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लखनऊ

सीएम योगी का “ऑपरेशन क्लीन”… भ्रष्टाचार में लिप्त 15 इंजीनियरों के खिलाफ मुकदमा दर्ज, 6 एसडीएम पर होगी कार्रवाई

लोकसभा चुनाव के बाद सीएम योगी आदित्यनाथ काफी फायर हैं। हर दिन विभागों की मीटिंग भ्रष्ट अधिकारियों, कर्मचारियों पर सीधे एक्शन हो रहा है।

लखनऊJun 28, 2024 / 12:29 am

anoop shukla

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की भ्रष्टाचार के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस नीति के तहत विजिलेंस ने सिंचाई विभाग और जल निगम के 14 पूर्व और एक वर्तमान अभियंता पर मुकदमा दर्ज किया है। विजिलेंस के लखनऊ सेक्टर ने पिछले 24 घंटे में चार मुकदमे दर्ज किए हैं, जिसमें से एक मुकदमा सिंचाई विभाग के 12 सेवानिवृत्त अधीक्षण एवं मुख्य अभियंताओं पर दर्ज किया गया है। वहीं तीन मुकदमे जल निगम के अभियंताओं के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति से जुड़े हैं।
बता दें कि उप्र वाटर सेक्टर रिस्ट्रक्चरिंग परियोजना के दूसरे चरण के क्रियान्वयन में सरकारी कार्य के लिए शासन द्वारा आवंटित राशि से अधिक का अनुबंध करने की शिकायत पर शासन ने 2019 में विजिलेंस को जांच का आदेश दिया था। आरोप सही पाए जाने पर विजिलेंस ने शासन से इंजीनियरों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की अनुमति मांगी थी। 18 अप्रैल 2024 को शासन की अनुमति मिलने पर विजिलेंस, लखनऊ सेक्टर के निरीक्षक रिजवान अब्बास ने 12 सेवानिवृत्त इंजीनियरों पर बुधवार को मुकदमा दर्ज कराया है। इन पर आरोप है कि उन्होंने 2013 में परियोजना से संबंधित शासनादेश के निर्देशों का पालन नहीं किया, जिससे शासन को करोड़ों की क्षति हुई।
अलीगढ़ में सिंचाई विभाग के तत्कालीन अधीक्षण अभियंता बलराम सिंह यादव, रामगंगा सिंचाई विभाग कानपुर के तत्कालीन मुख्य अभियंता कुणाल कुलश्रेष्ठ, अवध राज यादव, अनिल कुमार, रणवीर सिंह, इटावा सिंचाई कार्यमंडल के तत्कालीन अधीक्षण अभियंता कुलजीत सिंह, कानपुर सिंचाई कार्यमंडल के तत्कालीन अधीक्षण अभियंता सुरेश चंद्र शर्मा, सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग के तत्कालीन मुख्य अभियंता (सज्जा एवं सामग्री प्रबंध) आदेश कुमार गोयल, शारदा सहायक सिंचाई कार्यमंडल लखनऊ के तत्कालीन अधीक्षण अभियंता शिवमंगल यादव, अधीक्षण अभियंता नीरज कुमार, ललितपुर सिंचाई कार्यमंडल के तत्कालीन अधीक्षण अभियंता महेंद्र कुमार निगम और झांसी के तत्कालीन मुख्य अभियंता बेतवा नवनीत कुमार।
विजिलेंस ने जल निगम के तीन अभियंताओं के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का मुकदमा दर्ज किया है। इनमें जल निगम के सेवानिवृत्त अधीक्षण अभियंता अजेय रस्तोगी, जल निगम की सीएंडडीएस (कंस्ट्रक्शन एंड डिजायन सर्विसेज) इकाई के तत्कालीन परियोजना प्रबंधक कृष्ण कुमार पटेल (सेवानिवृत्त) और कमलेश कुमार केशरी का नाम शामिल है।
प्रदेश में जमीनों की पैमाइश के काम में लापरवाही मिलने पर छह उप जिलाधिकारियों (एसडीएम) के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के आदेश दिए गए हैं। ये एसडीएम आगरा, गाजीपुर और सुल्तानपुर की तहसीलों में तैनात हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राजस्व संहिता की धारा-24 के तहत दायर होने वाले सीमांकन वादों (पैमाइश के मामलों) में त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। जमीन की पैमाइश समय से न होने पर अक्सर ही विवाद बढ़ जाते हैं, जोकि कानून-व्यवस्था के के लिहाज से भी परेशानी का सबब बनते हैं।
समीक्षा में सामने आया कि आगरा की फतेहाबाद, खैरगढ़ व बाह तहसील, गाजीपुर की सदर व सैदपुर और सुल्तानपुर की सदर तहसील में पैमाइश के मामलों का निस्तारण संतोषजनक नहीं है। पांच-पांच साल से मामले लटके हुए हैं। अभियान के तहत मामले निपटाने के निर्देश के बावजूद भी यह स्थिति बनी हुई है।
इसलिए राजस्व विभाग ने फतेहाबाद के एसडीएम जेपी पांडेय, खैरगढ़ के अरुण कुमार यादव, बाह के रतन कुमार वर्मा, सैदपुर के पुष्पेंद्र पटेल और गाजीपुर सदर के एसडीएम चंद्रशेखर के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। सुल्तानपुर सदर में उस एसडीएम के खिलाफ कार्रवाई होगी, जिसके कार्यकाल में मामले नहीं निपटे। उस एसडीएम के नाम की जानकारी की जा रही है।

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