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अखिलेश-मायावती के बाद सीएम योगी भी नहीं कर पाए यह, बदलना पड़ गया अपना ही फैसला, आई बड़ी खबर

पूर्व राज्यपाल राम नाईक ने उत्तर प्रदेश लोक सेवा अधिनियम 1994 की धारा 13 के अधीन शक्ति का प्रयोग करते हुए इसमें संशोधन किए थे।

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लखनऊ

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Abhishek Gupta

Nov 01, 2019

CM yogi

CM yogi

लखनऊ। आखिरकार योगी सरकार की 17 अन्य पिछड़ी जातियों (OBC) को अनुसूचित जाति (SC)में शामिल करने की कोशिश नाकाम रही और उन्हें अपना फैसला वापस लेना पड़ गया है। हाईकोर्ट ने भाजपा सरकार के फैसले पर ऐतराज जताते हुए इसे गलत ठहराया। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा था कि राज्य सरकारों को ऐसे आदेश जारी करने का अधिकार नहीं है। केवल संसद में कानून बनाकर केंद्र सरकार ही ऐसे आदेश जारी कर सकती है। कोर्ट ने यह ऐतराज इसी वर्ष सितंबर माह में जताया था।

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राज्यपाल ने किया था संशोधन-

यूपी सरकार ने जून पर 17 अन्य पिछड़ी जातियों (OBC) को अनुसूचित जाति (SC) में शामिल करने का फैसला लिया था। पूर्व राज्यपाल राम नाईक ने उत्तर प्रदेश लोक सेवा अधिनियम 1994 की धारा 13 के अधीन शक्ति का प्रयोग करते हुए इसमें संशोधन किए थे। जिसके बाद सूबे के सभी जिलाधिकारियों को आदेश दिया गया है कि वे इन सभी जातियों के परिवारों को एससी के प्रमाण पत्र दें। लेकिन अब ऐसा नहीं हो पाएगा।

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दायर याचिका पर कोर्ट ने सुनाया था फैसला-
सितंबर माह में सामाजिक कार्यकर्ता गोरख प्रसाद ने कोर्ट में याचिका दाखिल की थी जिसमें उन्होंने सरकार के इस शासनादेश को अवैध ठहराया था। मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस सुधीर अग्रवाल और जस्टिस राजीव मिश्र की डिवीजन बेंच ने पहली दृष्टि में ही माना कि सरकार का यह फैसला गलत है। कोर्ट ने कहा का राज्य सरकार को इस तरह का फैसला लेने का अधिकार नहीं है। केवल संसद में ही ऐसे बदलाव किए जा सकते हैं।

इन जातियों को एससी में होना था शामिल-
जिन 17 पिछड़ी जातियों को एससी में शामिल किया जाना था, उनमें निषाद, बिंद, मल्लाह, केवट, धीवर, राजभर, कहार, बाथम, कश्यप, भर, मछुआरा, प्रजापति, कुम्हार, धीमर, मांझी, तुरहा, गौड़ इत्यादि हैं। इससे पूर्व सपा व बसपा की सरकारों ने भी उक्त जातियों को एससी में शामिल करने की कोशिश की थी, लेकिन इसमें वे कामयाब नहीं हो पाए थे।