उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव आजकल नई-नई योजनाओंके लोकार्पण और शिलान्यास में बहुत व्यस्त हैं। अपनी इस व्यस्तता में वे कई ऐसी परियोजनाओं को हरी झंडी दिखा दे रहे हैं जो वास्तव में अधूरी हैं।
लखनऊ. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव आजकल नई-नई योजनाओंके लोकार्पण और शिलान्यास में बहुत व्यस्त हैं। अपनी इस व्यस्तता में वे कई ऐसी परियोजनाओं को हरी झंडी दिखा दे रहे हैं जो वास्तव में अधूरी हैं। हाल ही में मुख्यमंत्री ने लखनऊ में मात्र छह घंटों के दौरान 5,500 करोड़ रुपए की लागत वाली परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास कर दिया। जनता भले ही इन परियोजनाओं का उदघाटन होने के बाद भी अभी उसका उपयोग नहीं कर पा रही है, लेकिन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को भरोसा है कि वह अपनी इन मेगा परियोजनाओं के भरोसे फिर से सूबे की सत्ता संभालेंगे। अखिलेश कहते हैं जो काम करता है, जनता उसपर भरोसा करती है। हमने यूपी की जनता को मेट्रो सहित तमाम मेगा परियोजनाएं दी हैं और अब जनता की बारी है।
अब जनता की बारी
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के भरोसे का जनता क्या रिजल्ट देगी ये तो वक्त बताएगा? लेकिन मुख्यमंत्री अखिलेश रोज ही तमाम आधी अधूरी परियोजनाओं का उदघाटन करने में जुटे हैं। बीते दो महीनों में मुख्यमंत्री करीब एक दर्जन से अधिक ऐसी परियोजनाओं का उदघाटन कर चुके हैं, जिनका लाभ अभी तक जनता को नहीं मिला है। उन्हीं परियोजनाओं में से एक लखनऊ मेट्रो भी है। एक दिसंबर को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने हरी झंडी दिखाकर लखनऊ मेट्रो की पहली परीक्षण ट्रेन को रवाना किया। अब उसकी तकनीकी खामियां सामने आने लगी हैं। उसका ट्रायल रन रोक दिया गया है। लखनऊ मेट्रो रेल का उदघाटन अगले साल मार्च में होना था लेकिन चुनावी आचार संहिता लागू होने से पहले ही मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इसके उदघाटन का फैसला किया और आनन फानन में कार्यक्रम तय कराकर मेट्रो की पहली परीक्षण ट्रेन को हरी झंडी दिखा दी। मेट्रो का वास्तविक परिचालन फिलहाल मार्च तक ही संभव है क्योंकि अभी कई काम अधूरे हैं। अब आधी अधूरी इस परियोजना के पूरा होने पर ही लखनऊ की जनता को इसका लाभ मिलेगा, लेकिन मुख्यमंत्री दावा कर रहे हैं कि लखनऊ की जनता को उन्होंने मेट्रो की सौगात दे दी।
आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस वे पर चल निर्माण
इसी तरह मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अपनी एक अन्य मेगा परियोजना आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस वे को भी हरी झंडी दिखायी। कुछ दिन पहले ही मुख्यमंत्री ने 302 किमी लंबे आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस वे का उद्घाटन किया था। यह परियोजना भी अभी अधूरी है। सड़क और फ्लाई ओवर के निर्माण कार्य कई जगहों पर अभी चल रहा है। नए साल में ही यह एक्सप्रेस वे आम यात्रियों के लिए खुल सकेगा। फिर भी अखिलेश सरकार इन दोनों परियोजनाओं को तय समय से पहले पूरा करने का दावा कर रही है, लेकिन उदघाटन के बावजूद ये परियोजनाएं आम आदमी के इस्तेमाल लायक नहीं बन पाई हैं।
लोकभवन में अभी भी चल रहा काम
इसी तर्ज पर विधानसभा भवन के ठीक सामने बनाए गए मुख्यमंत्री सचिवालय के लोकभवन का उदघाटन किया गया। करीब साढ़े छह सौ करोड़ रुपए की लागत से बने लोकभवन के निर्माण कार्य भी अभी पूरे नहीं हुए हैं। इस भवन में कुल तीन ब्लॉक बनने थे लेकिन अभी सिर्फ एक ब्लॉक ही पूरा तरह से तैयार हो सका है।
11 जिलों में ही दौड़ सकी डायल 100
इसी तर्ज पर मुख्यमंत्री ने अपनी महत्वाकांक्षी योजना डायल 100 की शुरुआत की है। इस नंबर पर डायल करने के 15 से 20 मिनट के भीतर पुलिस मौके पर पहुंच जाएगी, यह दावा प्रदेश भर में किया जा रहा है, पर अभी सूबे के सिर्फ 11 जिलों में ही यह योजना लागू हो पाई है जबकि इसे राज्य के सभी जिलों में लागू किया जाना था।
ये योजनाएं अभी भी अधूरी
इसी प्रकार इटावा का लॉयन सफारी पार्क, जयप्रकाश नारायण इंटरनेशनल सेंटर, गोमती रिवरफ्रंट, समाजवादी स्मार्टफोन योजना, अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम जैसी कई परियोजनाएं हैं जिनका उदघाटन तो कर दिया गया है, लेकिन उनकी शुरुआत होने में काफी समय लगना है।
विपक्ष नहीं लगा अच्छा
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव द्वारा आधी अधूरी परियोजनाओं का ताबड़तोड़ उदघाटन करना विपक्षी दलों का अखरा है। बहुजन समाज पार्टी की मुखिया कहती हैं कि अखिलेश यादव चुनावी लाभ लेने के लिए ही आधी अधूरी परियोजनाओं का उदघाटन करने की नई प्रथा शुरू कर रहे हैं। यह उनकी बबुआ सोच का प्रतीक है। कांग्रेस प्रवक्ता अशोक सिंह कहते हैं कि अधूरी परियोजनाओं का उदघाटन उचित नहीं है। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को इससे बचना चाहिए था।
उद्घाटन करना मजबूरी
फिलहाल विपक्षी नेताओं के ऐसे आरोपों पर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ध्यान नहीं देते। वास्तव में आधी अधूरी परियोजनाओं को हरी झंडी दिखाना अखिलेश यादव की मजबूरी है। सत्ता में रहते हुए मायावती ने ऐसा नहीं किया था, जिसके चलते अखिलेश यादव को यमुना एक्सप्रेस वे का उदघाटन करने का मौका मिल गया था। इसलिए वह आधी अधूरी परियोजनाओं का उदघाटन और शिलान्यास करते हुए वह यूपी की सत्ता पर फिर से काबिज होने का भरोसा कर रहे हैं।