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यूपी में सपा-बसपा से पिछड़ों को कैसे तोड़ेंगे केशव ?

प्रदेश में पिछड़े वर्ग के 45 फीसदी से अधिक मतदाता हैं। साल 2017 में सरकार बनाने में इस वर्ग के मतदाताओं की बड़ी भूमिका होगी। 

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Raghvendra Pratap

Apr 08, 2016

president

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लखनऊ. यूपी में होने वाले विधानसभा चुनाव को देखते हुए पिछड़े वर्ग से बनाए गए भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य के सामने इसी वर्ग को पार्टी से जोड़ने की सबसे बड़ी चुनौती होगी। प्रदेश में पिछड़े वर्ग के 45 फीसदी से अधिक मतदाता हैं। साल 2017 में सरकार बनाने में इस वर्ग के मतदाताओं की बड़ी भूमिका होगी। भाजपा और राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पिछड़े वर्ग के होने के नाते ही मौर्य को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है, हालांकि वह हिन्दुत्व के प्रबल समर्थक भी माने जाते हैं। उन्होंने राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के साथ ही विश्व हिन्दू परिषद (विहिप), बजरंग दल, गोरक्षा आदि हिन्दुत्ववादी संगठनों में भी काम किया। वह श्रीरामजन्म भूमि आन्दोलन में भी सक्रिय थे।

यूपी में सपा और बसपा के साथ है पिछड़ा वोट बैंक
भाजपा के नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य के सामने पिछडे वर्ग को ही जोडने की सबसे बडी चुनौती होंगी क्योंकि यूपी में दो बड़ी पार्टियां सपा और बसपा में इस वर्ग के नेता पहले से ही जुड़े हैं और प्रतिष्ठत पदों पर भी हैं।

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दो प्रधानमंत्री देने वाली सीट से जीतकर आए हैं केशव
केशव मौर्य देश को पहले दो प्रधानमंत्री देने वाले इलाहाबाद के फूलपुर संसदीय क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं। उन्होंने 2014 के लोकसभा चुनाव में फूलपुर से किस्मत आजमायी और लोकसभा पहुंचे। इससे पहले उन्होंने 2012 के विधानसभा चुनाव में कौशाम्बी के सिराथू सीट से चुनाव लड़ा था। इस चुनाव में प्रतिद्धंदी उम्मीदवार को शिकस्त देकर वह पहली बार विधानसभा पहुंचे थे। सांसद निर्वाचित होने के बाद उन्होंने विधायक पद से त्यागपत्र दे दिया था।

सपा-बसपा में पिछड़े नेताओं का प्रतिनिधित्व
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सपा का नेतृत्व ही पिछड़े वर्ग का है, जबकि बसपा में स्वामी प्रसाद मौर्य का अपना कद है। वह अपने समाज के बड़े नेता माने जाते हैं। राज्य विधानसभा में नेता विपक्ष और बसपा महासचिव स्वामी प्रसाद मौर्य अपनी बिरादरी के साथ ही अन्य पिछड़े वर्गों में भी खासा दखल रखते हैं। केशव प्रसाद मौर्य को इन दोनों की पिछड़े वर्ग के पैठ में सेंध लगानी ही होगी।


आसान नहीं हैं नई टीम तैयार करना
भाजपा के वरिष्ठ नेता ने कहा कि विधानसभा के चुनाव में आठ-दस महीने ही बचे हैं। इतने ही समय में नई कमेटी बनाना, लोगों को जोड़ना, जनता में पार्टी की सहभागिता बढ़ाना नए अध्यक्ष के लिए आसान नहीं होगा।

हिन्दूत्व समर्थक माने जाते हैं केशव मौर्य
विश्व हिन्दू परिषद से जुड़े होने के नाते मौर्य को हिन्दुत्व का प्रबल समर्थक माना जाता है। इसलिए कुछ राजनीतिक विशेषज्ञ यह भी मान रहे हैं कि भाजपा के नए अध्यक्ष मतों के ध्रुवीकरण कराने की रणनीति में भी सफल हो सकते हैं। मौर्य के अध्यक्ष बनने से भाजपा को सामान्य और पिछड़ा दोनों ही वोट बैंक का फायदा मिलता दिख रहा है।


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