
लखनऊ. उत्तर प्रदेश के राज्य निर्वाचन आयुक्त एस के अग्रवाल ने तीसरे चरण के चुनाव खत्म हो जाने के बाद आयोजित प्रेस कांफ्रेस में लखनऊ के जिला प्रशासन को नालायक और नाकारा बताया। चुनाव के दौरान सामने आई अव्यवस्थाओं से वे भड़के दिखाई दिए। उन्होंने कहा कि राजधानी होने के नाते जिस तरह की मुस्तैदी और तैयारी लखनऊ के जिला प्रशासन को दिखानी चाहिए थी, वह नहीं दिखाई गई। उन्होंने जिला प्रशासन को नालायक और नकारा की तरह काम किया। उन्होंने कहा कि लखनऊ में सबसे बेहतर अफसर तैनात होते हैं, फिर भी अव्यवस्था रही।
वोटर लिस्ट की खामियों पर निर्वाचन आयुक्त कहा कि लखनऊ के कमिश्नर वोटर लिस्ट की खामियों और ईवीएम खराबी की शिकायतों को जांच करेंगे। उन्होंने कहा कि वोटर लिस्ट का पुनरीक्षण काम लगभग तीन महीने चला। इसके बाद संक्षिप्त पुरनरीक्षण कार्यक्रम चलाया गया। पांच से छह महीने तक मतदाता सूचियों को लेकर काम हुआ। वोटर लिस्ट से नाम गायब होने को लेकर निर्वाचन आयुक्त ने तीन कारण बताये। उन्होंने कहा कि बहुत सारे लोग ऐसे थे, जिनका नगर निकाय सूची में भी नाम था और पंचायत चुनाव में भी नाम थे। जिस व्यक्ति ने पंचायत चुनाव में 2017 में वोट डाला है और उसका नाम शहरी वोटर लिस्ट में भी है तो उसका नाम अनिवार्य रूप से काट दिए जाने के आदेश दिए थे। दूसरा कारण वार्ड में बदलाव कर तीसरा कारण बीएलओ की लापरवाही को बताया।
उन्होंने कहा कि ईवीएम ख़राब होने को लेकर गलत माहौल बनाया गया। उन्होंने मतदाता सूचियों की खामी पर बीएलओ पर हुई कार्रवाई को नाकाफी बताया। उन्होंने कहा कि यह जिम्मेदारी सिर्फ बीएलओ की नहीं एडीएम और एसडीएम की भी है। सिर्फ बीएलओ पर कार्रवाई कर जिम्मेदारी खत्म नहीं होती। इस मामले में एसडीएम और एडीएम को भी जिम्मेदार बनाया जाएगा। लखनऊ के कमिश्नर को मामले की जांच सौपी गई है। इससे पता चलेगा कि किन लोगों के नाम कटे और किस कारण से कटे। जान बूझकर वोटर का नाम काटना अपराध है। हमने लखनऊ में सबसे बेहतर मशीने उपलब्ध कराई थी फिर भी लखनऊ में सबसे अधिक गड़बड़ी हुई। उन्होंने कहा कि यह नीम और ऊपर से करेला चढ़ा वाला स्थिति हो गई।
Published on:
29 Nov 2017 07:26 pm
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