
चौक में सर्राफ व्यापारी की आत्महत्या, सराफा बाजार में शोक और चिंता का माहौल (फोटो सोर्स : WhatsApp News Group)
Suicide in Lucknow: चौक इलाके से एक दुखद और झकझोर देने वाली घटना सामने आई है, जहां सर्राफा व्यापार से जुड़े एक प्रतिष्ठित कारोबारी ने आत्महत्या कर ली। मृतक की पहचान चौपटिया निवासी मनोज अग्रवाल के रूप में हुई है, जो वर्षों से चांदी के कारोबार से जुड़े थे। उनकी दुकान चौक सर्राफा मार्केट के कुंदन मार्केट में स्थित थी। इस घटना के बाद न सिर्फ उनके परिवार में, बल्कि पूरे सराफा बाजार में शोक और चिंता का माहौल है।
जानकारी के अनुसार, गुरुवार को मनोज अग्रवाल रोज़ की तरह अपनी दुकान पर पहुंचे थे। मकर संक्रांति के अवसर पर चौक क्षेत्र में आयोजित भंडारे में भी उन्होंने भाग लिया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, दिनभर उनका व्यवहार सामान्य था और उन्होंने किसी तरह की परेशानी जाहिर नहीं की। शाम को दुकान बंद करने के बाद वे घर लौट आए। रात के समय जब परिजन उन्हें देखने आंगन की ओर गए, तो वे ग्रिल के सहारे फंदे से लटके मिले। यह दृश्य देखते ही परिवार में कोहराम मच गया। शोर सुनकर आसपास के लोग भी मौके पर पहुंच गए। तुरंत पुलिस को सूचना दी गई, जिसके बाद पुलिस टीम घटनास्थल पर पहुंची।
पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। प्रारंभिक जांच में किसी प्रकार की बाहरी हस्तक्षेप या संघर्ष के संकेत नहीं मिले हैं। पुलिस का कहना है कि सभी पहलुओं की गहनता से जांच की जा रही है। परिजनों के बयान के आधार पर पुलिस को यह जानकारी मिली है कि मनोज अग्रवाल बीते कुछ समय से मानसिक तनाव में थे। बताया गया कि सोने-चांदी के दामों में लगातार हो रही तेज़ बढ़ोतरी और बाजार की अस्थिरता के कारण वे गहरी चिंता में रहने लगे थे। यही मानसिक दबाव धीरे-धीरे डिप्रेशन में बदल गया।
चौक सर्राफा एसोसिएशन के महामंत्री विनोद महेश्वरी ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में सराफा कारोबार अभूतपूर्व अस्थिरता के दौर से गुजर रहा है। सोने और चांदी के भाव में रोज़ाना हो रहे उतार-चढ़ाव से छोटे और मध्यम व्यापारी सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं। उनका कहना है कि वायदा कारोबार (फ्यूचर ट्रेडिंग) के कारण बाजार में कृत्रिम उतार-चढ़ाव बढ़ गया है, जिसका सीधा असर पारंपरिक सराफा व्यापार पर पड़ रहा है। कारीगरों और छोटे व्यापारियों को माल खरीदने और बेचने में भारी जोखिम उठाना पड़ रहा है, जिससे मानसिक दबाव लगातार बढ़ रहा है।
सर्राफा एसोसिएशन के अनुसार, यह समस्या केवल लखनऊ तक सीमित नहीं है। राजकोट, आगरा, कानपुर और लखनऊ जैसे प्रमुख सराफा केंद्रों में भी कारीगर और व्यापारी गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। कई कारीगरों को काम कम मिलने लगा है, जबकि व्यापारियों के लिए पूंजी का प्रबंधन कठिन होता जा रहा है। व्यापारियों का कहना है कि जब दाम अचानक बढ़ते हैं तो ग्राहक खरीदारी टाल देते हैं, और जब दाम गिरते हैं तो पहले खरीदा गया स्टॉक घाटे का सौदा बन जाता है। इस दोहरे दबाव में व्यापारी मानसिक तनाव का शिकार हो रहे हैं।
चौक सर्राफा एसोसिएशन ने सरकार से मांग की है कि सोने और चांदी को वायदा कारोबार से मुक्त किया जाए। उनका तर्क है कि इससे बाजार में स्थिरता आएगी और छोटे व्यापारियों को राहत मिलेगी। एसोसिएशन का कहना है कि सराफा कारोबार पारंपरिक रूप से विश्वास और स्थिरता पर टिका रहा है, लेकिन मौजूदा व्यवस्था ने इसे अत्यधिक जोखिम भरा बना दिया है।
यह घटना केवल एक व्यक्तिगत त्रासदी नहीं है, बल्कि यह व्यापारियों और स्वरोजगार से जुड़े लोगों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है। विशेषज्ञों का कहना है कि आर्थिक तनाव, अनिश्चितता और सामाजिक दबाव कई बार लोगों को अंदर ही अंदर तोड़ देता है। मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, तनाव या अवसाद को कमजोरी समझ कर नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है। समय रहते संवाद, परिवार का सहयोग और पेशेवर मदद ऐसे हालात में जीवन रक्षक साबित हो सकती है।
मनोज अग्रवाल के निधन से उनका परिवार गहरे सदमे में है। पड़ोसी, रिश्तेदार और सर्राफा बाजार से जुड़े लोग लगातार उनके घर पहुंचकर संवेदना व्यक्त कर रहे हैं। चौक सर्राफा मार्केट में कई दुकानदारों ने कुछ समय के लिए अपनी दुकानें बंद रखकर शोक जताया। व्यापारियों का कहना है कि मनोज अग्रवाल एक शांत, मेहनती और ईमानदार कारोबारी थे। उनकी असमय मौत ने सभी को झकझोर दिया है।
Updated on:
16 Jan 2026 01:51 pm
Published on:
16 Jan 2026 01:50 pm
