
Symbolic Pics of Congress Flag
लखनऊ. देश भर में जिस तरह से चुनावों की घोषणा हुई है. इससे इस बार चुनाव पिछली बार की अपेक्षा इस बार जल्दी ही समाप्त हो जाएंगे. वहीं सभी राज्यों में भाग लेने वाली राष्ट्रीय पार्टी कांग्रेस इस बार बिना किसी मुख्यमंत्री चेहरे की घोषणा के ही चुनावों में जाने को तैयार है. इसमें प्रमुख तौर पर उत्तर प्रदेश है. जहां लड़की हूँ लड़ सकती हूँ पर कांग्रेस कम कर रही है. ऐसे में उम्मीद है कि कांग्रेस किसी महिला चेहरे को ही सामने लाएगी. जबकि अभी जो नाम है क्या उस पर सभी सहमत होंगे?
5 राज्यों के लिए बनाई गई रणनीति
पार्टी ने पंजाब में मुख्यमंत्री का मौजूदा चेहरा होने के बावजूद यह फैसला लिया है। कांग्रेस के सूत्रों का कहना है कि चुनाव के नतीजे आने के बाद ही मुख्यमंत्री चेहरे पर फैसला होगा और कांग्रेस विधायक दल आलाकमान की सहमति से नया नेता चुनेगा। पार्टी कुछ मौकों को छोड़कर आमतौर पर मुख्यमंत्री का चेहरा पेश नहीं करती है।
उत्तराखंड और पंजाब में नेताओं की मांग चेहरा पहले
पंजाब और उत्तराखंड में हालांकि कांग्रेस के नेता चाहते हैं कि मुख्यमंत्री चहरे सामने लाकर चुनाव लड़ा जाए। उत्तराखंड में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत और पंजाब कांग्रेस प्रमुख नवजोत सिंह सिद्धू के समर्थक चाहते हैं कि उनके नेता को मुख्यमंत्री चेहरे के रूप में पेश किया जाए। लेकिन पार्टी का कहना है कि वह चुनाव से पहले अन्य गुटों को अलग-थलग करने का जोखिम नहीं उठाएगी।
कांग्रेस को पंजाब में सत्ता बनाए रखने और उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर में भाजपा के खिलाफ एक विश्वसनीय प्रदर्शन के साथ आने की बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है।
यूपी में सीधी फाइट से बाहर कांग्रेस
उत्तर प्रदेश को छोड़कर तीन राज्यों में पार्टी का सीधा मुकाबला भाजपा से है, जबकि पंजाब में उसका सामना अकाली दल-बसपा गठबंधन और आम आदमी पार्टी से है। हालांकि यह उत्तर प्रदेश में मुख्य चुनौती नहीं है, लेकिन कांग्रेस इस मुकाबले में बसपा से आगे रहना चाहती है।
गोवा में बड़ा संकट
कांग्रेस गोवा में फिलहाल संकट का सामना कर रही है, क्योंकि लगभग सभी विधायकों ने पार्टी छोड़ दी है। पार्टी ने अपने तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों - दिगंबर कामत, प्रताप सिंह राणे और फ्रांसिस्को सरदिन्हा में से किसी को भी मुख्यमंत्री चेहरे के रूप में पेश करने का फैसला नहीं किया है। हालांकि ये शीर्ष पद के दावेदारों में शामिल हैं।
मणिपुर में पलायन से परेशानी बढ़ी
मणिपुर में भी कांग्रेस को चुनाव से पहले पलायन का सामना करना पड़ा है। वहां पार्टी अगर सत्ता में आती है, तो पूर्व मुख्यमंत्री ओकराम इबोबी सिंह को एक और मौका दिया जा सकता है, लेकिन किसी को मुख्यमंत्री चेहरा के तौरपर पेश नहीं किया जाएगा।
पार्टी पूर्वोत्तर राज्य पर विशेष ध्यान दे रही है और जयराम रमेश को वरिष्ठ पर्यवेक्षक नियुक्त किया है। मणिपुर में पिछले चुनावों में सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरने के बावजूद कांग्रेस सरकार नहीं बना सकी थी।
प्रियंका गाँधी होंगी यूपी में सीएम?
कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा, जो यूपी में पार्टी की शीर्ष पसंद हैं. लेकिन इसकी संभावना नहीं है कि किसी को सीएम के रूप में पेश किया जा सकता है। हालांकि पार्टी के पास अन्य चुनाव वाले राज्यों की तुलना में यूपी में बहुत कम मौका है। यदि कांग्रेस में प्रियंका गाँधी को ही विधायक दल चुनता है तो क्या वो खुद मुख्यमंत्री बनना स्वीकार करेंगी? क्या उनके नाम पर सहमती बनेगी ये एक बड़ा सवाल है. जिसका जवाब अभी तक नहीं मिला है.
Updated on:
09 Jan 2022 10:26 pm
Published on:
09 Jan 2022 10:03 pm
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