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‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसी कोई व्यवस्था नहीं… ऑनलाइन धोखाधड़ी पर CM योगी ने जनता को किया अलर्ट

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ‘योगी की पाती’ नाम से जनता को पत्र लिखकर साइबर अपराधों से सतर्क रहने की अपील की है। उन्होंने ‘डिजिटल अरेस्ट’ को पूरी तरह फर्जी बताया है।

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लखनऊ

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Anuj Singh

Jan 05, 2026

CM Yogi, PC- IANS

CM Yogi Adityanath on Digital Arrest: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश की जनता के नाम एक विशेष पत्र जारी किया है। इस पत्र का नाम ‘योगी की पाती’ रखा गया है। इसमें मुख्यमंत्री ने लोगों को बढ़ते साइबर अपराधों, खासकर ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसी ठगी से सतर्क रहने की अपील की है। सीएम योगी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर यह पत्र साझा किया और कहा कि तकनीक ने जीवन को आसान बनाया है, लेकिन इसके साथ साइबर ठगों का खतरा भी कई गुना बढ़ गया है।

क्या है ‘डिजिटल अरेस्ट’ की ठगी?

सीएम योगी ने स्पष्ट शब्दों में बताया कि साइबर ठग खुद को पुलिस अधिकारी, कोर्ट या सरकारी अफसर बताकर लोगों को डराते हैं। वे ‘डिजिटल अरेस्ट’ का बहाना बनाकर वीडियो कॉल पर घंटों बंधक बनाए रखते हैं और पैसे मांगते हैं। ठग कहते हैं कि आपका नाम किसी केस में आ गया है या पार्सल में ड्रग्स मिले हैं। डरकर लोग लाखों रुपये ट्रांसफर कर देते हैं। सीएम ने जोर देकर कहा कि भारत के किसी भी कानून में ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसी कोई व्यवस्था नहीं है। यह पूरी तरह फर्जी और गलत है।

सरकार क्या कर रही है?

योगी सरकार साइबर क्राइम रोकने के लिए गंभीर कदम उठा रही है। पहले 2017 से पहले राज्य में सिर्फ दो साइबर थाने थे, लेकिन अब सभी 75 जिलों में साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन और हेल्पडेस्क काम कर रहे हैं। ठगों पर सख्त कार्रवाई हो रही है। सीएम ने कहा कि आपकी सरकार इस चुनौती से निपटने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

कैसे बचें ठगी से?

सीएम योगी ने प्रदेशवासियों को कुछ आसान टिप्स दिए। किसी अंजान नंबर से आए कॉल पर व्यक्तिगत जानकारी जैसे बैंक डिटेल, OTP या आधार नंबर कभी न शेयर करें। फोटो या लोकेशन सोशल मीडिया पर सावधानी से डालें। अगर कोई खुद को अधिकारी बताकर डराए या पैसे मांगे, तो तुरंत विश्वास न करें। सबसे महत्वपूर्ण, अगर ठगी हो जाए तो फौरन हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें। जितनी जल्दी शिकायत करेंगे, उतनी ही ज्यादा संभावना है कि पैसे वापस मिल जाएं।