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धिक्कार है इन बेटों पर, बुजुर्ग पेंशनरों का सहारा बन रही हैं बेटियां

धिक्कार है इन बेटों पर, बुजुर्ग पेंशनरों का सहारा बन रही हैं बेटियां

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लखनऊ

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Ruchi Sharma

Nov 03, 2017

chhindwara

old man

लखनऊ. पेड़ों, पत्थरों से लेकर जानवरों तक को पूजने वाला इंसान आज अपने मां-बाप को ही संभाल नहीं पाता। उन्हें बोझ मानने लगता है। मां-बाप अपने बेटों के पालन पोषण और शिक्षा के लिये अपने अरमानों का गला घोंट अपना तन मन और धन लगा देते हैं, परन्तु यदि बेटा अौर बहू उन्हें बोझ समझ उनकी उपेक्षा करने लगते हैं तो बुढ़ापे में अच्छे दिनों का सपना टूट जाने पर उनका थोड़ा बहुत बचा शेष जीवन दुःख और निराशा से भर जाता है। यह दर्द उन पेंशनरों का है जिनके अाखिरी समय में बेटों के पास समय नहीं है। दो दिन के आंकड़ों के मुताबिक कलेक्ट्रेट ट्रेजरी की हेल्पलाइन पर 90 प्रतिशत फोन बेटियों के आ रहे हैं। अपने बुजुर्ग मां-बाप को पेंशन दिलाने के लिए बेटियां आगे आई है।

विकास नगर के रहने वाले शुभाष शुक्ला के मुताबिक उनका एक बेटा है जिसे पढ़ाने के लिए मां-बाप ने अपना घर बेचकर उसे विदेश भेजा था। उसकी पढ़ाई के खर्च के लिए बुजुर्ग मां-बाप ने कठिन तस्पया की पर आज उसी बेटे को मां-बाप को देखने के लिए भी समय नहीं है। वहीं जीवित होने का प्रमाण पत्र देने की बारी आई तो बेटी ने ट्रेजरी की हेल्पलाइन को फोन किया कि अपने बुजुर्ग मां-बाप की दशा बताते हुए कहा कि मां- बाप चल नहीं पा रहे है।


वहीं इसकी जानकारी मुख्य कोषाधिकारी संजय सिंह ने बताया कि जब वह मौके पर पहुंचे तो एक पुराने मकान में बुजुर्ग पेंशनर तखत पर लेटे हुए थे। बेटी उनकी सेवा कर रही थी। सत्यापन के दौरान जब उन्होंने पूछा कि क्या आपके बेटे नहीं हैं? तो आंखों के कोने से आंसू लुढ़क गए। बताया कि बेटे इसी शहर में अपना मकान खरीद कर रह रहे हैं। इन्दिरा की सुशीला, ठाकुरगंज के मो. इरफान खान के घर भी बेटियां मिलीं। इनके भी बेटे हैं लेकिन साथ नहीं रहते। संजय सिंह के मुताबिक हैरानी की बात है कि बेटे होते हुए भी ज्यादातर फोन बेटियों के आ रहे हैं।

पहली बार हुए वीडियो चैट से सत्यापन

एेसा पहली बार देखा गया है कि पेंशनर का सत्यापन के लिए वीडियो चैट किया गया। गुजरात के वडोदरा अपने भांजे से मिलने पहुंचे रामकुमार वहां गंभीर रूप से बीमार पड़ गए। जीवित होने का प्रमाणपत्र हासिल करने के लिए उनकी बेटी गुरुवार को लखीमपुर से लखनऊ आई। उसने व्हाट्सएप वीडियो कॉल से सीटीओ की बात अपने पिता से कराई। बात करने के साथ पेंशनर की फोटो का मिलान किया गया जिसके बाद प्रमाणपत्र जारी हुआ।