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राम ने रावण को मारे थे 31 बाण, लंकेश का विशाल धड़ गिरते ही हिलने लगी थी धरती, जानिये कई अनसुने राज

आज राजधानी लखनऊ सहित प्रदेश भर में दशहरा मनाया जा रहा है। आज के दिन त्रेता युग में श्रीराम ने रावण का वध किया था।

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लखनऊ

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Akansha Singh

Oct 08, 2019

राम ने रावण को मारे थे 31 बाण, लंके का विशाल धड़ गिरते ही हिलने लगी थी धरती, जानिये कई अनसुने राज

राम ने रावण को मारे थे 31 बाण, लंके का विशाल धड़ गिरते ही हिलने लगी थी धरती, जानिये कई अनसुने राज

लखनऊ. आज राजधानी लखनऊ सहित प्रदेश भर में दशहरा मनाया जा रहा है। आज के दिन त्रेता युग में श्रीराम ने रावण का वध किया था। श्रीरामचरित मानस के अनुसार श्रीराम ने 31 बाण एक साथ रावण को मारे थे। इन 31 बाणों में से 1 बाण रावण की नाभि पर लगा, बाकी 30 बाणों से उसके 10 सिर और 20 हाथ धड़ से अलग हो गए। जैसे ही रावण का विशाल धड़ पृथ्वी पर गिरा तो पृथ्वी हिलने लगी थी। जानिए रावण के वध के बाद की खास बातें...

तरकश में वापस आ गए थे सारे बाण

श्रीराम के 31 बाणों से रावण के सिर और हाथ कट गए थे। सभी बाणों ने रावण के सिरों और हाथों को मंदोदरी के सामने छोड़ दिया था। ये देखकर मंदोदरी बेहोश हो गई थी। इसके बाद सभी बाण वापस श्रीराम के तरकश में वापस आ गए थे।

भाई की मौत के बाद विभीषण थे दुखी

रावण वध के बाद उनके छोटे भाई विभीषण बहुत दुखी थे। तब श्रीराम के कहने पर लक्ष्मण ने विभीषण को समझाया कि दुख न करें। कुछ समय बाद विभीषण का दुख शांत हुआ। इसके बाद श्रीराम के कहने पर विभीषण ने रावण का अंतिम संस्कार किया। श्रीराम का वनवास चल रहा था, इस कारण उन्होंने लंका नगर में प्रवेश नहीं किया। श्रीराम ने लक्ष्मण, हनुमानजी, सुग्रीव, अंगद, नल, नील, जाम्बवान् आदि को बुलाया और इन सभी से कहकर विभीषण का राजतिलक करवा दिया था।

माता सीता के लेने गए थे हनुमान

विभीषण का राजतिलक हो गया, उसके बाद श्रीराम ने हनुमानजी से कहा वे सीता को कुशलता का समाचार सुनाए और उन्हें यहां लेकर आए। हनुमानजी ने लंका में प्रवेश किया और माता सीता को लेकर श्रीराम के पास पहुंचे। इसके बाद सीता की अग्नी परीक्षा हुई और श्रीराम, लक्ष्मण सहित सभी अयोध्या की ओर पुष्पक विमान से चल दिए।