
Gopashtami
Gopashtami: अवध गौशाला लखनऊ में गोपाष्टमी के पावन पर्व का आयोजन उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक और पार्षद अनुराग मिश्रा की उपस्थिति में धूमधाम से संपन्न हुआ। इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री ने गौ माता की विधिवत पूजा अर्चना की और गौसेवकों का सम्मान कर उन्हें प्रोत्साहित किया। कार्यक्रम का आयोजन पार्षद अनुराग मिश्रा द्वारा किया गया, जिन्होंने जानकारी दी कि यह आयोजन 117 वर्षों से प्रतिवर्ष आयोजित किया जा रहा है।
गोपाष्टमी पर्व की ऐतिहासिक और धार्मिक मान्यता का उल्लेख करते हुए, अनुराग मिश्रा ने बताया कि यह वही दिन है जब भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी माता यशोदा से जिद कर गौ-पालन का कार्य अपने हाथों में लिया था। उन्होंने कहा कि भगवान कृष्ण के गौपालन की शुरुआत के कारण ही उन्हें "गोपाल" और "गोविंद" के नाम से भी पूजा जाता है। गोपाष्टमी पर्व भारतीय संस्कृति और गौसेवा की महान परंपरा को पुनर्स्मरण कराता है।
इस विशेष अवसर पर उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने गौमाता को खील, बताशे, गुड़, चना, और हरे चारे का भोग अर्पित किया और गौसेवकों को बाल्टी और नगद पुरस्कार देकर सम्मानित किया। श्री पाठक ने अपने संबोधन में गौ माता को हिंदू धर्म और संस्कृति का अभिन्न अंग बताया। उन्होंने कहा कि मान्यता अनुसार, गाय में 33 करोड़ देवी-देवताओं का वास होता है, जिससे गौ माता की पूजा का महत्व और भी बढ़ जाता है।
कार्यक्रम में पांच प्रमुख गौ-सेवक ब्राह्मणों का भी सम्मान किया गया। इसमें काली जी मंदिर के पुजारी आचार्य पंडित शिवम पांडे, पंडित राजेश शुक्ला, पंडित विशाल गौंड, और पंडित कृष्णा शर्मा का सम्मान किया गया। इस धार्मिक आयोजन में लखनऊ के प्रमुख गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति ने इसे और भव्य बना दिया।
डॉ. उमंग खन्ना, अनिल गुप्ता, राधे मोहन अग्रवाल, मुखर्जी दादा, मधु तायल, प्रेम रस्तोगी, और कृष्ण जीवन रस्तोगी जैसे अनेक प्रतिष्ठित व्यक्तियों ने अपनी उपस्थिति से कार्यक्रम की गरिमा को बढ़ाया। कार्यक्रम में समिति के सदस्य लोकेश बिहारी अग्रवाल, राजू रस्तोगी, मनोज गुप्ता, गौरव गुप्ता, ओम दीक्षित, घनश्याम अग्रवाल, संदीप अग्रवाल, डी.पी. सिंह, संजय त्रिवेदी, संजू झींगरन, सुरेश रस्तोगी, शैलेंद्र कक्कड़, अवधेश शुक्ला, शुभ कपूर, और सुजीत शुक्ला सहित अनेक गणमान्य लोगों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
अवध गौशाला में मनाया गया यह वार्षिक आयोजन लखनऊ में गोपाष्टमी पर्व की धार्मिक परंपरा को एक नई ऊर्जा और प्रेरणा प्रदान करता है। इस तरह के आयोजन न केवल गौसेवा और पूजा की परंपराओं का निर्वाह करते हैं, बल्कि समाज को सांस्कृतिक धरोहर के प्रति जागरूकता और समर्पण की भावना भी प्रदान करते हैं।
Updated on:
09 Nov 2024 04:37 pm
Published on:
09 Nov 2024 04:37 pm
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