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कैंसर मरीजों का दर्द बढ़ा रहा KGMU, असाध्य कार्ड के बावजूद होती है वसूली

कैंसर की दवाओं में मोटा कमीशन होने के कारण एक ही दवा कंपनी से दवा ली जा रही है, जिससे मरीजों को दवा मिलने में 20 से 25 दिन लग जाते हैं। इस तरह से केजीएमयू कैंसर मरीजों का दर्द कम करने के बजाय बढ़ा रहा है।

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Rohit Singh

Apr 22, 2016

kgmu lucknow

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लखनऊ।
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की ओर से असाध्य रोगियों के इलाज के लिए केजीएमयू को अलग से बजट दिया जाता है ताकि गरीबों का मुफ्त इलाज हो सके, लेकिन असाध्य कार्ड होने के बावजूद जांच सहित दवाओं का पैसा लिया जा रहा है। इसके आलावा कैंसर की दवाओं में मोटा कमीशन होने के कारण एक ही दवा कंपनी से दवा ली जा रही है, जिससे मरीजों को दवा मिलने में 20 से 25 दिन लग जाता है। इस तरह से केजीएमयू कैंसर मरीजों का दर्द कम होने के बजाय बढ़ा रहा है।


केस नंबर-1

फतेहपुर निवासी हरिकृष्ण बहादुर श्रीवास्तव (60) कैंसर से पीड़ित हैं। करीब 15 दिन पहले दवाई के लिए उनका पर्चा बना था, लेकिन इतने दिन बीत जाने के बाद अभी तक उनको दवाई नहीं मिल पाई है। जिससे उनका कैंसर बढ़ता जा रहा है। उनके भतीजे अंकित ने बताया कि दवाई का पर्चा बीती 9 अप्रैल को बना था, लेकिन अभी तक दवा नहीं मिल पायी। जिससे चाचा का कैंसर बढ़ता जा रहा है।

उसने आरोप लगाया कि मोटे कमीशन के चक्कर में डाक्टरों की ओर से एक ही दवा कंपनी से ये दवाइयां एलपी कराई जाती हैं। जिससे देरी होती है और कैंसर रोगियों को दर्द झेलना पड़ता है।

केस नंबर-2
बारांबकी निवासी अंकित शर्मा 2 वर्ष से कैंसर से ग्रसित है। उसका असाध्य कार्ड बना होने के बावजूद डाक्टरों ने ब्लड जांच के लिए 1350 रुपये वसूल लिए। जबकि बच्चे का पिता बहुत गरीब परिवार से है और फूल बेचकर अपनी रोजी-रोटी चलाता है। इस बारे में कैंसर बच्चों के लिए काम करने वाली संस्था ईश्वर चाइल्ड वेलफेयर एसोसिएशन की अध्यक्ष सपना उपाध्याय कहती हैं कि असाध्य कार्ड बना होने के बावजूद बच्चे के परिजनों से 1350 रुपये ले लिए गए। आखिर जिसके पास 10 रुपए नहीं है, वह भला इतने रुपये कहाँ से लाएगा।

केस नंबर-3
सुल्तानपुर जिले का निवासी हिमांशु यादव (8) कैंसर से पीड़ित है। बीते नवंबर में नाक से खून आने पर परिजन हिमांशु को केजीएमयू लेकर आये था। जहाँ पर परिजनों ने मरीज को पीडियाट्रिक ऑन्कोलॉजी विभाग में दिखाया था। मरीज को देखने के बाद विभाग की एक वरिष्ठ डॉक्टर ने मरीज को एक जांच कराने के लिए कहा। जिसके लिए उन्होंने 11 हजार रूपये जमा करने की बात कही। पैसा जमा करने में अक्षम मरीज का पिता बीते तीन महीने से जांच के लिए चक्कर लगा रहा है। डॉक्टरों का कहना है कि अगर जल्द से जल्द हिंमांशु की जांच नहीं हो पायी तो उसकी मौत हो सकती है। क्योंकि ये जांच बहुत महत्वपूर्ण है। पैसे न होने के कारण हिमांशु के पिता नरेंद्र यादव बीते तीन महीने से पीडियाट्रिक ऑन्कोलॉजी विभाग के चक्कर लगा रहे हैं। इसके बावजूद भी डॉक्टरों की ओर से कोई सुनवाई नहीं हो रही है।

दिल्ली में होगी जांच
नरेंद्र यादव ने बताया कि डॉक्टरों का कहना है कि कैंसर से सम्बंधित जांच के लिए सैंपल दिल्ली एम्स भेजा जाएगा। ये जांच यहाँ नहीं हो पाती। इसलिए जांच के लिए 11 हजार रुपये की मांग की जा रही है।

एक निजी सेंटर का ब्रोकर बैठा रहता है
सूत्रों के मुताबिक़ पीडियाट्रिक ऑन्कोलॉजी विभाग में ज्यादातर जाँचें प्राइवेट सेंटरों से कराई जाती हैं। इसमें विभाग के डॉक्टरों की मिलीभगत रहती है। निजी सेंटरों के दलाल विभाग के वरिष्ठ डॉक्टरों के केबिन में दिनभर बैठे रहते हैं।

बयान
डिप्टी एमएस डॉ. वेदप्रकाश ने बताया कि ऐसी कोई शिकायत अभी तक मुझे मिली नहीं है। दवाई लेट में आ रही है या असाध्य कार्ड के बावजूद अगर पैसा लिया जा रहा है तो मुझे लिखित शिकायत दें। दोषी व्यक्ति पर तुरंत कार्रवाई की जाएगी।

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