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राजाओं के समय में नहीं मिलता छठ पूजा का जिक्र, लेकिन ‌ब्रिटिश गर्वनर की बहन ने मनाया था

यूपी और बिहार में छठ पूजा एक त्योहार नहीं, संस्कार है ‘अपनों से और अपनी मिट्टी से जुड़े रहने का। छठ पूजा की शुरुआत कब और कहां हुई, इसे लेकर कई तरह की कथाएं हैं। लेकिन ये त्योहार प्रकृति और हमारे घर, खेत-खलिहान से जुड़ा है। ये ऐसी पूजा है जिसमें किसी तरह के मंत्र जाप, पंडित, लिंग, धर्म या शास्त्र से कोई लेनदेना नहीं है। आईए छठ पूजा से जुड़ी पूरी स्टोरी को हम 8 ग्राफिक्स में जानते हैं...

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लखनऊ

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Vikash Singh

Oct 30, 2022

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छठ व्रत एक कठिन तपस्या की तरह माना जाता है। छठ व्रत अधिकतर महिलाएं ही करती हैं। लेकिन कुछ पुरुष भी इस व्रत को रखते हैं। ।

उत्तर भारत में छठ पूजा के लिए गजब का क्रेज है। देश के कोने-कोने में यहां के रहने वाले लोग साल के किसी त्योहार में भले ही अपने घर नहीं आ पाएं, लेकिन छठ पूजा अपने घर वो जरूर आते हैं।

यूपी के गाजीपुर जिले के रहने वाले आयुष और अंकुश कहते हैं कि नॉर्थ इंडिया के लोगों के लिए छठ पूजा बस त्योहार नहीं है बल्कि एक ईमोशन है। एक ऐसा रिश्ता है जो कल्चरल और सोशल रूप से सबको जोड़ता है। इसी पर्व पर फैमिली के सभी लोग एक साथ मिल पाते हैं।

छठ पूजा के समय ट्रेनों में महीनों की वेटिंग, स्टेशनों पर घर जाने के लिए भारी भीड़, खड़े होकर हजार किलोमीटर की यात्रा यह जानने के लिए काफी है कि यहां के लोग इस पूजा से अपने को कितना करीब पाते हैं।

नीचे ग्राफिक्स के जरिए डीटेल स्टोरी में उतरते हैं...


सोर्सेज

टाइगर्स दरबार्स एंड किंग्स, 1837, फेनी ईडन्स

नवरभारत गोल्ड में अरुण सिंह का लेख, 2022