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Nikay Chunav 2023 : पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के भांजे की 18 साल पहले मौत, मतदाता सूची में आज भी दर्ज है नाम

Nikay Chunav 2023 : यूपी में निकाय चुनाव का पहला चरण शांतिपूर्वक संपन्न हो चुका है। इस दौरान बीएलओ की लापरवाही खुलकर सामने आई। मतदाता सूची में मृतकों के नाम मिले, जबकि जीवित लोग अपना नाम खोजते रहे।

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लखनऊ

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Vishnu Bajpai

May 05, 2023

Dead Names registered in voter list of Nikay Chunav 2023

Nikay Chunav 2023 : स्थानीय निकाय चुनाव से पहले मतदाता सूची के सत्यापन में घोर लापरवाही बरती गई है। इसकी बानगी आगरा में देखने को मिली। जहां 18 साल पहले मर चुके मतदाता का नाम सूची से नहीं हटाया गया। जबकि मतदान के दौरान देखा गया कि जीवित लोग सूची में अपना नाम खोजते रहे। ताजा मामला पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेई के भांजे अजय दीक्षित का है। उनके निधन को 18 साल हो चुके हैं, लेकिन अभी तक उनका नाम सूची से नहीं हटाया गया है।

ठीक से काम नहीं कर रहे बूथ लेवल अधिकारी
अजय दीक्षित की बहू और निवर्तमान राज्य महिला आयोग की सदस्य निर्मला दीक्षित ने बताया "पिछले दिनों बूथ लेवल अधिकारी ने मतदाता पर्ची उनके घर पहुंचाई। इसमें अटल बिहारी बाजपेई के बहन-बहनोई सहित तीन सदस्यों के नाम अंकित हैं। उन्होंने कहा कि 18 साल के बाद भी मतदाता सूची से नाम न हटना यह दर्शाता है कि बूथ लेवल अधिकारी ठीक से कार्य नहीं कर रहे हैं।" हालांकि इन सभी सदस्यों का नाम विधानसभा के मतदाता सूची से हट चुका है।

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प्रशासन के आंकड़ों की मानें तो 10 अप्रैल से लेकर 17 अप्रैल तक चले मतदाता पुनरीक्षण अभियान के दौरान जिले भर से 45000 आवेदन प्राप्त हुए। जिसमें जांच के बाद 23000 मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए। जबकि 20000 मतदाताओं के नाम जोड़ दिए गए। इस समय जिले में कुल 16.49 लाख मतदाता हैं। पिछले सप्ताह अभियान चलाकर मतदाताओं के घर में पर्ची पहुंचाई गई थी। मतदाता पर्ची घर में पहुंची देखकर जयपुर हाउस निवासी निर्मला दीक्षित चौक गई।

मतदाता सूची में अभी भी शामिल हैं इनके नाम
मतदाता सूची में अटल बिहारी बाजपेई की बहन कमला दीक्षित, बहनोई नंद गोपाल, भांजे अजय दीक्षित, दूसरे भांजे अनिल दिक्षित, और उनकी पत्नी लक्ष्मी दीक्षित का नाम अंकित था। निर्मला दीक्षित ने बताया कि उनके पति अजय दीक्षित आगरा विश्वविद्यालय में कर्मचारी थे। 15 साल तक नौकरी की, वर्ष 2005 में उनका निधन हुआ। 18 साल के बाद भी मतदाता सूची से उनका नाम नहीं हटाया गया है।

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कमला दीक्षित और नंद गोपाल दीक्षित की मृत्यु वर्ष 2015 में हुई थी। जबकि लक्ष्मी दीक्षित का निधन वर्ष 2008 और अनिल दीक्षित का निधन जनवरी 2021 में हुआ था। निर्मला दीक्षित ने बताया कि मतदाता पुनरीक्षण अभियान में किस तरीके से लापरवाही बरती गई है यह उसका जीता जागता सबूत है। स्थानीय निकाय की मतदाता सूची में आज भी इन सभी का नाम अंकित है।

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पुनरीक्षण अभियान में रस्म अदायगी
गुरुवार को हुए स्थानीय निकाय चुनाव के मतदान में आगरा में 40000 से अधिक मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग नहीं कर सके हैं जब यह लोग बूथों में पहुंचे तो उन्हें पता चला कि मतदाता सूची में इनका नाम अंकित नहीं है इसके चलते बड़ी संख्या में मतदाताओं ने विरोध भी दर्ज कराया लेकिन राज्य निर्वाचन आयोग की गाइड लाइन के अनुसार मतदाता सूची में नाम होने पर ही मताधिकार का प्रयोग किया जा सकता है।