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खूंखार डकैत ददुआ जिंदा हो गया !

बीहड़ की रूह भी कांपती थी ददुआ सेमौत के 13 साल बाद एक बार फिर जिंदा हुआददुआ पर बनी फिल्म "तानाशाह" रिलीज होने को तैयार

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खूंखार डकैत ददुआ जिंदा हो गया !

खूंखार डकैत ददुआ जिंदा हो गया !

चित्रकूट. तीन दशकों से अधिक समय तक जिसके नाम पर बीहड़ की रूहें भी कांप उठती थी। जिसकी चहलकदमी से खौफ के बादल मंडराने लगते थे। लोगों की सांसें थम जाती थीं वो खूंखार डकैत शिव कुमार पटेल उर्फ ददुआ" अपनी मौत के 13 साल बाद एक बार फिर जिंदा होने जा रहा है। बीहड़ के इस बेताज बादशाह ने बागी जीवन जीते हुए बुन्देलखण्ड के बीहड़ों में करीब तीन दशक से अधिक समय तक अपने खौफ का एकतरफा साम्राज्य कायम किया था। जिसका तिलिस्म तोड़ने में यूपी व एमपी (मध्य प्रदेश) पुलिस को भी वर्षों लग गए। सन 2007 में यूपी एसटीएफ ने इस कुख्यात डकैत को मुठभेड़ में मार गिराया।

ददुआ पर फिल्म तैयार :- बुन्देलखण्ड के चित्रकूट जनपद के पाठा क्षेत्र के बीहड़ों में कभी दहशत की गोटी खेलने वाले दस्यु सरगना शिव कुमार पटेल उर्फ ददुआ के बागी जीवन पर बनी फिल्म "तानाशाह" रिलीज होने को तैयार है। अगले महीने 7 फरवरी को देश प्रदेश के सिनेमाघरों में फ़िल्म रिलीज़ की जाएगी। फ़िल्म निर्माता व अभिनेता दिलीप आर्या डकैत ददुआ के किरदार में नजर आएंगे। फ़िल्म का ट्रेलर यू ट्यूब पर "ए फ़िल्म ऑफ दिलीप आर्या" के नाम से लांच किया गया है। जिसमें एक ज़मींदार व डकैत ददुआ के बीच संवाद दिखाया गया है।

निर्माता दिलीप आर्या ने बताया कि ये फ़िल्म बनाने में तकरीबन 5 साल लग गए। डकैतों के बागी जीवन को गहराई से समझने उनके रहन सहन पर रिसर्च करने के लिए चित्रकूट सहित बुन्देलखण्ड के कई इलाकों में घूमना पड़ा। फ़िल्म के निर्माता मुकेश कुमार व निर्देशक रितम श्रीवास्तव हैं। कहा जाता है कि ददुआ की छवि उसके समाज में रॉबिनहुड की तरह थी। फ़िल्म में इस पहलू को भी दिखाने का प्रयास किया गया है।

ददुआ का बागी जीवन :- करीब तीन दशक से अधिक समय तक चित्रकूट के बीहड़ों से दहशत की इबारत लिखने वाले डकैत ददुआ का बागी जीवन जब वह तकरीबन 22 वर्ष का था तब शुरू हुआ। बीहड़ में उतरने के बाद ददुआ ने पीछे मुड़कर नहीं देखा और बन गया यूपी एमपी का मोस्ट वांटेड डकैत। यूपी की राजनीतिक बिसात खासकर बुन्देलखण्ड व उससे लगे पड़ोसी जनपदों प्रयागराज कौशाम्बी फतेहपुर मिर्जापुर सतना रीवा(मध्य प्रदेश) पर भी ददुआ का ही सिक्का चलता था एक समय। लूट हत्या डकैती रंगदारी पुलिस मुठभेड़ जैसी संगीन वारदातों के सैकड़ों मुकदमे ददुआ के खिलाफ दर्ज थे यूपी एमपी में। यूपी पुलिस ने उस पर सात लाख रुपए का इनाम घोषित कर रखा था। सन 2007 में यूपी एसटीएफ की टीम ने मानिकपुर(चित्रकूट) के झलमल जंगल में ददुआ को उसके आधा दर्जन साथियों के साथ मुठभेड़ में मार गिराया था।

फ़िल्म देखने के बाद होगा फैसला :- इस फ़िल्म को लेकर चर्चाओं का बाजार भी गर्म हो गया है। सोशल मीडिया में कई तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। ददुआ के भाई पूर्व सांसद मिर्जापुर बाल कुमार पटेल का कहना है कि अभी फ़िल्म का ट्रेलर देखा गया है जो ठीक लग रहा है। फ़िल्म देखने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है। यदि सत्य से परे कुछ असत्य दिखाया जाएगा तो वे न्यायालय भी जा सकते हैं। ददुआ पुत्र पूर्व विधायक चित्रकूट वीर सिंह पटेल का कहना है कि उन्होंने भी अभी फ़िल्म का प्रोमो ही देखा है। फिल्में समाज को संदेश देती हैं। यदि सत्य दिखाया जाएगा तो उन्हें कोई एतराज नहीं होगा। कुछ ऐसी ही प्रतिक्रिया सोशल मीडिया पर भी देखने सुनने को मिल रही है।