
लखनऊ. लोक जनशक्ति पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री राम विलास पासवान ने कहा है कि 2 अप्रैल को देश में दलित संगठनों ने जो आंदोलन किया उसका कारण था सुप्रीम कोर्ट में एससी एसटी एक्ट को लेकर गिरफ़्तारी से जुड़ी प्रक्रिया में बदलाव करना। सुप्रीम कोर्ट ने अभी जिस तरह का आदेश दिया है, उत्तर प्रदेश में 2007 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने भी इसी तरह का आदेश दिया था। मायावती ने अपने आदेश में यही बात कही थी जो सुप्रीम कोर्ट ने अभी कही है। मायावती सरकार ने जो आदेश जारी किया था उसमें लिखा गया था कि प्रमाणित होने पर ही गिरफ़्तारी की जाए।
पासवान ने कहा कि मायावती हमेशा से ही दलित विरोधी रही हैं। वे सत्ता में आने से पहले कुछ और नारे लगाती हैं और सत्ता में आ जाने के बाद कुछ और बात करती हैं। एससी एसटी एक्ट को लेकर अभी सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया है, उसमें सरकार की किसी तरह की कोई भूमिका नहीं है। कोर्ट ने जो आदेश दिया था, उसके बाद उनकी पार्टी ने पुनर्विचार याचिका दाखिल की थी। बाद में केंद्र सरकार ने भी पुनर्विचार याचिका दाखिल की। मायावती ने इस मसले पर दलितों को उकसाने का काम किया। इस मसले पर प्रधामंत्री ने मंत्री समूह की बैठक बुलाई और एक कमिटी का गठन किया। पासवान ने कहा कि कमिटी ने यह निर्णय लिया है कि सुप्रीम कोर्ट यदि पूर्व की स्थिति बहाल करता है तो ठीक है। यदि ऐसा नहीं होता है तो हम आर्डिनेंस लायेंगे।
जिन्ना से जुड़े विवाद पर पासवान ने कहा कि आज़ादी की लड़ाई में महात्मा गांधी, बाबा साहब और मोहम्मद अली जिन्ना ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। बाबा साहब ने दलितों के साथ भेदभाव के बावजूद अलग देश की मांग नहीं की बल्कि दलितों के लिए विशेष आरक्षण की मांग की और पूना पैक्ट में इस पर सहमति बनी। दूसरी ओर जिन्ना ने मुस्लिमों के लिए धर्म के आधार पर अलग देश की मांग कर ली। दलितों में घर में नेताओं के खाना खाने के सवाल पर पासवान ने कहा कि राहुल गाँधी को यह सवाल पूछने का हक नहीं है क्योंकि दलितों के घर खाना खाने का हक़ सिर्फ उनका नहीं है। एक व्यक्ति एक वोट से क्रांति आई है। वोट प्रतिशत सबसे अधिक दलितों का है और वे सबसे अधिक वोट डालने निकलते हैं। हर आदमी के वोट की कीमत है और वोट चाहिए तो खाना खाना पड़ेगा।
Published on:
03 May 2018 05:24 pm
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