22 जनवरी 2026,

गुरुवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

लालजी टंडन की जिस किताब पर था विवाद उसका विमोचन आज करेंगे उप राष्ट्रपति

पुस्तक से नया विवाद- किताब को दस्तावेज मानकर लखनऊ का नाम बदलने का आरोप  

2 min read
Google source verification

लखनऊ

image

Anil Ankur

May 25, 2018

disputed book of Lalji Tandon will be released by vice president

disputed book of Lalji Tandon will be released by vice president

अनिल के. अंकुर
लखनऊ। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता पूर्व मंत्री व पूर्व सांसद लालजी टंडन की नई किताब से नया विवाद पैदा होने की आशंका बढ़ गई है। उनकी इस किताब का विमोचन उप राष्ट्रपति वैंकया नायडू करेंगे। इस मौके पर सीएम योगी आदित्यनाथ और दोनोंं डिप्टी सीएम भी मौजूद रहेंगे। ये सब तब है जब किताब पर विवाद है। टंडन ने अपनी किताब में लखनऊ का नाम लखनपुरी होने का दावा किया है और इस बात के साक्ष्य पेश किए हैं कि लखनपुरी राम के भाई लक्ष्मण द्वारा बसाई गई थी।

टंडन की किताब का विमोचन कल शनिवार को अटल बिहारी वाजपेयी सांइटफिक कम्युनिटीसेंटर में होगा। इसकी तैयारी व्यापक रूप से कर ली गई हैं।

लालजी टंडन ने नवाबों के खत्म होते दौर को अनुभव किया है। अंग्रेजों की हुकूमत देखी है। भारत आजाद होते देखा और उसके बाद लखनऊ का यह हाल होते देखा तो उनसे रहा नहीं गया। उन्होंने अनकही पुस्तक लिख डाली। किताब में बहुत कुछ ऐसा है जो विवादों से घिरा हुआ है।

लालजी टंडन की इस किताब को लेकर तमाम संगठनों ने किताब के वितरण पर रोक लगाने की मांग की है। उनका कहना है कि अगर यह किताब जनता के हाथ पहुंची तो लोगों के बीच में वैमन्स्यता पैदा होगी। आपसी भाईचारा खत्म हो सकता है। विरोधियों का दावा है कि कई शाताब्दियों से यहां का नाम लखनऊ है और यह नाम अब विश्व विख्यात हो चुका है। इस नाम के मुहावरे तक प्रचलित हैं जैसे लखनवी तहजीब, लखनऊआ अंदाज आदि आदि। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि इस किताब के प्रकाशन में रोक लगाई जाए। भाजपा नेता इस किताब के सहारे लखनऊ का नाम बदलवाना चाहते हैं।

क्या है किताब में-
लालजी टंडन की किताब का नाम है अनकहा लखनऊ। इस अनकहे लखनऊ में उन्होंने सब कुछ कह डाला है। पुरातन इतिहास से लेकर मुगलकाल और आज तक के दौर गाथा इस किताब में पिरोई गई है। किताब में टंडन कहते हैं-
लखनऊ एक शहर और बाजार नहीं
ये गुम्बद-ए-मीनार नहीं
इसकी गलियों में मोहब्बत के फूल खिलते हैं
इसके कूचों में फरिश्तों के पते मिलते हैं
उन्होंंने अपनी किताब में यह साबित करने का प्रयास किया है कि लखनऊ में नवाबों का साम्राज्य केवल 100 साल का है जबकि लक्ष्मण ने इसे चार हजार साल पहले बसाया था और इसका नाम लक्ष्मणपुरी था। यहीं से विवाद शुरू होता है कि कहीं भाजपा की यह एक चाल हो कि किताब को तथ्य मानकर लखनऊ का नाम बदल डाले।

इस किताब में लखनऊ के खान पान, यहां की पारम्परिक दुकानों, रहन सहन, गलियों और मोहल्लों के नामों के राज खोलने की कोशिश की गई है। वे कहते हैं कि आदि काल से लखनऊ का खाना मश्हूरा था। यहां कब शुरू हुई कबूतरबाजी- क्यों कबूतरों को लड़वाया जाता था। ऐसे तमाम राज उन्होंने अपनी किताब में खोले हैं। पर किताब में लक्ष्मण के बसाए जाने पर भी जोर दिया गया है।

क्या कहते हैं टंडन- हमारी किताब तथ्यों पर आधारित है। परम्पराएं संग्रहालय में रखने की चीज नहीं होतीं। वह तो प्रवाहमान जीवंत धाराएं होती हैं। अब राम के जन्म होने का प्रमाण मिल गया है। आज के लखनऊ को राम ने अपने भाई लक्ष्मण को सौंपा था। लक्ष्मण ने यह शहर बसाया था। इसके प्रमाण मिलते हैं। हालिया इतिहासकारों ने इतिहास के साथ खिलवाड़ किया है। यहां के पारम्परिक खानपान को देखिए और उसे अयोध्या से जोडि़ए। एक सा लगेगा। तब ही इसका नाम लक्ष्मणपुरी रखा गया था। नवाबों के गुणगान करने वाले इतिहासकारों की देन है।