लखनऊ. यूपी में होने वाले विधानसभा चुनाव को देखते हुए पिछड़े वर्ग से बनाए गए भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य के सामने इसी वर्ग को पार्टी से जोड़ने की सबसे बड़ी चुनौती होगी। प्रदेश में पिछड़े वर्ग के 45 फीसदी से अधिक मतदाता हैं। साल 2017 में सरकार बनाने में इस वर्ग के मतदाताओं की बड़ी भूमिका होगी। भाजपा और राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पिछड़े वर्ग के होने के नाते ही मौर्य को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है, हालांकि वह हिन्दुत्व के प्रबल समर्थक भी माने जाते हैं। उन्होंने राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के साथ ही विश्व हिन्दू परिषद (विहिप), बजरंग दल, गोरक्षा आदि हिन्दुत्ववादी संगठनों में भी काम किया। वह श्रीरामजन्म भूमि आन्दोलन में भी सक्रिय थे।