ये वही इलाका है जहां पर गौतम बुद्ध ने अपने जीवन काल के सबसे ज्यादा बसंत इसी स्थान पर बिताये थे। श्रावस्ती के जेतवन इलाके में जगह जगह खंडहर नुमा इमारत के तमाम अवशेष आस्था का केन्द्र बने हुए हैं, जहां पर देश के कोने कोने से बौद्ध धर्मावलंबियों का जत्था पूरे हुजूम के साथ इस बौद्ध तीर्थ स्थल पर अपनी आस्था लेकर आता है। इस स्थान पर आज भी वो बोधिवृच्छ है, जहां बैठकर गौतम बुद्ध अपने अनुयायियों को उपदेश दिया करते थे। इसके साथ-साथ अनेकों स्तूप और सहेट-महेट के भग्नावशेष आज भी यहां मौजूद है, जहां पर शांति के दूत गौतम बुद्ध की पावन स्थली पर दूर देश के पर्यटक अपनी आस्था लेकर आते है। इस नगरी में हर तरफ बौद्ध भिछु बैठकर ध्यान के साथ भगवान बुद्ध की राह पर शान्ति का पाठ करते नज़र आते है। यहां सात समन्दर पार से आने वाले बौधिष्ट भी आकर खुद को धन्य मानते हैं।