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ईद-ए-मिलाद-उन-नबी: जानिए पैगंबर मोहम्मद हजरत की याद में मनाए जाने वाले इस त्योहार का क्या है महत्व

दुनिया भर में मुसलमान पैग़म्बर हजरत मोहम्मद साहब के जन्मदिन को ईद-ए-मिलाद-उन-नबी (Eid-E-Milad-Un-Nabi) के रूप में मानते हैं।

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eid ae milad un nabi

करिश्मा लालवानी

लखनऊ. दुनिया भर में मुसलमान पैग़म्बर मोहम्मद साहब के जन्मदिन को मनाने के लिए १ और २ दिस्मबर को ईद-ए-मिलाद मना रहे हैं। हम मुसलमानों के अन्य त्योहार जैसे बकरीद , मुहर्रम, ईद उल फितर से वाकिफ हैं, लेकिन ईद-ए-मिलाद-उन-नबी के बारे में कम ही लोगों को जानकारी होगी। ये त्योहार पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब के जन्म की खुशी में मनाया जाता है। पैगंबर हजरत मोहम्मद और उनकी शिक्षा को ये दो दिन समर्पित किए जाते हैं। कुरान के अनुसार ईद-ए-मिलाद-उन-नबी को मौलिद मावलिद और बराफात (Barawafat) के नाम से भी जाना जाता है, जिसका मतलब होता है पैगंबर का जन्मदिन। इस्लामिक कैलंडर के अनुसार पैगंबर मोहम्मद का जन्मदिन रबी' अल अव्वल, तीसरे महीने में मनाया जाता है।

ऐसे मनाया जाता है ये दिन

इस दिन रात भर प्रार्थनाएं होती हैं, सभाएं होती हैं और उनकी शिक्षा को समझा जाता है। उनकी याद में इस दिन जुलूस भी निकलते हैं। हालांकि ये उनके जन्म का दिन माना जाता है, लेकिन मुस्लिम समुदाय के कुछ लोग ये मानते हैं कि इस दिन पैगंबर हजरत मोहम्मद कि मृत्यु हुई थी।

इस दिन को लेकर मुस्लिम समाज में अलग-अलग मत हैं. शिया समुदाय इस बड़े दिन को पैगंबर मोहम्मद हजरत के जन्मदिन के रूप में मनाता है, तो वहीं सुन्नी समाज का ये मानना है कि इस दिन पैगंबर हजरत मोहम्मद कि मृत्यु हुई थी। इस वजह से सुन्नी समुदाय शोक मनाता है। इस दिन को दो अलग-अलग नामों से क्यों मनाया जाता है, इसका कारण हमने यहां बताया है।
मौलिद
ईद-ए-मिलाद-उन-नबी के इस्लामिक पर्व को मौलिद भी कहते हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि पैगंबर मोहम्मद हजरत के जन्म की खुशी में जो गीत गाया जाता है, उसे मौलूद कहा जाता है। ऐसा माना जाता है कि मौलूद संगीत को सुनना न सिर्फ संसारिक है, बल्कि उस व्यक्ति को स्वर्ग नसीब होता है।
बारावफात
ईद-ए-मिलाद-उन-नबी को बारावफात के नाम से भी जाना जाता है। इस शब्द का मतलब होता है बारह दिन जिसमें पैगंबर की तबियत खराब होने की वजह से मृत्यु हो गयी थी।

लखनऊ के जयनगर तकरोही इंदिरानगर के रहने वाले मौलाना मोहम्मद अनवार हुसैन ने बताया कि ये दिन पैगंबर मोहम्मद हजरत के जन्मदिन की खुशी में मनाया जाता है। हालांकि कुछ लोग ऐसा भी मानते हैं कि इस दिन उनकी मृत्यु हुई थी, लेकिन उनका जन्मदिन मनाने वाले लोग ये दिन धूमधाम से मनाते हैं। इस दिन जुलूस निकलता है, मिठाईयां बांटी जाती हैं और दुनिया बर में खुशी मनाते हैं।