया गया।


आईपीएस अनंत देव



दस्युओं सरगनाओं के सफाए के लिए आईपीएस अनंत देव का नाम लिया जाता है। चंबल की घाटियों में रहने वाले इन दुर्दांत दस्युओं के सफाए के जिम्मेदारी उन्हें मिली। वे अपनी टीम के साथ काफी दिनों तक जंगल की खाक छानते रहे। आखिरकार उन्हें सफलता भी मिली। उन्होंने यूपी में आतंक का पर्याय बने ददुआ को ठोक दिया। हालांकि, इसी बीच ठोकिया गैंग ने छह पुलिसकर्मियों को मारकर एसटीएफ को चुनौती दे डाली। लेकिन अनंत देव भारी पड़े। कुछ ही समय बाद ठोकिया साथियों समेत मारा गया।


डीएसपी राहुल श्रीवास्‍तव


वर्तमान में सीएम सुरक्षा में तैनात डिप्‍टी एसपी राहुल श्रीवास्‍तव उन अधिकारियों में शामिल हैं, जिनके लिए अधिकारी अपने सीनियर्स से भी लड़ जाते थे। एक समय पनिश्‍मेंट पोस्टिंग के लिए पीटीसी सीतापुर में तैनात किया गया, लेकिन उनके क्राइम पर वर्क और एनकाउंटर्स को देखते हुए तत्‍कालीन डीजीपी विक्रम सिंह ने लखनऊ में तैनात कर राजधानी को अपराधियों से मुक्‍त करने का टास्‍क दिया। राहुल श्रीवास्‍तव ने लखनऊ में उस समय दो बड़े बदमाशों को मारकर डीजीपी के भरोसे को कायम रखा।


आईपीएस अखिल कुमार



कुख्‍यात डकैत निर्भय गुर्जर का एनकाउंटर करने के बाद आईपीएस अखिल कुमार सुर्खियों में आए थे। बसपा शासनकाल में उनकी तैनाती लखनऊ और गाजियाबाद जैसी अतिसंवेदनशील जगहों पर हुई। इस दौरान उन्होंने बदमाशों के खिलाफ बेहद सख्‍त रुख अपनाया। लखनऊ में उनके कार्यकाल के दौरान दर्जनभर अपराधियों को पुलिस ने मार गिराया। साल 2010 में लखनऊ में उन्होंने करीब दर्जन भर एनकाउंटर करके बदमाशों का आतंक खत्म किया।

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क्राइम एक्सपर्ट जितेंद्र कालरा



पश्चिम यूपी के क्राइम एक्‍सपर्ट के रूप में इंस्‍पेक्‍टर जितेंद्र कालरा को जाना जाता है। ये उनके खौफ का ही असर था कि जिले में तैनाती होते ही अपराधी भाग जाते थे। यहां तक कि सर्विलांस की कॉल इंटरसेप्‍ट करने पर बदमाशों को कहते सुना गया, ‘भाग जा बे कालरा आ गया, ठोक डालेगा।’ मेरठ में एक जेलर और तीन सगे भाइयों समेत करीब बीस से ज्‍यादा हत्‍या करने वाले एक बेखौफ बदमाश को भी कालरा ने मार गिराया था। इसके अलावा कई ईनामी अपराधी भी कालना की गोली का निशाना बने।