
जयपुर . नई हज नीति और नोटबंदी हज की हसरतों पर पानी फेर रही है। हज आवेदन की पहली बार इतनी सुस्त रफ्तार है कि आवेदन शुरू होने के 15 दिन में इस बार सिर्फ 3000 लोग ही हज के लिए आगे आए हैं। जबकि पिछले इसी अवधि में 7000-8000 आवेदन जमा हो चुके थे। पिछले साल पूरे प्रदेश से करीब 18000 लोगों ने आवेदन किए थे। हज संगठनों का आकलन है कि इस बार यह आंकड़ा 10 हजार के पार जाना भी संभव नहीं लग रहा है। नई हज नीति में लगातार आवेदन करने वालों को इस बार बिना लॉटरी हज की सुविधा नहीं मिलना इसका एक कारण है तो नोटबंदी का असर भी इसके लिए जिम्मेदार बताया जा रहा है।
15 दिन में ही आ जाते हैं आधे आवेदन
हज संगठनों के अनुसार आवेदन शुरू होने के 15 दिन में ही 50 से 60 प्रतिशत आवेदन आ जाते हैं। जबकि इस बार मात्र 30 फीसदी आवेदन ही पहुंचे हैं। इस बार आवेदन सवा महीने पहले ही शुरू कर दिए गए। इससे भी शुल्क जमा कराने के लिए अचानक बड़ी रकम एकत्र करना मुश्किल हो गया।
पैसा आएगा तो करेंगे आवेदन
इस बार नई व्यवस्था से कई लोग मायूस दिखे। लोगों ने बताया कि वे भी हज करना चाहते हैं। नोटबंदी के बाद जेब में पैसा इतना नहीं है कि हज पर जाया जाए। वहीं सवा महीने पहले ही आवेदन शुरू करना एकदम गलत कदम है।
ऑनलाइन आवदेन पर जोर
हज संगठन आवेदन भरवाने में लोगों को निशुल्क सहयोग दे रहे हैं। राजस्थान हज वेलफेयर सोसायटी अब तक 590 आवेदन भरवा चुकी है। सभी आवेदन ऑनलाइन भरे गए हैं। इसी तरह पिंकसिटी हज वेलफेयर सोसायटी समेत अन्य संगठन आवेदन भरवा रहे हैं।
सुधार जरूरी
नई हज नीति में सुधार करना चाहिए ताकि लोग नोटबंदी से उबर सकें। नोटबंदी व नए नियमों के कारण लोगों में हज के आवेदन भरने में दिक्कत आ रही है। एेसे में कई लोग आवेदन नहीं कर रहे हैं।
-हाजी निजामुद्दीन, महासचिव, राजस्थान हज वेलफेयर सोसायटी
Published on:
26 Nov 2017 07:53 pm
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