उन्होंने बताया कि उप नगरीय डिपो में 25 नवंबर 2015 को संविदा कर्मचारियों ने डिपो में हो रहे शोषण व उत्पीडऩ को लेकर आंदोलन किया जिसमें पांच चालकों व तीन बाह्य श्रोत कर्मचारियों को सेवा से बाहर कर दिया गया। बाद में तीन चालकों को वापस सेवा में ले लिया गया जबकि बचे हुए चार कर्मचारियों को आज तक सेवा में नहीं लिया गया है। श्री वर्मा ने बताया कि इसी तरह हैदरगढ़ डिपो के एक परिचालक द्वारा कम आय अर्जित करने की शिकायत सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक ने क्षेत्रीय प्रबंधक से की जिस पर आरएम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए 24 जून को परिचालक का स्थानांतरण बाराबंकी के लिए कर दिया, लेकिन एक संगठन के दबाव के चलते क्षेत्रीय प्रबंधक ने तीन दिन बाद ही परिचालक का स्थानांतरण रद कर दिया। सेंट्रल रीजनल वर्कशाप कर्मचारी संघ के क्षेत्रीय अध्यक्ष घनश्याम सिंह ने आरएम की कार्यशैली पर सवालिया निशान लगाते हुए कहा कि शासन का आदेश है कि कर्मचारी का अगर कोई प्रकरण लंबित है तो उसे तीन वर्ष के अंदर हरहाल में निस्तारित कर दिया जाए। आलम यह है कि तीन वर्ष तो दूर पांच से 10 वर्ष तक के कई प्रकरण अभी भी लंबित हैं। संगठन के पदाधिकारियों का कहना है कि सोमवार को उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम के प्रबंध निदेशक से मिलकर वे आरएम की शिकायत करेंगे। अगर समस्या का समाधान नहीं होता है तो हड़ताल करने पर विचार किया जाएगा।