उपाध्यक्ष के तौर पर इमरान मसूद के अलावा राजेश मिश्र, भगवती प्रसाद और राजाराम पाल को जिम्मेदारी दी गई है। देखा जाए तो इन सभी चेहरों का प्रभाव कुछ ही सीटों पर सीमित है। राजेश मिश्र बनारस का चेहरा हैं, लेकिन प्रदेश में उनकी माकूल पहचान नहीं है। वहीं भगवती चैधरी को लेकर भी यही हाल है। दलितों के बीच उनकी पैठ सवालों के घेरे में रही है। यह बात दीगर है कि बीते कुछ समय में उन्होंने भीम ज्योति यात्रा निकालकर दलितों को अपने पाले में रखने की कोशिश की है। यह कितना सफल होगा यह तो समय बताएगा लेकिन उनका भी प्रभाव क्षेत्र ज्यादा नहीं है।