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बौद्ध स्थल श्रावस्ती, विश्व शान्ति का स्थल

इस ऐतिहासिक नगरी का प्राचीनतम इतिहास रामायण और महाभारत काल के महाकाव्यों के अनुसार पहले ये उत्तर कौशल की राजधानी हुआ करती थी।

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Hariom Dwivedi

Apr 04, 2016

Buddhist Taposthali Sravasti

Buddhist Taposthali Sravasti

श्रावस्ती.
हिमालय की तलहटी में बसे भारत नेपाल बार्डर के सीमावर्ती जिले बहराइच से महज 40 किलोमीटर की दूरी पर स्थित श्रावस्ती जिले की पहचान विश्व के कोने कोने में आज बौद्ध तीर्थस्थल के रूप में विश्व विख्यात है। पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक़, इस ऐतिहासिक नगरी का प्राचीनतम इतिहास रामायण और महाभारत काल के महाकाव्यों के अनुसार पहले ये उत्तर कौशल की राजधानी हुआ करती थी।


अनुश्रुतियों के मुताबिक, सूर्यवंशी राजा श्रावस्त के नाम पर इस नगरी का नामकरण कर श्रावस्ती नाम की संज्ञा दी गयी, तब से ये इलाका श्रावस्ती के नाम से जाना जाता है। जंगलों के बीच गुफा में रहकर राहगीरों को लूटने के बाद उनकी ऊंगली काटकर माला पहनने वाले एक दुर्दांत डाकू अंगुलिमाल को राप्ती नदी के किनारे बसे इसी स्थान पर भगवान बुद्ध ने अपनी इश्वरीय शक्तियों के बल पर नास्तिक से आस्तिक बनाकर अपना अनुयायी बनाया था।


ये वही इलाका है जहां पर गौतम बुद्ध ने अपने जीवन काल के सबसे ज्यादा बसंत इसी स्थान पर बिताये थे। श्रावस्ती के जेतवन इलाके में जगह जगह खंडहर नुमा इमारत के तमाम अवशेष आस्था का केन्द्र बने हुए हैं, जहां पर देश के कोने कोने से बौद्ध धर्मावलंबियों का जत्था पूरे हुजूम के साथ इस बौद्ध तीर्थ स्थल पर अपनी आस्था लेकर आता है। इस स्थान पर आज भी वो बोधिवृच्छ है, जहां बैठकर गौतम बुद्ध अपने अनुयायियों को उपदेश दिया करते थे। इसके साथ-साथ अनेकों स्तूप और सहेट-महेट के भग्नावशेष आज भी यहां मौजूद है, जहां पर शांति के दूत गौतम बुद्ध की पावन स्थली पर दूर देश के पर्यटक अपनी आस्था लेकर आते है। इस नगरी में हर तरफ बौद्ध भिछु बैठकर ध्यान के साथ भगवान बुद्ध की राह पर शान्ति का पाठ करते नज़र आते है। यहां सात समन्दर पार से आने वाले बौधिष्ट भी आकर खुद को धन्य मानते हैं।

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