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बड़े घोटालेबाजों को बचाने के लिए पिकअप भवन में लगवाई गई थी आग, सच हुआ सीएम योगी आदित्यनाथ का शक, हुआ बड़ा एक्शन

- पिकअप भवन आग मामला में साजिश का खुलासा - जांच कमेटी ने शासन को सौंपी अपनी रिपोर्ट - आग में जली लोन से संबंधित तमाम फाइलें - फाइलों के ऑडिट में बड़े घोटाले खुलने की थी आशंका - अज्ञात लोगों के खिलाफ दर्ज कराया गया मामला

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लखनऊ

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Nitin Srivastva

Jul 07, 2019

Conspiracy behind Fire in pickup bhawan building lucknow

बड़े घोटालेबाजों को बचाने के लिए पिकअप भवन में लगवाई गई थी आग, सच हुआ सीएम योगी आदित्यनाथ का शक, हुआ बड़ा एक्शन

लखनऊ. लखनऊ के पिकप भवन (Pickup Bhawan) में आग लगने के मामले में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) की शंका अब सच साबित हो रही है। दरअसल पिकअप भवन आग मामला में बड़ा खुलासा हुआ है। आग की जांच कर रही कमेटी की रिपोर्ट के मुताबिक पिकअप भवन में साजिश के तहत लगवाई गई थी। आग में लोन से संबंधित वह फाइलें जलकर राख हुईं, जिनका न तो ऑडिट हुआ था और ही डिजिटलाइजेशन। फाइलों का ऑडिट होता तो कई बड़े अपसर इसके लपेटे में आते। जांच कमेटी ने इन तमाम तथ्यों को शामिल करते हुए अपनी रिपोर्ट में शासन को सौंप दी है। वहीं अपर मुख्य सचिव गृह अवनीश अवस्थी के निर्देश पर डीजीएम रिचा भार्गव ने लखनऊ के विभूतिखंड थाने में अज्ञात आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करा दी है।


आग कर रही साजिश की तरफ इशारा

पिकअप भवन में यह आग प्रथम तल पर स्थित प्रदेशीय इंडस्ट्रियल एवं इंवेस्टमेंट कार्पोरेशन उत्तर प्रदेश लिमिटेड (पिकप) में लगी थी। जहां से से उद्यमियों को उद्योग की स्थापना के लिए ऋण दिया जाता रहा है। इंटेलीजेंस एडीजी एसबी शिरोडकर की जांच रिपोर्ट के मुताबिक पिकप भवन में आग लगाए जाने की साजिश प्रतीत हो रही है। विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के बयान में विरोधाभास और आग की जानकारी देने में हुई देरी भी किसी साजिश की तरफ इशारा कर रही है। आग तीन जुलाई को शाम सवा सात बजे लगी, जबकि विभाग ने इसकी सूचना पौने आठ बजे दी।


जली फाइलों का ऑडिट और डिजिटलाइजेशन नहीं

वहीं रिपोट्र के मुताबिक आग में जो फाइलें जलकर खाक हुईं, इनका डिजिटलाइजेशन नहीं हुआ था। साथ ही इन फाइलों का ऑडिट किया जाना प्रस्तावित था। सूत्रों की मानें तो फाइलों का ऑडिट होता तो कई बड़े अधिकारी इसकी जद में आते और एक बहुत बड़े घोटाले पर से पर्दा उठ सकता था। पिकप के घोटालों पर पर्दा पड़ा रहे, इसीलिए यह आग लगाई गई है। इसके अलावा जांच करने वाले अधिकारियों को पिकअप भवन में शार्ट सर्किट के भी कोई सुबूत नहीं मिले हैं। क्योंकि अगर शार्ट सर्किट से आग लगी होती तो पैनल डिस्टर्ब होता, लेकिन ऐसा नहीं था। बिल्डिंग के एयर कंडीशन या ऐसी में भी शार्ट सर्किट के सुबूत नहीं मिले हैं।


साजिशन लगवाई गई आग

पिकअप भवन में लगी आग में उद्यमियों को लोन देने से जुड़ी एक भी फाइल नहीं बची। जांच रिपोर्ट में भी इस बात की जिक्र है कि आग का असर उन कमरों तक ज्यादा था जहां पर लोन की सभी फाइलें रखीं थी। तीन कमरों में रखी लोन से संबंधित एक भी फाइल आग से नहीं बची है। जांच रिपोर्ट में पिकअप भवन के अलग-अलग कर्मचारियों के दर्ज बयान में भी काफी विरोधाभास मिला है। जो अधिकारी जांच कमेटी के सामने नहीं पेश हुए, उनका बयान फोन पर रिकॉर्ड किया गया है। जांच रिपोर्ट में कई फोटो भी संलग्न हैं, जिससे साजिशन लगाई गई आग की शंका को मजबूती मिल रही है।


अज्ञात के खिलाफ एफआईआर

पिकअप भवन अग्निकांड के पीछे साजिश की आशंका जताते हुए विभूतिखंड थाने में केस दर्ज कराया गया है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक पिकअप भवन की डीजीएम एचआरडी एंड लीगल रिचा भार्गव की तरफ से अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ केस दर्ज कर जांच की जा रही है। अग्निकांड में सरकारी संपति को काफी नुकसान पहुंचा है। कई महत्वपूर्ण फाइलें जल गई हैं। फिलहाल पुलिस पिकअप भवन के अधिकारियों और कर्मचारियों के बयान लेने की तैयारी कर रही है। किस विभाग की कौन सी फाइलें और रिकार्ड जले हैं, यह जानकारी भी ली जा रही है। फाइलें और रिकार्ड जलने से किसे फायदा हो रहा था, इसकी भी जांच की जा रही है।