
Medanta hospital kidney donate racket:दिल्ली-एनसीआर में आए दिन ठगी की अनेक खबरें सामने आती रहती हैं, जिन्हें सुनकर लोग हैरान रह जाते हैं। इसी बीच गुरुग्राम में ऐसा ही एक और मामला सामने आया है, जिसे जानकर पुलिस भी हैरान है। दरअसल, यहां पर किडनी डोनेट करने और उसके बदले में मोटी रकम देने का वादा कर लोगों को ठगी की जाल में फंसाया जा रहा था। मेदांता अस्पताल के मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. संजय दुरानी ने इस मामले की शिकायत पुलिस से की है। उन्होंने बताया कि मेदांता का नाम लेकर कैसे लोगों को किडनी डोनेट करने के बदले में 3 करोड़ रुपए देने का झांसा दिया जाता था।
मेदांता अस्पताल के मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. संजय दुरानी द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत में आरोप लगाया गया है कि इस साजिश की मुख्य रचयिता प्रिया संतोष है, जो पूरे गिरोह को मैनेज करती है और खुद को मेदांता की डॉक्टर बताती है। लोगों से संपर्क साधने के लिए वह सोशल मीडिया का इस्तेमाल करती थी। वॉट्सऐप ग्रुप के माध्यम से लोगों को यह ऑफर दिया जाता था कि किसी गंभीर मरीज को किडनी की जरूरत है और यदि कोई दान करेगा तो उसे मेदांता की ओर से 3 करोड़ रुपये की राशि दी जाएगी। लोगों को भरोसा दिलाने के लिए बाकायदा एक विज्ञापन तैयार किया जाता था, जिसमें मेदांता की तस्वीर लगी होती थी। इतना ही नहीं, मेदांता स्टाफ के फर्जी आई-कार्ड भी लोगों को भेजे जाते थे, ताकि उन्हें पूरी तरह भरोसा हो जाए। वहीं, इस गिरोह ने मेदांता अस्पताल के नाम से एक फेक वेबसाइट बना भी बना था, जिसमें मेदांता की लोगो भी लगा हुआ था।
फर्जी मेदांता की डॉक्टर और गिरोह की सरगना प्रिया संतोष के जाल में एक महिला फंस गई। पीड़ित महिला प्रतीक्षा पुजारी का कहना है कि किडनी डोनेट करने के बदले उन्हें 3 करोड़ रुपये देने का ऑफर दिया गया था। भरोसा दिलाने के लिए व्हाट्सऐप पर मेदांता का आई-कार्ड और कुछ दस्तावेज भेजे गए, जिससे उन्हें यकीन हो गया कि मामला फर्जी नहीं है। इसके बाद महिला से कहा गया कि किडनी डोनेशन के लिए पहले पंजीकरण कराना होगा, जिसके लिए आठ हजार रुपये शुल्क लगेगा। महिला ने पंजीकरण कराने के लिए ठगों को पैसे भेज दिए। इसके बाद महिला को यह कहकर भरोसा दिलाया गया कि 3 करोड़ रुपये की राशि उनके खाते में भेजने के लिए पहले 20 हजार रुपये टैक्स के रूप में जमा करने होंगे। दोबारा पैसों की मांग होने पर महिला को शक हुआ कि दाल में कुछ काला है और वह तुरंत अस्पताल प्रशासन के पास पहुंची और पूरी घटना की जानकारी दी। इसके बाद पता चला कि प्रिया संतोष नाम की कोई महिला मेदांता अस्पताल में डॉक्टर नहीं है।
वहीं, मेदांता की तरफ से स्पष्ट कर दिया गया है कि इस मामले से अस्पताल का कोई संबंध नहीं है; यह एक प्रकार का फ्रॉड है। बता दें कि अस्पताल की तरफ से ठगी और मेदांता का नाम खराब करने को लेकर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई है। वहीं, मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस ने आरोपी प्रिया संतोष और उसके अन्य अज्ञात साथियों के खिलाफ कई धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है और उन्हें गिरफ्तार करने के लिए तलाश कर रही है।
Updated on:
22 Jan 2026 02:11 pm
Published on:
22 Jan 2026 02:11 pm
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