24 जनवरी 2026,

शनिवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

केजीएमयू में कैंसर मरीजों को एक इंजेक्शन से मिलेगी 6 महीने तक राहत, खर्च भी कम

केजीएमयू के एनीस्थिसियोलॉजी विभाग के पेन क्लिनिक में नई इंजेक्शन की सुविधा शुरू हो गयी है

2 min read
Google source verification
kgmu

केजीएमयू में कैंसर मरीजों को एक इंजेक्शन से मिलेगी 6 महीने तक राहत, खर्चा भी कम

लखनऊ. कैंसर के मरीजों को दर्द से छुटकारा दिलाने के लिए केजीएमयू के एनीस्थिसियोलॉजी विभाग के पेन क्लिनिक में नई इंजेक्शन की सुविधा शुरू हो गयी है। इस नई इंजेक्शन के तहत कैंसर पेशंट्स को 6 महीने तक दर्द से राहत मिलेगी। इंजेक्शन की कीमत 800 से 1000 रुपये है, जबकि निजी अस्पतालों में इसकी कीमत 10,000 तक वसूली जाती है।

हर कैंसर के लिए अलग-अलग इंजेक्शन

सबसे ज्यादा दर्द लास्ट स्टेज कैंसर पेशंट्स को होता है। पेन क्लिनिक की प्रो. सरिता सिंह के मुताबिक फ्लोरोस्कोपी मशीन के जरिये कैंसर से नस की पहचान की जाती है। इस प्रक्रिया को पहचानने के लिए बनारस हिंदू विश्व विद्यालय से स्पेशल ट्रेनिंग ली गयी है। उन्होंने बताया कि हर कैंसर के मरीज को अलग-अलग इंजेक्शन लगाया जाता है। अगर मुंह का कैंसर है, तो नसों का न्योरोलिसिस किया जाता है। अगर ब्रेस्ट कैंसर है, तो स्टीलेट गगलिया न्योरोलिसिस किया जाता है। वहीं, आंतों के कैंसर, पित्त की थैली व पैनक्रियास कैंसर दर्द निवारण के लिए सीलियक फ्लेकसिस न्योरोलिसि दिया जाता है। इस प्रक्रिया में 3-4 घंटे का समय लगता है।

ब्रेस्ट कैंसर का इलाज है टारगेट थेरेपी

ब्रेस्ट कैंसर मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। इसका ट्रीटमेंट टारगेट थेरेपी है, जिससे कैंसर सेल्स को टारगेट कर उसे खत्म किया जाता है। इसके कोई साइड एफेक्टस नहीं होते। यह पूरी तरह से सेफ है। डॉ. विभोर महेंदू के मुताबिक महिलाओं को हर 15 दिन में चेकअप करवाना चाहिए। 40 पार महिलाओं को हर साल मेमोग्राफी जरूर करवाना चाहिए। अगर ब्रेस्ट में किसी तरह की गांठ हो व भारीपन का आभास हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क कराना चाहिए। कैंसर का पता लगाने के मामले में जरा सी भी लापरवाही घातक हो सकती है। कई बार मरीज दर्द बढ़ जाने के बाद आते हैं। ऐसा करने से कैंसर शरीर के उस भाग के आधे हिस्से को डैमेज कर चुका होता है।