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लखनऊ. उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने बिजली की दरों में बढ़ोतरी (Electricity Rates) कर इसे और महंगा कर दिया। महंगी बिजली बिल के झटके से लोग अभी उभरे भी नहीं थे कि इसके साथ-साथ उन्हें एक और झटका लगा है। पांच किलोवॉट और उससे ज्यादा का कनेक्शन लेने वाले 15 लाख से ज्यादा उपभोक्ताओं को बढ़े बिजली बिल के साथ-साथ सिक्यॉरिटी मनी भी डिपॉजिट करनी पड़ सकती है। सिक्यॉरिटी मनी 45 दिन के अंदर जमा करनी होगी। सिक्यॉरिटी मनी न जमा करने की स्थिति में बिजली विभाग डिसकनेक्शन की कार्रवाई कर सकता है।
बिजली बिल का अतिरिक्त नोटिस आने से उपभोक्ताओं में हड़कंप है। नोटिस पर पावर कॉर्पोरेशन (Power Corporation) का कहना है कि कॉस्ट डेटा बुक में नए प्रावधानों के बाद ऐसा किया जा रहा है। राज्य विद्युत नियामक आयोग द्वारा जारी कॉस्ट डेटा बुक में सिक्यॉरिटी मनी का प्रवाधान है।
इस तरह होगी सिक्यॉरिटी मनी की कैल्कुलेशन
पांच किलोवॉट से ऊपर का बिजली कनेक्शन लेने वाले उपभोक्ताओं से सिक्यॉरिटी मनी लेने के लिए नया फॉर्मूला तैयार किया जा रहा है। उपभोक्ताओं को एक साल का जो भी औसत बिल है, उसमें से 45 दिनों का औसत बिल निकाला जा रहा। इसके बाद उपभोक्ता ने पहले जो सिक्यॉरिटी मनी जमा की है, उसमें से 45 दिनों के औसत का बिल घटा दिया जा रहा।
अगर एक महीने का बिजली बिल 5,000 रुपये है, तो साल का बिजली बिल 60, 000 रुपये बनेगा। इस लिहाज से 45 दिन का बिल 7,500 रुपये बनेगा। पहले क जमा सिक्यॉरीटू मनी अगर 500 रुपये है, तो उस लिहाज से आपको देने होंगे 7,000 रुपये।
कॉस्ट डेटा कमेटी के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि जब हर महीने बिजली विभाग बिजली बिल भेजने का दावा करता है, तो 45 दिन की सिक्यॉरिटी मनी डिपॉजिट करने की क्या जरूरत। उन्होंने कहा कि कॉस्ट डेटा बुक में बदलाव के लिए नियामक आयोग में जल्द प्रस्ताव दिया जाएगा।
Published on:
07 Sept 2019 12:26 pm
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