
British Time Pindari doing Dacoity
लखनऊ. भारत पर ब्रिटिश शासन और उसका प्रकोप भले ही खत्म हो चुका हो, लेकिन उस दौर से जुड़े कुछ दंश देश अभी भी झेल रहा है। यह दंश ब्रिटश काल की पिन्डारी जनजाति से जुड़े कुछ लोगों का है। इससे जुड़े कुछ लोग आज भी डकैती और अपराधिक गतिविधियों को अंजाम दे रहे हैं। इस बात का दावा यूपी एसटीएफ ने किया है। घरों की गिरिल काटकर व अन्य तरीकों से डकैती, चोरी और संगीन अपराधों को अंजाम देने वाले अंतर्राज्यीय घुमंतू गैंग का एसटीएफ ने खुलासा किया है। एसटीएफ ने लखनऊ समेत यूपी के कई जिलों में डकैती व चोरी समेत कई अपराधों को अंजाम देने वाले इस गिरोह के नौ सदस्यों को गिरफ्तार किया है। इनमें लखनऊ के पीजीआई थाना क्षेत्र में हुई डकैती समेत अन्य जिलों में हुई वारदात के दौरान लूट समान की बरामदगी हुई है। दावा है कि यह लोग पिन्डारी जनजाति के हैं।
मध्यप्रदेश का घुमंतू गूना गिरोह बना आतंक
एसएसपी एसटीएफ अमित पाठक ने बताया कि मई से जुलाई 2017 के बीच लखनऊ के पौश इलाको में अज्ञात अपराधियों ने डकैती और नकबजनी की कई घटनाएं अंजाम दी। इसमें पीजीआई में आदित्य राठौर के घर लूट डकैती भी शामिल थी। इसके बाद एस.टी.एफ को केस सुलझाने के लिए लगाया गया। इस दौरान पता चला कि मध्य प्रदेश के गुना जनपद में रहने वाले कुछ घुमंतू गिरोहों के अपराधी इन वारदातों को अंजाम दे रहे हैं। इसी बीच एसटीएफ के हत्थे संतोष पारदी नाम का शख्स चढ़ा। उसने बताया कि 31 मई को पी.जी.आई थाना क्षेत्र में उनके आदित्य राठौत के घर में डकैती डाली गई थी। वारदात को अंजाम देने के लिए एक अन्य आरोपी सोनू की सफेद रंग की टाटा सफारी गाड़ी का प्रयोग हुआ था।
संतोष ने बताया कि गिरोह के सदस्य गोमान, नामेश्वर उर्फ नामे, केवल पारदी, जीतू पारदी, मोरधन पारदी झाॅसी गए हुए हैं। ये लोग योजना के तहत गिरोह के अनिल, अजीत व सोनू को साथ लेकर लखनऊ आने वाले है और एक अन्य डकैती की वारदात को अंजाम देंगे। उसकी निशानदेही पर झांसी पहुंची। यह से सोनू की गिरफ्तारी हुई। लेकिन गिरोह के अन्य सदस्य सफेद रंग की टाटा सफारी में लखनऊ के लिए जा चुके थे। यहां वह किसी वारदात को अंजाम देने वाले थे। इस पर लखनऊ में एसटीएफ व पीजीआई थाना पुलिस ने सभी को गिरफ्तार किया।
ब्रिटिश काल के पिन्डारी डैकतों का आतंक
पूछताछ में खुलासा हुआ कि मध्य प्रदेश के विभिन्न जनपदों में कुछ घुमंतू जनजाति के लोग निवास करते हैं, जिनके कुछ सदस्य विभिन्न प्रदेशों में डकैती व नकबजनी की सनसनीखेज घटनाओं को अंजाम देते हैं। इस घुमंतू जनजाति को ब्रिटिश काल में पिन्डारी कहा जाता था, जिनमें से कुछ लोगों का मुख्य पेशा लूटपाट करना था। वर्तमान में ये घुमंतू लोग मध्य प्रदेश के जनपद गुना क्षेत्र में बसे हुए हैं, और इनमें से कुछ लोगों का पेशा पूर्व की भांति लूटपाट करना ही है। यह भी जानकारी मिली कि ये अपराधी प्रवृति के कुछ लोग विभिन्न शहरो में डेरे डालकर प्रवास भी करते हैं ताकि अपने शिकार को चिन्हित कर सकें। ये घुमन्तु अपराधी नदियों के किनारे व पहाड़ों की तलहेटी में मुख्य आबादी से दूर रहना पसन्द करते हैं। इनके द्वारा शहर के पौश इलाको में मकानो को चिन्हित कर लिया जाता है। फिर अंधेरे में अपराध करने के लिए निकल जाते हैं। जिस क्षेत्र में इन्हें घटना अंजाम देने होती है, उस क्षेत्र से लगे सुनसान इलाके में पहुंचकर छिप जाते हैं और रात के तीसरे पहर में चिन्हित मकान पर पहुंचकर ये लोग ग्रिल तोड़कर मकान में प्रवेश करते हैं।
आरोपी और बरामदगी
एसटीएफ की गिरफ्त में आए अरोपियों की पहचान मोरधन पारदी (सरगना), गोमान सिंह पारदी, नामकेश्वर उर्फ नामे, केवल पारदी, जीतू पारदी, संतोष पारदी, सोनू राय, अजीत यादव, अनिल कुमार वर्मा, के रूप में हुई है। इनके पास से 2 टाटा सफारी गाड़ी, पैन कार्ड, 3 अदद ए.टी.एम. कार्ड, 4 मोबाइल फोन, 14 नकबजनी के उपकरण, नकद 8 हजार रूपये बरामद हुए हैं। इन्होंने अब तक लखनऊ में एक, झांसी में दो, आगरा में एक वारदात को अंजाम देने की बात कबूल की है। साथ ही लखनऊ में एक बड़ी वारदात को अंजाम देने की तैयारी थी।
कई राज्यों में है इनका आतंक
इस घुमंतू गिरोह ने झांसी व मध्य प्रदेश के जनपद-दतिया, भोपाल, इन्दौर, उज्जैन व राजस्थान-जोधपुर, महाराष्ट्र , तमिलनाडु और दिल्ली में नकबजनी व डकैती की कई वारदातें अंजाम दी हैं।
Published on:
18 Sept 2017 01:31 pm
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