
उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की 'भारत जोड़ो यात्रा' मंगलवार प्रवेश कर गई। इससे एक दिन पहले यानी सोमवार को अयोध्या में राम जन्मभूमि मंदिर के मुख्य पुजारी ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी को पत्र लिखा और यात्रा की सफलता के लिए भगवान श्री की कामना की है।
राम जन्मभूमि मंदिर के मुख्य पुजारी मुख्य पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास ने पत्र लिखा, “ मैं आशा करता हूं और प्रार्थना करता हूं कि जिस मिशन के लिए आप लड़ रहे हैं, वह सफल हो। मैं आपको आपके लंबे जीवन का आशीर्वाद देता हूं। आप लोगों के हित में और लोगों की खुशी के लिए 'सर्वजन हिताय सर्वजन सुखाय' के लिए काम कर रहे हैं, मैं भगवान राम की कृपा आप पर हमेशा बनाए रखना चाहता हूं।
राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा पिछले वर्ष सात सितंबर को तमिलनाडु के कन्याकुमारी में शुरू हुई थी। अब तक 10 राज्यों से गुजरते हुए 2,800 किलोमीटर से अधिक की दूरी तय कर चुकी है। भारत यात्रा जोड़ो यात्रा एक लंबे विश्राम के बाद 3 जनवरी को दिल्ली से दोबारा रवाना होगी। यह यात्रा यूपी, हरियाणा, पंजाब होते हुए कश्मीर तक जाएगी। इस महीने कश्मीर में यह यात्रा समाप्त होगी।
'भारत जोड़ो यात्रा' 5 जनवरी को हरियाणा में करेगी प्रवेश
मंगलवार दोपहर 'भारत जोड़ो यात्रा' उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में प्रवेश करेगी। बागपत के मविकला गांव में रात को विश्राम करेंगी। 4 जनवरी को सुबह वहां से यह यात्रा चलकर शामली पहुंचेगी। 5 जनवरी की शाम पानीपत के सनौली होते हुए हरियाणा में प्रवेश करेगी।
“स्वास्थ्य कारणों से यात्रा में नहीं शामिल हो सकते आचार्य सत्येंद्र दास”
कांग्रेस प्रवक्ता एसके गौतम ने ANI से बात करते हुए कहा कि कांग्रेस सांसद राहुल गांधी को राम जन्मभूमि के मुख्य पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास का समर्थन मिला है। उन्होंने गांधी को भारत जोड़ो यात्रा में सफलता की कामना करते हुए लिखा। वह यात्रा में शामिल होना चाहते थे लेकिन अपने स्वास्थ्य संबंधी मुद्दों के कारण ऐसा नहीं कर सके।
तेजी से वायरल हो रहे इस पत्र को लेकर आचार्य सत्येंद्र दास ने कहा, "31 दिसंबर को कुछ स्थानीय कांग्रेसी नेता हमारे पास पहुंचे थे। जिनके द्वारा राहुल गांधी की 'भारत जोड़ों यात्रा' में शामिल होने की इच्छा प्रकट की तो जाने से मना कर दिया। जिसके बाद नेताओं के द्वारा राहुल गांधी के नाम एक पत्र रामलला के आशीर्वाद स्वरूप मांगा था। इस पत्र में लिखे गए बिंदुओं को भी उन्हीं के द्वारा बताया गया था। जबकि पत्र से कोई राजनीतिक संबंध नहीं है। फिर भी पत्र के माध्यम से इसे राजनीतिक तूल दिया गया है।"
Updated on:
03 Jan 2023 10:09 am
Published on:
03 Jan 2023 10:07 am
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