पुराने फार्मूले से बड़ा सियासी उलटफेर करने जा रही हैं मायावती, इस तरह जीतेंगी लोकसभा चुनाव

पुराने फार्मूले से बड़ा सियासी उलटफेर करने जा रही हैं मायावती, इस तरह जीतेंगी लोकसभा चुनाव

Nitin Srivastava | Publish: Feb, 15 2018 01:58:21 PM (IST) Lucknow, Uttar Pradesh, India

खोई सियासी जमीन को दोबारा हथियाने के लिए मायावती अपना पुराना पैंतरा आजमाने जा रही हैं...

लखनऊ. उत्तर प्रदेश की गोरखपुर और फूलपुर सीटों पर होने वाला उपचुनाव सभी राजनीतिक दलों के लिए नाक का सवाल बन चुका है। बीजेपी किसी भी कीमत पर ये दोनों सीट अपने हाथ से गंवाना नहीं चाहती। वहीं कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी भी चुनावी अखाड़े में दो-दो हाथ करने के पूरे मूड में है। मायावती इन दोनों सीटों को लेकर लगातार अपने शीर्ष नेतृत्तव के साथ मंथन में जुटी हैं। वहीं पार्टी सूत्रों की मानें तो मायावती यूपी में खोई अपनी सियासी जमीन को दोबारा हथियाने के लिए अपना पुराना पैंतरा आजमाने जा रही हैं। इसके लिए बसपा में जोरों पर तैयारियां भी शुरू हो गई हैं।

 

सोशल इंजीनियरिंग से सहारे वापसी की उम्मीद

एक समय अपनी सोशल इंजीनियरिंग के सहारे यूपी की सत्ता पर काबिज होने वाली मायावती दोबारा उसी राह पर चलने की तैयारी कर रही हैं। बसपा लोकसभा चुनाव में जातीय समीकरण के अपने पुराने फार्मूले को एक बार फिर अप्लाई करने जा रही है। बसपा अब दलित समाज के साथ अगड़े, पिछड़े और अल्पसंख्यकों का गठजोड़ बनाने के मूड में है। मायावती ने इस एक्सरसाइज के लिए पार्टी के बड़े नेताओं को तीन महीने का समय दिया है। मायावती ने निर्देश दिया है कि नए सिरे से पार्टी का संगठन खड़ा करें। बसपा अपनी इस रणनीति के सहारे एक बार फिर यूपी की राजनीति में बड़ा उल्टफेर करने की तैयारी में है।

 

नहीं चल सका था जादू

हालांकि आपको बता दें कि मायावती का ये पुराना फर्मूला 2014 के लोकसभा चुनाव और 2017 के यूपी विधानसभा चुनाव में काम नहीं किए थे। 2014 के लोकसभा चुनाव में तो बसपा का खाता भी नहीं खुला था। जो मायावती के पूरे राजनीतिक करियर में सबसे बड़ा झटका था। लोकसभा चुनाव में हार के बाद बसपा को उम्मीद थी कि सपा की पारिवारिक कलह और सरकार के खिलाफ एंटी इनकंबेंसी का फायदा उसे 2017 के विधानसभा चुनाव में मिलेगा। लेकिन मायावती को एक बार फिर इस चुनाव में भी करारी हार का सामना करना पड़ा और बसपा यूपी में तीसरे नंबर पर सिमट कर रह गई।

 

मायावती नहीं छोड़ना चाहतीं कोई कमी

मायावती अब 2019 के लोकसभा चुनाव की तैयारियों में कोई कमी नहीं छोड़ना चाहती हैं। ताकि चुनावों में लगातार मिल रही हार से उबरा जा सके। निकाय चुनाव में बसपा को जो सफलता मिली है मायावती उसे लोकसभा चुनाव में भुनाना चाहती हैं। इसीलिए इस बार दलितों के साथ-साथ वह अगड़े, पिछड़ों और अल्पसंख्यकों के मुद्दों को जोरशोर से उठा रही हैं। इसी क्रम में मायावती ने लखनऊ में लगातार तीन दिनों तक पार्टी नेताओं के साथ बैठक की। इस बैठक में मायावती ने पार्टी नेताओं को नए सिरे से बूथ कमेटियां बनाने के लिए कहा है। मायावती इस बार पार्टी संगठन में युवाओं को भी 50 फीसदी हिस्सेदारी देने जा रही हैं। दरअसल मायावती 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले अभी तक की सभी गलतियों में सुधार कर लेना चाहती हैं। जिससे वे अपना खोया हुआ वोट बैंक हासिल कर सकें और अपनी राजनीतिक जमीन दोबारा हासिल कर सकें।

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